Wednesday, March 6, 2013

तस्करी की आशंका से इलायची का भाव लुढ़का:

अवैध आयात की आशंका से इलायची में तेज गिरावट आई है। वायदा और हाजिर बाजार में इलायची का भाव काफी गिर चुका है। एमसीएक्स पर इलायची 2.25 फीसदी गिरकर 871.50 रुपये पर आ गई है।

कारोबारियों का मानना है कि नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के रास्ते देश में गैरकानूनी तरीके से इलायची का आयात हो रहा है। हालांकि भारतीय मसाला बोर्ड ने इलायची में किसी भी तरह की तस्करी से इनकार किया। लेकिन एहतियात के तौर पर कस्टम डिपार्टमेंट को अलर्ट जारी कर दिया गया है।

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2-3 महीने में नई ऊंचाई पर बाजार: फिनापोर्ट:

हाल ही में अमेरिकी बाजारों ने अच्छी तेजी दिखाई है। डाओ जोंस अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंचा है। एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे हैं। इस तेजी का असर भारतीय बाजारों पर भी नजर आ रहा है।

फिनापोर्ट के चीफ इंवेस्टमेंट ऑफिसर, हैंस गोइटी का कहना है कि अमेरिकी बाजारों में और उछाल आने की उम्मीद है। भारतीय बाजार भी 2-3 महीनों में नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं।

हैंस गोइटी के मुताबिक आरबीआई द्वारा दरों में कटौती किए जाने के बाद भारतीय बाजारों में उछाल आएगा। 19 मार्च को आरबीआई की क्रेडिट पॉलिसी बैठक होने वाली है।

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शुगर डीकंट्रोल की राह में आया अडंगाः सूत्र:

प्रधानमंत्री चीनी को डीकंट्रोल करने में तेजी चाहते हैं। हालांकि सीएनबीसी आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक चीनी डीकंट्रोल पर असमंजस बरकरार है। इसके रास्ते में कई अड़ंगे आ सकते हैं। गुरुवार को सीसीईए के एजेंडे में चीनी डीकंट्रोल का प्रस्ताव शामिल नहीं किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि चीनी डीकंट्रोल का अंतिम प्रस्ताव फूड मिनिस्ट्री से कैबिनेट सेक्रेट्रिएट नहीं भेजा गया है। दरअसल वित्त मंत्रालय ने शुगर डीकंट्रोल के कुछ प्रस्तावों पर सफाई मांगी है। वित्त मंत्रालय ने चीनी पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के प्रस्ताव पर सफाई मांगी है।

सूत्रों के मुताबिक फूड मिनिस्ट्री ने डीकंट्रोल से बढ़ने वाली सब्सिडी को एक्साइज से बढ़ाने का सुझाव दिया है। वहीं वित्त मंत्रालय ने गन्ने का स्टेट एडवाइजरी प्राइस राज्यों पर छोड़ने पर चिंता जताई है। वित्त मंत्रालय को स्टेट एडवाइजरी प्राइस से चीनी के दाम बढ़ने का डर है। 14 मार्च को होने वाली सीसीईए की बैठक में इन सभी मुद्दों पर विचार हो सकता है।

हालांकि इंडियन शुगर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल अविनाश वर्मा का कहना है कि शुगर डीकंट्रोल को लेकर कोई अड़चन नजर नहीं आ रही है। मार्च महीने के अंत तक चीनी डीकंट्रोल पर फैसला आने की उम्मीद है। सरकार के फैसले से इंडस्ट्री को 3,000 करोड़ रुपये का फायदा होगा। लेवी कोटा के चलते शुगर इंडस्ट्री को 3,000 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ता है।

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मार्च में दिखेगा बाजार में जोरदार उछाल:

बजट से पहले बाजार में डर हावी हो गया था। हालांकि बजट के बाद बाजार की चाल मजबूत होने के आसार दिख रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय संकेतों से भी घरेलू बाजार में उछाल देखने को मिल रही है। लिहाजा अब दिग्गज जानकार मान रहे हैं कि मार्च महीना बाजार के लिए बेहतर साबित होगा।

