होली की छुट्टी और एक्सपायरी के पहले बाजार सीमित दायरे में घूमते नजर आए। सेंसेक्स 23 अंक चढ़कर 18704 और निफ्टी 8 अंक चढ़कर 5642 पर बंद हुए।
लेकिन, मिडकैप शेयरों पर बिकवाली हावी रही। निफ्टी मिडकैप करीब 1 फीसदी टूटा। छोटे शेयरों में सुस्ती रही और बीएसई स्मॉलकैप मामूली बढ़त पर बंद हुआ।
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयर 1.5 फीसदी और एफएमसीजी शेयर 1 फीसदी चढ़े। तकनीकी, आईटी, ऑटो और बैंक शेयर 0.6-0.3 फीसदी मजबूत हुए। हेल्थकेयर शेयरों में सुस्ती रही।
ऑयल एंड गैस, रियल्टी और कैपिटल गुड्स शेयर 2 फीसदी टूटे। पावर शेयरों में 1 फीसदी की गिरावट आई। मेटल और सरकारी कंपनियों के शेयर 0.3 फीसदी फिसले।
बाजार की चाल
अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से कमजोरी के संकेत मिलने से घरेलू बाजारों ने गिरावट के साथ शुरुआत की। लेकिन, कारोबार के पहले ही घंटे में बाजार संभले और सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में लौटे।
दोपहर तक बाजार में उतार-चढ़ाव भरा कारोबार दिखाई दिया। लेकिन, एशियाई बाजारों में गिरावट कम होने से घरेलू बाजारों ने भी मजबूती का रुख किया।
हालांकि, यूरोपीय बाजारों की मजबूत शुरुआत के बावजूद घरेलू बाजारों ने बढ़त गंवा दी। सेंसेक्स-निफ्टी ने लाल निशान में गोता लगाया। मिडकैप शेयरों में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई।
कारोबार के आखिरी आधे में घंटे में बाजार ने फिर से रफ्तार पकड़ने की कोशिश की। लेकिन, बाजार मजबूती को बनाए नहीं रख सके और दोबारा फिसले।
क्या चढ़ा, क्या गिरा
दिग्गजों में भारती एयरटेल 3 फीसदी चढ़ा। भारती एयरटेल की सब्सिडियरी कंपनी ने 10 साल के बॉन्ड्स जारी कर 50 करोड़ डॉलर जुटाए हैं।
कोल इंडिया में 1.5 फीसदी की तेजी आई। खबरें हैं कि सरकार कंपनी की रीस्ट्रक्चरिंग के लिए सलाहकारों की जल्द नियुक्ति करने वाली है।
एचयूएल, रैनबैक्सी, टाटा मोटर्स, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल टेक, टीसीएस 2.5-1 फीसदी मजबूत हुए।
क्रेडिट सुईस ने एनआईआईटी टेक को आउटपरफॉर्मर की रेटिंग दी है। एनआईआईटी टेक के शेयरों में 2.5 फीसदी तक की तेजी आई।
आईआरबी इंफ्रा को गोवा-कर्नाटक सीमा को 4 लेन का करने के लिए 2,600 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है।
एमटीएनएल बोर्ड ने 3000 करोड़ रुपये एनसीडी के जरिए जुटाने की मंजूरी दे दी है। एमटीएनएल 0.5 फीसदी तक मजबूत हुआ।
एलेंबिक फार्मा को एंटी हाइपर टेंशन दवा बनाने के लिए अमेरिकी एफडीए से मंजूरी मिली है। एलेंबिक फार्मा 1 फीसदी तक चढ़ा।
रिलायंस इंफ्रा 5.5 फीसदी लुढ़का। शेयर 2003 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा है। रिलांयस कैपिटल, रिलायंस कम्यूनिकेशंस, रिलायंस पावर जैसे बाकी एडीएजी शेयरों में 2.25-2.5 फीसदी की गिरावट आई।
रिलायंस इंडस्ट्रीज में 3.5 फीसदी की गिरावट आई। शेयर 29 नवंबर 2012 के बाद के निचले स्तर पर पहुंचा है।
फाइजर ने डेट्रॉल एलए नामक दवा के पेटेंट को लेकर ल्यूपिन के खिलाफ अदालत में मुकदमा कर दिया है। लुपिन 1 फीसदी गिरा।
एलएंडटी ने पैंटालून से नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कारोबार में 50 फीसदी हिस्सा 500 करोड़ रुपये में खरीदा है। एलएंडटी 2 फीसदी और पैंटालून रिटेल 4 फीसदी टूटे।
मूडीज द्वारा बीएफएसआर रेटिंग को घटाने के बाद सिंडिकेट बैंक 4 फीसदी, आईओबी 2 फीसदी और ओरियंटल बैंक 1.5 फीसदी लुढ़के।
यूनाइटेड स्पिरिट्स के शेयरों में 1 फीसदी कमजोरी आई। खबरे हैं कि अगले हफ्ते डियाजियो यूनाइटेड स्पिरिट्स के लिए ओपन ऑफर ला सकता है।
आंजनेया लाइफ 5 फीसदी टूटा। 22 कारोबारी सत्रों में आंजनेया लाइफकेयर के शेयर 80.8 फीसदी लुढ़क चुके हैं।
जेट एयरवेज 1 वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट 60 केबिन क्रू के साथ एतिहाद को लीज पर देगी। जेट एयरवेज 1.5 फीसदी गिरा।
डीबी रियल्टी के प्रोमोटर्स ने एफडीएफसी के पास 2.6 करोड़ शेयर गिरवी रखें हैं। डीबी रियल्टी 3 फीसदी लुढ़का।
उत्तम गालवा ने क्यूआईपी के लिए फ्लोर प्राइस 76.48 रुपये प्रति शेयर तय किया है। उत्तम गालवा 4.5 फीसदी तक टूटा।
