वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इस बजट में सीटीटी लगाने का मन बना लिया है। सीएनबीसी आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक शेयर बाजार में एसटीटी की तरह अब कमोडिटी ट्रांजैक्शन टैक्स लगाने की पूरी तैयारी है।
दरअसल नवंबर में कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय ने सीटीटी का विरोध करते हुए वित्त मंत्री को चिट्ठी लिखी थी। सूत्रों का कहना है कि चिट्ठी लिखने के बाद वित्त मंत्रालय और कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय के बीच बैठक हुई। इस बैठक में कंज्यूमर्स अफेयर्स मंत्रालय ने सीटीटी के दायरे से कम से कम एग्रो कमोडिटी को बाहर रखने की मांग की थी। कमोडिटी एक्सचेंजों पर 11.8 फीसदी एग्रो कमोडिटी का कारोबार होता है।
वहीं पिछले हफ्ते कमोडिटी एक्सचेंज के प्रतिनिधियों ने भी इस मसले पर मुंबई में वित्त मंत्री से मुलाकात की। हालांकि कमोडिटी एक्सचेंज की सीटीटी नहीं लगाने की मांग से वित्त मंत्री ने बैठक में असहमति जता दी थी।
सूत्रों के मुताबिक सीटीटी केवल नॉन-एग्रो कमोडिटी पर लगाया जाएगा। बुलियन, मेटल और एनर्जी कमोडिटी पर सीटीटी लगाया जा सकता है। गेहूं और खाने के तेल जैसी एग्रो कमोडिटी पर सीटीटी नहीं लगेगा। सरकार की सीटीटी लगाने से 3,000-4,000 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है।
हालांकि जानकारों का मानना है कि घरेलू कमोडिटी वायदा बाजार अभी एक उभरता हुआ बाजार है, सरकार को अभी इसे और बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। मौजूदा स्थिति में टैक्स लगने से कमोडिटी वायदा बाजार की ग्रोथ पर असर पड़ेगा।
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दरअसल नवंबर में कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय ने सीटीटी का विरोध करते हुए वित्त मंत्री को चिट्ठी लिखी थी। सूत्रों का कहना है कि चिट्ठी लिखने के बाद वित्त मंत्रालय और कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय के बीच बैठक हुई। इस बैठक में कंज्यूमर्स अफेयर्स मंत्रालय ने सीटीटी के दायरे से कम से कम एग्रो कमोडिटी को बाहर रखने की मांग की थी। कमोडिटी एक्सचेंजों पर 11.8 फीसदी एग्रो कमोडिटी का कारोबार होता है।
वहीं पिछले हफ्ते कमोडिटी एक्सचेंज के प्रतिनिधियों ने भी इस मसले पर मुंबई में वित्त मंत्री से मुलाकात की। हालांकि कमोडिटी एक्सचेंज की सीटीटी नहीं लगाने की मांग से वित्त मंत्री ने बैठक में असहमति जता दी थी।
सूत्रों के मुताबिक सीटीटी केवल नॉन-एग्रो कमोडिटी पर लगाया जाएगा। बुलियन, मेटल और एनर्जी कमोडिटी पर सीटीटी लगाया जा सकता है। गेहूं और खाने के तेल जैसी एग्रो कमोडिटी पर सीटीटी नहीं लगेगा। सरकार की सीटीटी लगाने से 3,000-4,000 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है।
हालांकि जानकारों का मानना है कि घरेलू कमोडिटी वायदा बाजार अभी एक उभरता हुआ बाजार है, सरकार को अभी इसे और बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। मौजूदा स्थिति में टैक्स लगने से कमोडिटी वायदा बाजार की ग्रोथ पर असर पड़ेगा।
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