प्रभुदास लीलाधर की ज्वाइंट एमडी अमीषा वोरा का कहना है कि अभी भले कुछ दिनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव रहेगा। लेकिन बाजार में इस बार नकदी की दिक्कत नहीं रहेगी। लिहाजा पिछले सालों के मुकाबले इस बार मार्च में बाजार की चाल बेहतर रहने की उम्मीद है। मौजूदा स्तरों पर बाजार में निवेश करने की सलाह है। अगर प्रमुख ब्याज दरों में कटौती हुई तो बाजार के लिए हालात और अच्छे होंगे।

अमीषा वोरा का मानना है कि अभी बाजार में रिटेल निवेशकों के आने में वक्त लग सकता है। बाजार की चाल पर कहें तो मध्यम अवधि के लिए ये खरीदारी का सही मौका है। अभी शेयरों में बिकवाली की बजाए तेजी का इंतजार करें। ऑटो शेयर ज्यादा भरोसेमंद नजर आ रहे हैं। साथ ही सरकारी और प्राइवेट बैंक के शेयरों में भी खरीदारी की जा सकती है। इस समय ऑटो और फाइनेंशियल शेयरों में ज्यादा एक्शन रहने वाला है।

ऑयल एंड गैस सेक्टर पर अमीषा वोरा का कहना है कि इस सेक्टर पर सब्सिडी का बोझ कम होने की उम्मीद है। ऐसे में ऑयल एंड गैस कंपनियों के आगे के दिन अच्छे रहने वाले हैं। ऑयल एंड गैस सेक्टर में केर्न इंडिया में निवेश करने की सलाह है। लेकिन पूरे सेक्टर की निवेश के लिहाज से बात करें अभी जोखिम बना रह सकता है। वहीं इंफ्रा और पावर शेयर की वैल्यूएशन काफी सस्ती नजर आ रही है। फिर भी इंफ्रा और पावर सेक्टर में अभी दबाव बना रहेगा। आईटी और एफएमसीजी में निवेश कम करने की सलाह है। एविएशन कंपनियों में भी सावधानी के साथ निवेश करने की सलाह है।

अमीषा वोरा के मुताबिक मारुति सुजुकी, आईसीआईसीआई बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में निवेश किया जा सकता है। साथ ही मौजूदा स्तर पर यूनाइटेड फॉस्फोरस पर दांव लगाया जा सकता है।

एएसके इंवेस्टमेंट मैनेजर्स के सीआईओ प्रतीक अग्रवाल का कहना है कि 19 मार्च को आने वाली क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई ब्याज दरों में कटौती कर सकता हैय़ हालांकि पिछली बार आरबीआई के दरों में कमी करने के बावजूद ज्यादा बैंकों ने ब्याज दरें नहीं घटाई लेकिन इस बार प्रमुख दरों में गिरावट होने के बाद बैंक अपनी ब्याज दरों में कटौती कर सकते हैं।

इस बार आरबीआई के दरें घटाने के बाद बैंक, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटो सेक्टर को फायदा मिल सकता है लेकिन इससे बाजार को कितना फायदा मिल पाएगा ये देखना जरूरी है।

प्रतीक अग्रवाल के मुताबिक इंफ्रा, रियल एस्टेट में ब्य़ाज दरों से ज्यादा कॉर्पोरेट गवर्नेंस का मुद्दा अहम है। जिन कंपनियों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस अच्छी है निवेशकों को उन्हीं शेयरों में निवेश करना चाहिए।

ब्याज दरें घटने के बाद भी ऑटो सेक्टर में गाड़ियों की बिक्री ज्यादा बढ़ने का अनुमान नहीं है। फरवरी में ऑटो बिक्री आंकड़ों में गिरावट आई है। अगले 1 साल तक ऑटो सेक्टर में मंदी के संकेत बने रहेंगे क्योंकि अर्थव्यवस्था 5 फीसदी से कम की ग्रोथ दिखा रही है। हालांकि अगर इस साल मानसून अच्छा रहता है तो जीडीपी में 1 फीसदी की बढ़त का अनुमान है।