अंतर्राष्ट्रीय संकेत
एशियाई बाजारों में शंघाई कंपोजिट 1.25 फीसदी टूटा। निक्केई 0.6 फीसदी गिरा। स्ट्रेट्स टाइम्स, कॉस्पी और हैंग सैंग में 0.6-0.25 फीसदी की मजबूती आई।
यूरोपीय बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। सीएसी 0.75 फीसदी चढ़ा है। डीएएक्स में करीब 0.5 फीसदी की मजबूती है। एफटीएसई में 0.2 फीसदी की बढ़त है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आई है। रुपया 54.31 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। सोमवार को रुपया 54.17 पर बंद हुआ था।
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Tuesday, March 26, 2013
कैसे रहेंगे कंपनियों के चौथी तिमाही नतीजे:
कुछ ही दिनों में कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे आना शुरू होंगे। चौथी तिमाही में भी कंपनियों के नतीजों पर दबाव बना रहेगा। आय में ग्रोथ की रफ्तार कम होगी साथ ही मार्जिन में भी कमी आ सकती है।
चौथी तिमाही में कंपनियों की आय में ग्रोथ घटकर 7 फीसदी के आसपास आ सकती है। वहीं ऑपरेटिंग मार्जिन में 0.3-0.5 फीसदी की कमी संभव है।
निवेश आधारित सेक्टर जैसे कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स, सीमेंट, स्टील के 6-7 तिमाही के नतीजे खराब रहे हैं और इस तिमाही में भी ये सिलसिला जारी रहने की आशंका है। प्रोजेक्ट में देरी से कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स कंपनियों पर दबाव देखा जाएगा।
खपत आधारित सेक्टर जैसे 2 व्हीलर, कार, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग में भी कमी दिख रही है जिससे इस तिमाही में इनके नतीजे ज्यादा अच्छे रहने की उम्मीद नहीं है। ऊंची ब्याज दरों से इन कंपनियों के मुनाफे पर असर देखा जा रहा है।
रुपये में कमजोरी से आईटी, फार्मा कंपनियों के नतीजे बेहतर रह सकते हैं। आईटी और फार्मा कंपनियों में ज्यादातर निर्यात आधरित कारोबार होने से इन कंपनियों के नतीजे अच्छे रह सकते हैं।
कमाई बढ़ने से एफएमसीजी, सीमेंट, चीनी कंपनियों में अच्छी ग्रोथ देखी जाएगी। वित्त वर्ष 2014 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों के घटने का असर देखा जाएगा और इससे ऑटो, रियल एस्टेट सेक्टर में सुधार आएगा।
पिछले 9 महीने में कैपिटल गुड्स सेक्टर में ऑर्डर घटने की वजह से नतीजे खराब रहे हैं। चौथी तिमाही में भी ये स्थिति सुधरने की उम्मीद नहीं है।
चौथी तिमाही में स्टील कंपनियों की आय में ग्रोथ घटने की आशंका है। हालांकि टैरिफ बढ़ने और क्षमता विस्तार से पावर जेनरेशन कंपनियों को फायदा हो सकता है और इनके नतीजे अन्य सेक्टर के मुकाबले अच्छे रह सकते हैं।
मांग घटने से कमर्शियल व्हीकल, हाउसिंग, होटल कंपनियों पर दबाव देखा जाएगा। अगली 1-2 तिमाही तक इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव रहेगा और आय में कमी आएगी।
मीडिया सेक्टर में विज्ञापनों की घटती संख्या के चलते थोड़ी मंदी देखी जाएगी। हालांकि डिजिटाइजेशन के चलते टीवी मीडिया से जुड़ी कंपनियों के नतीजे अच्छे रह सकते हैं।
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चौथी तिमाही में कंपनियों की आय में ग्रोथ घटकर 7 फीसदी के आसपास आ सकती है। वहीं ऑपरेटिंग मार्जिन में 0.3-0.5 फीसदी की कमी संभव है।
निवेश आधारित सेक्टर जैसे कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स, सीमेंट, स्टील के 6-7 तिमाही के नतीजे खराब रहे हैं और इस तिमाही में भी ये सिलसिला जारी रहने की आशंका है। प्रोजेक्ट में देरी से कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स कंपनियों पर दबाव देखा जाएगा।
खपत आधारित सेक्टर जैसे 2 व्हीलर, कार, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग में भी कमी दिख रही है जिससे इस तिमाही में इनके नतीजे ज्यादा अच्छे रहने की उम्मीद नहीं है। ऊंची ब्याज दरों से इन कंपनियों के मुनाफे पर असर देखा जा रहा है।
रुपये में कमजोरी से आईटी, फार्मा कंपनियों के नतीजे बेहतर रह सकते हैं। आईटी और फार्मा कंपनियों में ज्यादातर निर्यात आधरित कारोबार होने से इन कंपनियों के नतीजे अच्छे रह सकते हैं।
