Tuesday, February 19, 2013

बाजार में बढ़ता पंप एंड डंप, निवेशक सावधान

सेबी ने शेयरों में बढ़ते पंप एंड डंप पर रवैया सख्त कर लिया है। सेबी को डेटा वेयरहाउसिंग एंड बिजनेस सिस्टम के जरिए बाजार में पंप एंड डंप की संख्या में भारी बढ़त का पता चला है।

पिछले दिनों से चुनिंदा मिडकैप इंफ्रा शेयरों में बेवजह तेजी के बाद भारी गिरावट आई है। प्रोमोटर्स और कुछ ब्रोकर्स की मिली-भगत से छोटे शेयरों में बेवजह तेजी आई थी।

पंप एंड डंप के तहत ऑपरेटर ज्यादातर छोटे शेयरों में वॉल्यूम बढ़ाकर कीमतें बढ़ाते हैं और बाद में ऊंचे दाम पर शेयर बेच देते हैं। सेबी की इनसाइडर ट्रेडिंग और फ्रंट रनिंग के मामलों पर भी नजर है।

लेकिन, निवेशक कैसे पता लगा सकते हैं कि शेयरों में तेजी पंप एंड डंप की वजह से तो नहीं आ रही है। फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पांड्या का कहना है कि ऐसे शेयरों में वॉल्यूम अचानक काफी बढ़ जाता है, जिससे कीमतें भी बढ़ती हैं।

अर्णव पांड्या के मुताबिक जिन कंपनियों के शेयरों में गड़बड़ी की जा रही होती है, उन कंपनियों के बारे बाजार में सकारात्मक खबरें फैलाने लगती हैं। जैसे कंपनी की वित्तीय हालत सुधर रही है या दिक्कतें कम हो रही हैं।

जब शेयरों के दाम बेहद बढ़ जाते हैं, तो ऑपरेटर ऊंची कीमतों में शेयर बेच देते हैं। पंप एंड डंप सबसे ज्यादा स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में नजर आता है। आईपीओ में भी मिली-भगत होने की संभावना होती है।

स्टेकहोल्डर्स एंपावरमेंट सर्विसेज के फाउंडर एंड एमडी, जे एन गुप्ता का कहना है कि निवेशक बातों में आ जाते हैं और मोटे मुनाफे के लालच में फंस जाते हैं।

जे एन गुप्ता के मुताबिक पंप एंड डंप में प्रमोटर, ब्रोकर, कुछ निवेशक शामिल होते हैं। निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और बाजार की अफवाहों पर विश्वास न करें।

अर्णव पांड्या के मुताबिक कंपनी फंडामेंटल खराब होने के बावजूद शेयर उछले रहे हों, ये खतरे का संकेत है। निवेशक पैसा लगाने के पहले कंपनी के फंडामेंटल देखें ना कि खबरों पर फैसला लें।

निवेशकों को शेयरों का लॉन्ग टर्म ट्रेंड देखना चाहिए और रिसर्च करना चाहिए। कम वक्त में मोटा मुनाफा कमाने के लालच में न फंस कर अच्छी कंपनी में निवेश करें।

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