देश में निर्यात आधारित कंपनियों को मुनाफा मिलने का अनुमान है क्योंकि रुपये की गिरावट बढ़ रही है। इसके अलावा उभरते देशों के बाजार सुधरने का भी भारतीय बाजारों को फायदा मिलेगा।

यूबीएस इंडिया के गौतम छाओछड़िया का कहना है कि बजट में वित्तीय मजबूती को लेकर वित्त मंत्री ने भरोसा दिया है। बजट के आसपास बाजार में आई गिरावट से अच्छे शेयरों में खरीदारी का मौका बना है। चौथी तिमाही के नतीजों से ही बाजार की आगे की चाल पर कुछ कहा जा सकता है। इस साल भारतीय बाजारों से 10 फीसदी तक के रिटर्न मिलने की उम्मीद है। फिलहाल आईटी सेक्टर में इंफोसिस में दांव लगाने का मौका दिखाई दे रहा है।

वहीं एंबिट कैपिटल के सीईओ एंड्र्यू हॉलैंड का कहना है कि बजट में ग्रोथ और करेंट अकाउंट घाटे को लेकर कोई सफाई नहीं आई है। साथ ही बाजार पर अमेरिका के कर्ज और इटली की राजनीतिक अस्थिरता का असर देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों का प्रदर्शन सबसे निराशाजनक रहने की उम्मीद है। भारतीय बाजारों के मुकाबले चीन के बाजार ज्यादा आकर्षक रहेंगे।

एंड्र्यू हॉलैंड के मुताबिक बैंक, रियल एस्टेट और चुनिंदा कैपिटल गुड्स कंपनियों के शेयरों में दांव लगाया जा सकता है। बाजार में तेजी के लिए सरकार की तरफ से पॉलिसी के मोर्चे पर और कदम उठाए जाने की जरूरत है।

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एयर एशिया-टाटा के जेवी को मंजूरी मिली:


एफआईपीबी ने मलेशिया की एयरलाइंस एयर एशिया और टाटा संस के ज्वाइंट वेंचर में 49 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दी है। एयर एशिया-टाटा जेवी लाइसेंस मिलने के बाद ऑपरेशंस शुरू करेगी।

ज्वाइंट वेंचर में टाटा संस के अलावा अरुण भाटिया भी हिस्सेदार होंगे। जेवी में टाटा संस का 30 फीसदी और अरुण भाटिया का 21 फीसदी हिस्सा होगा। माना जा रहा है कि जेवी में 80 करोड़ रुपये का शुरुआती निवेश किया जाएगा।

एयर एशिया के मुताबिक भारत में लो कॉस्ट एयरलाइन के तौर पर जेवी बनाया जाएगा, जिसका फोकस टीयर-2 और टीयर 3 इलाकों पर होगा। नई कंपनी का नाम एयरएशिया होगा और इसका ऑपरेशन चेन्नई से किया जाएगा।

एयर एशिया रोजाना 25 देशों में 400 उड़ानें भरती हैं। 2010 तक कंपनी के पास 92 विमान थे। कंपनी ने 200 नए एयरबस विमान ऑर्डर किया हुआ है। एयर एशिया दुनिया की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन बनने की राह पर है।

जेट एयरवेज-एतिहाद डील और एयर एशिया के भारत में आने से एविएशन सेक्टर पर फोकस बढ़ गया है।

एविएशन सेक्टर के जानकार और स्पाइसजेट के फाउंडर अजय सिंह का कहना है कि विदेशी एयरलाइंस के भारत में आने से घरेलू एयरलाइंस के लिए मुकाबला तो बढ़ेगा लेकिन एविएशन इंडस्ट्री में सुधार भी होगा।

अजय सिंह के मुताबिक जेट एयरवेज और एतिहाद की डील जल्द होने की उम्मीद है और इसके बाद जेट एयरवेज के शेयर में अच्छा उछाल देखा जा सकता है।