कमाई बढ़ने से एफएमसीजी, सीमेंट, चीनी कंपनियों में अच्छी ग्रोथ देखी जाएगी। वित्त वर्ष 2014 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों के घटने का असर देखा जाएगा और इससे ऑटो, रियल एस्टेट सेक्टर में सुधार आएगा।
पिछले 9 महीने में कैपिटल गुड्स सेक्टर में ऑर्डर घटने की वजह से नतीजे खराब रहे हैं। चौथी तिमाही में भी ये स्थिति सुधरने की उम्मीद नहीं है।
चौथी तिमाही में स्टील कंपनियों की आय में ग्रोथ घटने की आशंका है। हालांकि टैरिफ बढ़ने और क्षमता विस्तार से पावर जेनरेशन कंपनियों को फायदा हो सकता है और इनके नतीजे अन्य सेक्टर के मुकाबले अच्छे रह सकते हैं।
मांग घटने से कमर्शियल व्हीकल, हाउसिंग, होटल कंपनियों पर दबाव देखा जाएगा। अगली 1-2 तिमाही तक इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव रहेगा और आय में कमी आएगी।
मीडिया सेक्टर में विज्ञापनों की घटती संख्या के चलते थोड़ी मंदी देखी जाएगी। हालांकि डिजिटाइजेशन के चलते टीवी मीडिया से जुड़ी कंपनियों के नतीजे अच्छे रह सकते हैं।
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फाइजर ने ल्यूपिन को अदालत में घसीटा:
2 दवा कंपनियों की लड़ाई अदालत में पहुंच गई है। फाइजर ने डेट्रॉल एलए नामक दवा के पेटेंट को लेकर ल्यूपिन के खिलाफ अदालत में मुकदमा कर दिया है। ल्यूपिन ने डेट्राल एलए के जेनरिक वर्जन के लिए अर्जी दी हुई है। डेट्रॉल एलए की सालाना बिक्री 60 करोड़ डॉलर की है और ये दवा मूत्ररोग के विकारों में काम आती है।
डेट्रॉल के जेनरिक वर्जन के लिए सबसे पहले टेवा ने अर्जी दी हुई है। इंपैक्स, मायलान, एपोटेक्स और टोरेंट फार्मा ने भी डेट्रॉल एलए के जेनरिक वर्जन के लिए अर्जी दी हुई है। फाइजर ने जेनरिक कंपनियों के साथ पेटेंट का मुद्दा सुलझा लिया है। डेट्रॉल के जेनरिक वर्जन के साल 2014 के शुरुआत तक बाजार में आने की उम्मीद है।
हालांकि फाइजर के मुकदमा दायर करने के चलते अमेरिकी बाजार में ल्यूपिन की डेट्राल के साथ एंट्री देरी से होने की आशंका है। इस खबर के बाद एनएसई पर ल्यूपिन के शेयरों में 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
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डेट्रॉल के जेनरिक वर्जन के लिए सबसे पहले टेवा ने अर्जी दी हुई है। इंपैक्स, मायलान, एपोटेक्स और टोरेंट फार्मा ने भी डेट्रॉल एलए के जेनरिक वर्जन के लिए अर्जी दी हुई है। फाइजर ने जेनरिक कंपनियों के साथ पेटेंट का मुद्दा सुलझा लिया है। डेट्रॉल के जेनरिक वर्जन के साल 2014 के शुरुआत तक बाजार में आने की उम्मीद है।
हालांकि फाइजर के मुकदमा दायर करने के चलते अमेरिकी बाजार में ल्यूपिन की डेट्राल के साथ एंट्री देरी से होने की आशंका है। इस खबर के बाद एनएसई पर ल्यूपिन के शेयरों में 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
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स्टील कीमतों में नहीं होगी बढ़ोतरी: सेल:
वैश्विक मंदी की वजह से घरेलू स्टील की मांग पर असर पड़ रहा है। हाल में आई गिरावट के बाद घरेलू स्टील की मांग में बढ़ोतरी आने की उम्मीद है।
सेल के चेयरमैन, सी एस वर्मा के मुताबिक मौजूदा स्तर से अब स्टील के दामों में बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। 2012 में स्टील के दाम 10 फीसदी तक घटे थे।
22 मार्च 2013 को सेल में एलआईसी का हिस्सा बढ़कर 9.13 फीसदी हो गया है, जबकि 31 दिसंबर 2012 को कंपनी में एलआईसी का हिस्सा 3.69 फीसदी था। सेल के ओएफएस में एलआईसी ने 35 फीसदी हिस्से के लिए बोली लगाई थी।
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सेल के चेयरमैन, सी एस वर्मा के मुताबिक मौजूदा स्तर से अब स्टील के दामों में बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। 2012 में स्टील के दाम 10 फीसदी तक घटे थे।
22 मार्च 2013 को सेल में एलआईसी का हिस्सा बढ़कर 9.13 फीसदी हो गया है, जबकि 31 दिसंबर 2012 को कंपनी में एलआईसी का हिस्सा 3.69 फीसदी था। सेल के ओएफएस में एलआईसी ने 35 फीसदी हिस्से के लिए बोली लगाई थी।
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बाजार से उठा कंपनियों का भरोसा: सेबी:
सेबी ने माना है कि कंपनियों की पूंजी जुटाने की क्षमता में कमी आई है। सेबी के चेयरमैन, यू के सिन्हा का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कंपनियों द्वारा बाजार से जुटाई गई पूंजी में भारी गिरावट आई है।
यू के सिन्हा के मुताबिक पिछले 3 साल में कंपनियों ने 60000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना टाली है। वित्त वर्ष 2013 में अब तक कंपनियों ने बाजार से 14400 करोड़ रुपये जुटाए हैं। जबकि पिछले साल ये आंकड़ा 16000 करोड़ रुपये था।
कंपनियों द्वारा कम पूंजी जुटाए जाने का सीधा पर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। निवेश घटने से ग्रोथ की रफ्तार सुस्त होती है। लेकिन, यू के सिन्हा का मानना है कि सरकार और आरबीआई द्वारा उठाए गए कदम ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए काफी है।
हाल में लिस्टेड कंपनियों में से 60 फीसदी कंपनियों के शेयरों का भाव इश्यू प्राइस के नीचे आ चुका है। यू के सिन्हा के मुताबिक आईपीओ शेयरों पर नजर रखने के लिए इंवेस्टर बैंकर्स की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है।
जून से 25 फीसदी पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम लागू होना है। यू के सिन्हा के मुताबिक नियमों को लागू न करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रावाई होगी। 200 कंपनियों में अब तक प्रमोटरों के पास 75 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है।
सेबी शेयर बायबैक के लिए जल्द नियम बनाने वाला है। शेयर बायबैक नियम निवेशकों के हित की रक्षा करने के लिए बनाए जाएंगे। इसी साल सेबी इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए नए नियमों का ऐलान करेगा।
इसके अलावा सेबी बिना आईपीओ के एसएमई ट्रेडिंग को मंजूरी देने पर विचार कर रहा है। सभी निवेश विकल्पों के लिए एक ही केवाईसी फॉर्म लागू करने पर 2 महीनों में अंतिम सिफारिशें जारी की जाएंगी।
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यू के सिन्हा के मुताबिक पिछले 3 साल में कंपनियों ने 60000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना टाली है। वित्त वर्ष 2013 में अब तक कंपनियों ने बाजार से 14400 करोड़ रुपये जुटाए हैं। जबकि पिछले साल ये आंकड़ा 16000 करोड़ रुपये था।
कंपनियों द्वारा कम पूंजी जुटाए जाने का सीधा पर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। निवेश घटने से ग्रोथ की रफ्तार सुस्त होती है। लेकिन, यू के सिन्हा का मानना है कि सरकार और आरबीआई द्वारा उठाए गए कदम ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए काफी है।
हाल में लिस्टेड कंपनियों में से 60 फीसदी कंपनियों के शेयरों का भाव इश्यू प्राइस के नीचे आ चुका है। यू के सिन्हा के मुताबिक आईपीओ शेयरों पर नजर रखने के लिए इंवेस्टर बैंकर्स की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है।
जून से 25 फीसदी पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम लागू होना है। यू के सिन्हा के मुताबिक नियमों को लागू न करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रावाई होगी। 200 कंपनियों में अब तक प्रमोटरों के पास 75 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है।
सेबी शेयर बायबैक के लिए जल्द नियम बनाने वाला है। शेयर बायबैक नियम निवेशकों के हित की रक्षा करने के लिए बनाए जाएंगे। इसी साल सेबी इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए नए नियमों का ऐलान करेगा।
इसके अलावा सेबी बिना आईपीओ के एसएमई ट्रेडिंग को मंजूरी देने पर विचार कर रहा है। सभी निवेश विकल्पों के लिए एक ही केवाईसी फॉर्म लागू करने पर 2 महीनों में अंतिम सिफारिशें जारी की जाएंगी।
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22 दिन में आंजनेया लाइफ 81% टूटा:
फरवरी से आंजनेया लाइफकेयर के शेयरों की पिटाई हो रही है। 22 कारोबारी सत्रों में आंजनेया लाइफकेयर के शेयर 80.8 फीसदी लुढ़क चुके हैं। आज भी शेयर 5 फीसदी गिरा हुआ है।
18 मार्च को आंजनेया लाइफकेयर ने 7.5 करोड़ डॉलर के एफसीसीबी इश्यू लाई थी, जिसे ठंडा रिस्पॉन्स मिला। कंपनी सिर्फ 4 करोड़ डॉलर की जुटाई पाई।
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18 मार्च को आंजनेया लाइफकेयर ने 7.5 करोड़ डॉलर के एफसीसीबी इश्यू लाई थी, जिसे ठंडा रिस्पॉन्स मिला। कंपनी सिर्फ 4 करोड़ डॉलर की जुटाई पाई।
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दिशाहीन बाजार, मिडकैप शेयर टूटे:
बाजार असमंजस में नजर आ रहे हैं और उतार-चढ़ाव भरा कारोबार हो रहा है। दोपहर 2:35 बजे, सेंसेक्स 38 अंक चढ़कर 18719 और निफ्टी 11 अंक चढ़कर 5645 के स्तर पर हैं। मिडकैप शेयर 1.25 फीसदी टूटे हैं।
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और एफएमसीजी शेयर 1 फीसदी चढ़े हैं। तकनीकी, आईटी, ऑटो और बैंक शेयर 0.6-0.2 फीसदी मजबूत हैं। हेल्थकेयर शेयर सुस्त हैं।
रियल्टी शेयर 2.5 फीसदी लुढ़के हैं। कैपिटल गुड्स, ऑयल एंड गैस और पावर शेयर 2-1 फीसदी गिरे हैं। सरकारी कंपनियों के शेयरों में 0.25 फीसदी की कमजोरी है।
निफ्टी शेयरों में एचयूएल, एचडीएफसी, भारती एयरटेल, रैनबैक्सी, टाटा मोटर्स, विप्रो, कोल इंडिया, टीसीएस, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक 2.5-1 फीसदी चढ़े हैं।
दिग्गजों में रिलायंस इंफ्रा 5.5 फीसदी लुढ़का है। सीमंस, डीएलएफ, अंबुजा सीमेंट, गेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पीएनबी, एलएंडटी, टाटा स्टील 4.25-2 फीसदी टूटे हैं।
यूरोपीय बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। सीएसी 0.6 फीसदी और डीएएक्स 0.3 फीसदी मजबूत हैं। एफटीएसई में मामूली बढ़त है।
एशियाई बाजारों में शंघाई कंपोजिट 1.25 फीसदी टूटा है। निक्केई 0.6 फीसदी गिरा है। स्ट्रेट्स टाइम्स, कॉस्पी और हैंग सैंग में 0.5-0.25 फीसदी की मजबूती है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आई है। रुपया 54.34 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। सोमवार को रुपया 54.17 पर बंद हुआ था।
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कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और एफएमसीजी शेयर 1 फीसदी चढ़े हैं। तकनीकी, आईटी, ऑटो और बैंक शेयर 0.6-0.2 फीसदी मजबूत हैं। हेल्थकेयर शेयर सुस्त हैं।
रियल्टी शेयर 2.5 फीसदी लुढ़के हैं। कैपिटल गुड्स, ऑयल एंड गैस और पावर शेयर 2-1 फीसदी गिरे हैं। सरकारी कंपनियों के शेयरों में 0.25 फीसदी की कमजोरी है।
निफ्टी शेयरों में एचयूएल, एचडीएफसी, भारती एयरटेल, रैनबैक्सी, टाटा मोटर्स, विप्रो, कोल इंडिया, टीसीएस, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक 2.5-1 फीसदी चढ़े हैं।
दिग्गजों में रिलायंस इंफ्रा 5.5 फीसदी लुढ़का है। सीमंस, डीएलएफ, अंबुजा सीमेंट, गेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पीएनबी, एलएंडटी, टाटा स्टील 4.25-2 फीसदी टूटे हैं।
यूरोपीय बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। सीएसी 0.6 फीसदी और डीएएक्स 0.3 फीसदी मजबूत हैं। एफटीएसई में मामूली बढ़त है।
एशियाई बाजारों में शंघाई कंपोजिट 1.25 फीसदी टूटा है। निक्केई 0.6 फीसदी गिरा है। स्ट्रेट्स टाइम्स, कॉस्पी और हैंग सैंग में 0.5-0.25 फीसदी की मजबूती है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आई है। रुपया 54.34 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। सोमवार को रुपया 54.17 पर बंद हुआ था।
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कमोडिटी बाजारः कच्चा तेल 0.25% उछला:
साइप्रस संकट टलने की उम्मीद में कच्चे तेल में तेजी आई है। नायमैक्स पर कच्चे तेल का भाव 95 डॉलर के बेहद करीब पहुंच गया है। घरेलू बाजार में भी बढ़त पर कारोबार हो रहा है। इस बीच सऊदी अरब के तेल मंत्री अली अल नैमी ने कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर तक रहने को रिजनेबल करार दिया है। फिलहाल एमसीएक्स पर कच्चा तेल 0.25 फीसदी की उछाल के साथ 5,170 रुपये पर कारोबार कर रहा है।
नेचुरल गैस मे आज करीब 1 फीसदी की गिरावट आई है। इस हफ्ते लगातार दूसरे दिन नेचुरल गैस में गिरावट पर कारोबार हो रहा है। फिलहाल एमसीएक्स पर नेचुरल गैस 213.50 रुपये के नीचे कारोबार कर रहा है।