अजय सिंह के मुताबिक किंगफिशर एयरलाइंस के दोबारा उड़ान भरने के लिए काफी मुश्किलें सामने हैं। विजय माल्या को कंपनी में जल्द ही बड़ी पूंजी डालनी होगी वर्ना कंपनी के लिए दोबारा खड़ा होना काफी चुनौती भरा होगा। कंपनी की हालत खराब होना पूरी एविएशन इंडस्ट्री के लिए अच्छा नहीं है।

अजय सिंह के मुताबिक भारत में विमान उड़ाने का खर्चा काफी ज्यादा है। एयर ट्रैफिक फ्यूल के महंगे होने के चलते विश्व के अन्य देशों के मुकाबले भारत में विमान उडा़ना करीब 50 फीसदी महंगा है।

विमानन मंत्री अजित सिंह का कहना है कि टाटा और एयर एशिया के जेवी में एफडीआई नियमों को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। इसमें छोटी मोटी प्रक्रिया संबंधी दिक्कत हो सकती है लेकिन इस जेवी के पूरा होने में कोई समस्या नहीं आनी चाहिए।

आईएमसी कमेटी ऑन एविएशन और एयरपोर्ट्स के चैयरमैन जितेंद्र भार्गव का कहना है कि एफआईपीबी का आज का कदम एविएशन इंडस्ट्री और ग्राहकों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। भारतीय एविएशन इंडस्ट्री को सस्ते किरायों वाली एयरलाइन कंपनी की बहुत जरूरत है।

एयर एशिया के आने से किरायों में कमी हुई तो ग्राहकों के लिए बहुत अच्छी खबर होगी। एविएशन इंडस्ट्री में पिछले 1 साल से मोनोपली का माहौल बना हुआ था जिससे सफर करने वाले यात्रियों का संख्या में कमी आई है।

एयर एशिया-टाटा ग्रुप ज्वाइंट वेंचर में प्रोमोटर अरुण भाटिया का कहना है कि रेगुलेटरों की मंजूरी के बाद एयरलाइंस शुरू होने में 6 महीने लगेंगे। आम आदमी को कम से कम दाम पर सर्विस देने की कोशिश की जाएगी। एयरलाइंस ज्वाइंट वेंचर में रतन टाटा के चेयरमैन बनने की उम्मीद है।

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आशीष कुकरेजा के जैकपॉट शेयर:

बाजार के उतार-चढ़ाव भरे माहौल में किन शेयरों में दांव लगाकर कमा सकते हैं मोटा मुनाफा जानते हैं, क्राफ्ट वेल्थ मैनेजमेंट के आशीष कुकरेजा के जैकपॉट शेयर -

जेएसडब्ल्यू एनर्जी
मौजूदा गिरावट में जेएसडब्ल्यू एनर्जी, टाटा पावर, इंडियाबुल्स पावर और अदानी पावर जैसी पावर कंपनिया काफी अच्छी लग रही है। लेकिन इन सभी कंपनियों में जेएसडब्ल्यू एनर्जी ऑपरेशनली बेहतर कंपनी लगती है। कोल पूलिंग के बाद जो पावर कंपनियां सॉफ्ट कोल इंपोर्ट करती है उनको इससे काफी फायदा होगा। पावर सेक्टर में काफी आउटपर्फॉर्मेंस देखने को मिलेगा।

जेएसडब्ल्यू एनर्जी में नकारात्मक रुख खत्म हो चुका है और अब  सकारात्मक न्यूजफ्लो देखने को मिलेगा। बजट में इस बार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खासा ध्यान दिया है और इसका सीधा असर कंपनी के वित्तीय लागत पर देखने को मिलेगा। अगले 3-6 महीने में शेयर 75 रुपये तक जा सकता है।    

एसकेएस माइक्रोफाइनेंस 
एसकेएस माइक्रोफाइनेंस में मध्यम से लंबी अवधि के लिए निवेश किया जा सकता है। अगले 3-6 महीने में शेयर 160 रुपये तक जा सकता है। पूरे सेक्टर में एक ही लिस्टेट एंटीटी है जिसका प्रीमियम कंपनी को मिलता हुआ दिखेगा। एमएफआई बिल पास होगा जिसकी वजह से रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनकर आएगा और उससे काफी सारे छोटे प्लेयर्स बिजनेस में नहीं रहेंगे जिसका फायदा कंपनी को मिलेगा। इसके अलावा क्रेडिट लिमिट बढ़ने पर एसकेएस माइक्रोफाइनेंस का शेयर बैंक बनते हुआ दिखेगा। जिस तरह से शेयर परफॉर्म कर रहा है उसे देखते हुए हफ्ते भर में अच्छा उछाल आ सकता है। 