सोने में आज भी गिरावट पर कारोबार हो रहा है। एमसीएक्स पर सोने का भाव 29,500 रुपये के नीचे है। वहीं कॉमैक्स पर सोना 1,600 डॉलर के पास कारोबार कर रहा है। इस दौरान चांदी में भी गिरावट आई है और एमसीएक्स में चांदी का भाव 54,000 रुपये के भी नीचे आ गया है।
बेस मेटल्स में आज भी गिरावट पर कारोबार हो रहा है। साइप्रस संकट भले कम होता दिख रहा है, लेकिन दूसरी ओर से कॉपर का स्टॉक तेजी से बढ़ रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज के गोदामों मे कॉपर का स्टॉक पिछले 10 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। एमसीएक्स पर बेस मेटल्स में 0.1-0.5 फीसदी की गिरावट आई है।
कॉपर 0.3 फीसदी लुढ़ककर 416 रुपये के नीचे कारोबार कर रहा है। एल्यूमिनियम में 0.3 फीसदी, निकेल में 0.5 फीसदी, लेड और जिंक में 0.1 फीसदी की कमजोरी आई है।
सोना एमसीएक्स (अप्रैल वायदा) : बेचें - 29540, स्टॉपलॉस - 29640 और लक्ष्य - 29340
चांदी एमसीएक्स (मई वायदा) : बेचें - 54100, स्टॉपलॉस - 54400 और लक्ष्य - 53500
कॉपर एमसीएक्स (अप्रैल वायदा) : बेचें - 417, स्टॉपलॉस - 419 और लक्ष्य - 412
कच्चा तेल एमसीएक्स (अप्रैल वायदा) : खरीदें - 5147, स्टॉपलॉस - 5125 और लक्ष्य - 5195
निकेल एमसीएक्स (मार्च वायदा) : बेचें - 922, स्टॉपलॉस - 930 और लक्ष्य - 909
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नेचुरल गैस मे आज करीब 1 फीसदी की गिरावट आई है। इस हफ्ते लगातार दूसरे दिन नेचुरल गैस में गिरावट पर कारोबार हो रहा है। फिलहाल एमसीएक्स पर नेचुरल गैस 213.50 रुपये के नीचे कारोबार कर रहा है।
सोने में आज भी गिरावट पर कारोबार हो रहा है। एमसीएक्स पर सोने का भाव 29,500 रुपये के नीचे है। वहीं कॉमैक्स पर सोना 1,600 डॉलर के पास कारोबार कर रहा है। इस दौरान चांदी में भी गिरावट आई है और एमसीएक्स में चांदी का भाव 54,000 रुपये के भी नीचे आ गया है।
बेस मेटल्स में आज भी गिरावट पर कारोबार हो रहा है। साइप्रस संकट भले कम होता दिख रहा है, लेकिन दूसरी ओर से कॉपर का स्टॉक तेजी से बढ़ रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज के गोदामों मे कॉपर का स्टॉक पिछले 10 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। एमसीएक्स पर बेस मेटल्स में 0.1-0.5 फीसदी की गिरावट आई है।
कॉपर 0.3 फीसदी लुढ़ककर 416 रुपये के नीचे कारोबार कर रहा है। एल्यूमिनियम में 0.3 फीसदी, निकेल में 0.5 फीसदी, लेड और जिंक में 0.1 फीसदी की कमजोरी आई है।
सोना एमसीएक्स (अप्रैल वायदा) : बेचें - 29540, स्टॉपलॉस - 29640 और लक्ष्य - 29340
चांदी एमसीएक्स (मई वायदा) : बेचें - 54100, स्टॉपलॉस - 54400 और लक्ष्य - 53500
कॉपर एमसीएक्स (अप्रैल वायदा) : बेचें - 417, स्टॉपलॉस - 419 और लक्ष्य - 412
कच्चा तेल एमसीएक्स (अप्रैल वायदा) : खरीदें - 5147, स्टॉपलॉस - 5125 और लक्ष्य - 5195
निकेल एमसीएक्स (मार्च वायदा) : बेचें - 922, स्टॉपलॉस - 930 और लक्ष्य - 909
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कालीमिर्च ने बढ़ाई एनसीडीईएक्स की मुश्किलें:
काली मिर्च के मामले पर एनसीडीईएक्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एग्री कमोडिटी में वायदा कारोबार कराने वाले देश के सबसे बड़े कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स को कारोबारियों ने कोर्ट में खींच लिया है। मामला काली मिर्च से जुड़ा है। काली मिर्च व्यापारी संघ ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर बेंच में एनसीडीईएक्स के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इस मामले में एनसीडीईएक्स के अलावा एनएसडीएल, सीडीएसएल और कंज्युमर अफेयर्स सेक्रेटरी को भी पक्ष बनाया गया है।
करीब 5 महीने पहले कुछ कारोबारियों ने एनसीडीईएक्स के वेयरहाउसों से खराब क्वालिटी के काली मिर्च की डिलिवरी की शिकायत की थी। एनसीडीईएक्स ने जांच का हवाला देते हुए कोच्चि और एर्नाकुलम के करीब 6 गोदामों को सील कर दियाथा। करीब 7,000 टन के इस काली मिर्च की मौजूदा बाजार कीमत करीब 300 करोड़ रुपये है।
सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक एनसीडीईएक्स की ओर से कोई ठोस कदम न उठाने की वजह से कारोबारी इस मामले को लेकर कोर्ट की शरण में जाने को मजबूर हो गए हैं।
इस पूरे मामले पर एनसीडीईएक्स का भी पक्ष जानने की कोशिश की गई। एनसीडीईएक्स ने कहा है कि कोर्ट की ओर से इसपर अभी उसे आधिकारिक तौर पर नोटिस नहीं मिली है, इस वजह से मामले पर वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देगा।
इससे पहले काली मिर्च का विवाद गहराने के बाद से एफएमसी ने इसके जून वायदा की लॉन्चिंग पर रोक लगा दिया था। फिलहाल एनसीडीईएक्स पर सिर्फ अप्रैल और मई वायदा में ही कारोबार हो रहा है। इस कमोडिटी से जुड़ी तमाम तरह की बुरी खबरों की वजह से काली मिर्च के वायदा में वॉल्यूम भी बेहद कम हो गया है।
काली मिर्च एनसीडीईएक्स (अप्रैल वायदा) : बेचें - 35800, स्टॉपलॉस - 36200 और लक्ष्य - 35000
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करीब 5 महीने पहले कुछ कारोबारियों ने एनसीडीईएक्स के वेयरहाउसों से खराब क्वालिटी के काली मिर्च की डिलिवरी की शिकायत की थी। एनसीडीईएक्स ने जांच का हवाला देते हुए कोच्चि और एर्नाकुलम के करीब 6 गोदामों को सील कर दियाथा। करीब 7,000 टन के इस काली मिर्च की मौजूदा बाजार कीमत करीब 300 करोड़ रुपये है।
सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक एनसीडीईएक्स की ओर से कोई ठोस कदम न उठाने की वजह से कारोबारी इस मामले को लेकर कोर्ट की शरण में जाने को मजबूर हो गए हैं।
इस पूरे मामले पर एनसीडीईएक्स का भी पक्ष जानने की कोशिश की गई। एनसीडीईएक्स ने कहा है कि कोर्ट की ओर से इसपर अभी उसे आधिकारिक तौर पर नोटिस नहीं मिली है, इस वजह से मामले पर वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देगा।
इससे पहले काली मिर्च का विवाद गहराने के बाद से एफएमसी ने इसके जून वायदा की लॉन्चिंग पर रोक लगा दिया था। फिलहाल एनसीडीईएक्स पर सिर्फ अप्रैल और मई वायदा में ही कारोबार हो रहा है। इस कमोडिटी से जुड़ी तमाम तरह की बुरी खबरों की वजह से काली मिर्च के वायदा में वॉल्यूम भी बेहद कम हो गया है।
काली मिर्च एनसीडीईएक्स (अप्रैल वायदा) : बेचें - 35800, स्टॉपलॉस - 36200 और लक्ष्य - 35000
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मूडीज ने 3 पीएसयू बैंकों की रेटिंग घटाई:
रेटिंग एजेंसी मूडीज ने सोमवार को 3 पीएसयू बैंकों की स्टैंडअलोन बैंक फाइनेंशियल स्ट्रेन्थ (बीएफएसआर) रेटिंग को घटा दिया है।
मूडीज ने इंडियन ओवरसीज बैंक, सिंडिकेट बैंक और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की रेटिंग घटाई है। मूडीज ने इस डाउनग्रेडिंग के लिए बैंक की कमजोर एसेट क्लाविटी, मुनाफे पर दबाव और पूंजी जुटाने में आ रही दिक्कतों का हवाला दिया है।
मूडीज ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ रेटिंग डी+ से घटाकर डी कर दी है। मूडीज का मानना है कि ओबीसी पूंजी के लिए सरकार पर निर्भर है और बैंक खुद पूंजी जुटाने में सक्षम नहीं है। ओबीसी की रेटिंग आउटलुक निगेटिव, जबकि बैंक की डिपॉजिट रेटिंग स्टेबल की गई है। इंफ्रा, आयरन एंड स्टील और टेक्सटाइल में बड़ा एक्सपोजर ओबीसी के लिए निगेटिव साबित हो सकता है।
मूडीज ने इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ रेटिंग डी से घटाकर डी- कर दी है। आईओबी की रेटिंग आउटलुक स्टेबल से घटाकर निगेटिव कर दी है। मूडीज ने खराब एसेट क्वालिटी और कमजोर मुनाफे के चलते आईओबी की रेटिंग घटाई है। मूडीज का मानना है कि आईओबी के कोर कैपिटल में कमी आई है और बैंक आंतरिक संसाधनों से पूंजी जुटाने को लेकर कोई खास उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
मूडीज ने सिंडिकेट बैंक की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ रेटिंग डी+ से घटाकर डी कर दी है। 31 दिसंबर तक सिंडिकेट बैंक ग्रॉस एनपीए और रीस्ट्रक्चर्ड लोन बढ़कर 9.5 फीसदी हो गए हैं। लिहाजा साल 2013 में सिंडिकेट बैंक की एसेट क्वालिटी में और दबाव की आशंका बनी हुई है।