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बैंक कारोबार के लिए साझेदारी करेगी आर-कैप:

सूत्रों से एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि बैंकिंग कारोबार में उतरने के लिए रिलायंस कैपिटल साझेदार ढूंढ सकती है।

सूत्रों के मुताबिक रिलायंस कैपिटल घरेलू या विदेशी निवेशकों के साथ हाथ मिला सकती है। कंपनी ने निवेशकों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।

माना जा रहा है कि रिलायंस कैपिटल द रिलायंस बैंक के नाम के तहत बैंकिंग लाइसेंस के लिए अर्जी दे सकती है। कंपनी अप्रैल तक आरबीआई के पास अर्जी जमा करने वाली है।

रिलायंस कैपिटल एनओएफएचसी की रूपरेखा तैयार कर रही है। इसके लिए कंपनी की आरबीआई के साथ चर्चा चल रही है। हालांकि, रिलायंस कैपिटल ने कहा है कि कंपनी की ऐसी कोई योजना नहीं है।

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शुक्रवार को खुलेगा आरसीएफ का ओएफएस:

सरकार आरसीएफ में 12.5 फीसदी हिस्से का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए विनिवेश शुक्रवार को करेगी। इसका ऐलान खुद विनिवेश सचिव रवि माथुर ने ईजीओएम की बैठक के बाद किया।

रवि माथुर के मुताबिक ईजीओएम ने ओएफएस के फ्लोर प्राइस को मंजूरी दी है। इसका ऐलान आज शाम को होगा। सरकार आरसीएफ में 12.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 300 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है।

लेकिन आरसीएफ के इश्यू के बावजूद सरकार इस साल के विनिवेश के लक्ष्य से काफी पीछे है। वित्त वर्ष 2013 में सरकार ने विनिवेश से अबतक 21,500 करोड़ रुपये जुटाए हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में और 4 कंपनियों के विनिवेश से 5,500 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। लिहाजा वित्त वर्ष 2013 में सरकार को विनिवेश लक्ष्य से 3,000 करोड़ रुपये कम मिलने के आसार हैं।

आरसीएफ के विनिवेश के बाद सरकार की 11 मार्च को नाल्को में हिस्सेदारी बेचने के लिए बैठक होने वाली है। माना जा रहा है कि अगले हफ्ते नाल्को का ऑफर फॉर सेल खुल सकता है। नाल्को के विनिवेश से 1,400 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है।

12 मार्च को एमएमटीसी का फ्लोर प्राइस तय करने के लिए ईजीओएम में फैसला होगा। एमएमटीसी का ओएफएस 14 मार्च को खुलेगा और इसके विनिवेश से 300 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। 19 मार्च को सेल के विनिवेश पर ईजीओएम पर फैसला किया जाएगा। मार्च महीने के अंत तक सेल का विनिवेश संभव है।

वहीं वित्त वर्ष 2014 में सरकार का विनिवेश से 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। वित्त वर्ष 2014 में कोल इंडिया के विनिवेश से 21,500 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। इंडियन ऑयल के विनिवेश से 7,500 करोड़ रुपये और एनएचपीसी के विनिवेश से 14,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। साथ ही अगले वित्त वर्ष में हिंदुस्तान जिंक और बाल्को में सरकार अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है।

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सेंसेक्स 109 अंक चढ़ा, 5819 पर बंद निफ्टी:

मजबूत अंतर्राष्ट्रीय संकेतों के दम पर लगातार दूसरे दिन बाजार में जोश दिखा। सेंसेक्स 109 अंक चढ़कर 19253 और निफ्टी 34 अंक चढ़कर 5819 पर बंद हुए।

छोटे और मझौले शेयरों में ज्यादा खरीदारी नजर आई। निफ्टी मिडकैप करीब 1.25 फीसदी चढ़ा। बीएसई स्मॉलकैप में 1.5 फीसदी की मजबूती आई।

रियल्टी शेयर 4.5 फीसदी उछले। कैपिटल गुड्स और मेटल शेयरों में करीब 2.5 फीसदी की तेजी आई। आईटी, तकनीकी और ऑयल एंड गैस शेयर 1.5-1 फीसदी चढ़े।

पीएसयू, बैंक, पावर, ऑटो और हेल्थकेयर शेयरों में 0.7-0.2 फीसदी की मजबूती आई। एफएमसीजी शेयर 1 फीसदी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयर 0.4 फीसदी टूटे।

बाजार की चाल

अच्छे अंतर्राष्ट्रीय संकेतों की वजह से बाजार 0.5 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ खुले। निफ्टी ने 5800 के ऊपर शुरुआत की। सेंसेक्स ने फिर से सेंचुरी लगाई।

हालांकि, दमदार शुरुआत करने के बाद बाजारों ने मजबूती गंवाई। लेकिन, सुबह 10 बजे के बाद बाजार में फिर से जोश लौटा। छोटे और मझौले शेयरों में ज्यादा तेजी दिखी।

एशियाई बाजारों में बढ़ती मजबूती से घरेलू बाजार भी ऊपर की ओर बढ़ते चले गए। सेंसेक्स 150 अंक चढ़ा और निफ्टी 5825 के स्तर पर पहुंचा।

दोपहर के कारोबार में बाजार में ऊपरी स्तरों पर दबाव नजर आया। यूरोपीय बाजारों के हल्की बढ़त पर खुलने का घरेलू बाजारों पर खास असर नहीं दिखा।

रुपये के मजबूती गंवाने की वजह से दोपहर 2 बजे के बाद बाजार फिसलते हुए नजर आए। हालांकि, कारोबार के आखिरी घंटे में बाजार संभले और 0.6 फीसदी की बढ़त पर बंद हुए।

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कमोडिटी बाजारः बेस मेटल्स में क्या करें:

घरेलू बाजार में बेस मेटल्स में गिरावट आई है। एमसीएक्स पर कॉपर समेत सारे मेटल्स 0.5 फीसदी से ज्यादा टूटकर कारोबार कर रहे हैं। दरअसल डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती आई है और इसी का असर आज घरेलू कारोबार पर पड़ रहा है। वहीं लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर में 0.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

फिलहाल एमसीएक्स पर कॉपर 0.6 फीसदी की गिरावट के साथ 428 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। एल्यूमिनियम करीब 1 फीसदी लुढ़ककर 106.50 रुपये पर आ गया है। निकेल 0.5 फीसदी की कमजोरी के साथ 910 रुपये के करीब आ गया है। लेड में 1 फीसदी और जिंक में 1.3 फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है।

एमसीएक्स पर सोना करीब 0.1 फीसदी गिरकर 29,550 रुपये के नीचे आ गया है। हालांकि एमसीएक्स पर चांदी की चाल भी सुस्त हो गई है और ये 0.1 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 54,760 रुपये पर कारोबार कर रही है। एमसीएक्स पर कच्चा तेल भी 0.1 फीसदी चढ़कर 4,980 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है।

लाल मिर्च में आज जोरदार तेजी आई है। एनसीडीईएक्स पर लाल मिर्च का मार्च वायदा और अप्रैल वायदा करीब 4 फीसदी तक उछल चुके हैं। दरअसल मंडियों में लाल मिर्च की मांग बढ़ गई है। आज आंध्रप्रदेश की गुंटूर मंडी में लाल मिर्च करीब 200 रुपये ऊपर बिक रही है और वायदा के मुकाबले हाजिर बाजारों में लाल मिर्च का भाव ऊपर चल रहा है। वहीं एनसीडीईएक्स पर हल्दी के अप्रैल, मई, जून और जुलाई वायदा में 4 फीसदी का ऊपरी सर्किट लगा है।

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