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मूडीज ने इंडियन ओवरसीज बैंक, सिंडिकेट बैंक और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की रेटिंग घटाई है। मूडीज ने इस डाउनग्रेडिंग के लिए बैंक की कमजोर एसेट क्लाविटी, मुनाफे पर दबाव और पूंजी जुटाने में आ रही दिक्कतों का हवाला दिया है।
मूडीज ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ रेटिंग डी+ से घटाकर डी कर दी है। मूडीज का मानना है कि ओबीसी पूंजी के लिए सरकार पर निर्भर है और बैंक खुद पूंजी जुटाने में सक्षम नहीं है। ओबीसी की रेटिंग आउटलुक निगेटिव, जबकि बैंक की डिपॉजिट रेटिंग स्टेबल की गई है। इंफ्रा, आयरन एंड स्टील और टेक्सटाइल में बड़ा एक्सपोजर ओबीसी के लिए निगेटिव साबित हो सकता है।
मूडीज ने इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ रेटिंग डी से घटाकर डी- कर दी है। आईओबी की रेटिंग आउटलुक स्टेबल से घटाकर निगेटिव कर दी है। मूडीज ने खराब एसेट क्वालिटी और कमजोर मुनाफे के चलते आईओबी की रेटिंग घटाई है। मूडीज का मानना है कि आईओबी के कोर कैपिटल में कमी आई है और बैंक आंतरिक संसाधनों से पूंजी जुटाने को लेकर कोई खास उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
मूडीज ने सिंडिकेट बैंक की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ रेटिंग डी+ से घटाकर डी कर दी है। 31 दिसंबर तक सिंडिकेट बैंक ग्रॉस एनपीए और रीस्ट्रक्चर्ड लोन बढ़कर 9.5 फीसदी हो गए हैं। लिहाजा साल 2013 में सिंडिकेट बैंक की एसेट क्वालिटी में और दबाव की आशंका बनी हुई है।
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महिंद्रा सत्यम-टेक महिंद्रा का विलय टला:
महिंद्रा सत्यम का टेक महिंद्रा के साथ विलय 6 महीने के लिए टल गया है। हालांकि टेक महिंद्रा के सीएफओ संजॉय आनंद का कहना है कि महिंद्रा सत्यम-टेक महिंद्रा विलय टला नहीं हैं बल्कि इसकी समयसीमा बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी गई है, इस अवधि के दौरान कभी भी विलय हो सकता है।
संजॉय आनंद के मुताबिक आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की मंजूरी में देरी के कारण महिंद्रा सत्यम के साथ विलय की समयसीमा बढ़ी है। इस विलय पर आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में 1 अप्रैल को सुनवाई होनी है। अगर आंध्र प्रदेश की हाई कोर्ट जल्दी ही इस पर मंजूरी दे देती है तो विलय जल्दी ही हो सकता है और इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा।
आंध्र प्रदेश की हाई कोर्ट ने महिंद्रा सत्यम के खातों की जांच एक स्वायत्त संस्था को सौंपी थी जिसकी रिपोर्ट पेश हो चुकी है। जल्द ही इस रिपोर्ट के आधार पर महिंद्रा सत्यम को विलय की मंजूरी मिल सकती है।
संजॉय आनंद के मुताबिक टेक महिंद्रा का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और विदेश में भी कारोबार फैल रहा है। महिंद्रा सत्यम का साथ मिलने के बाद कंपनी की उन देशों में पहुंच बढ़ेगी जहां अभी कंपनी की ज्यादा पकड़ नहीं है। दोनों कंपनियों के कुल मिलाकर 80,000 कर्मचारी हैं।
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संजॉय आनंद के मुताबिक आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की मंजूरी में देरी के कारण महिंद्रा सत्यम के साथ विलय की समयसीमा बढ़ी है। इस विलय पर आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में 1 अप्रैल को सुनवाई होनी है। अगर आंध्र प्रदेश की हाई कोर्ट जल्दी ही इस पर मंजूरी दे देती है तो विलय जल्दी ही हो सकता है और इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा।
आंध्र प्रदेश की हाई कोर्ट ने महिंद्रा सत्यम के खातों की जांच एक स्वायत्त संस्था को सौंपी थी जिसकी रिपोर्ट पेश हो चुकी है। जल्द ही इस रिपोर्ट के आधार पर महिंद्रा सत्यम को विलय की मंजूरी मिल सकती है।
संजॉय आनंद के मुताबिक टेक महिंद्रा का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और विदेश में भी कारोबार फैल रहा है। महिंद्रा सत्यम का साथ मिलने के बाद कंपनी की उन देशों में पहुंच बढ़ेगी जहां अभी कंपनी की ज्यादा पकड़ नहीं है। दोनों कंपनियों के कुल मिलाकर 80,000 कर्मचारी हैं।
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