पिछले कई दिनों से बाजार में असमंजस भरी स्थिति बनी हुई है। कभी विदेशी संकेतों के असर से बाजार टूटा है, तो कभी बजट ऐलानों के अनुमानों से बाजार में डर हावी हुआ। लिहाजा दिग्गज जानकार मान रहे हैं कि बाजार पूरी तरह बजट पर निर्भर हो गया है। बजट के बाद बाजार की सही तस्वीर सामने आ पाएगी।
अमेरिकी फेड की वजह से बाजार में गिरावट देखने को मिली है। अमेरिकी फेड 6-8 महीने के लिए नकदी बनाए रखेगा। वहीं बजट के बाद भारतीय बाजारों में थोड़ी बढ़त देखने को मिल सकती है। फिलहाल बाजार में गिरावट अस्थायी है और निवेश के पहले लोगों को बजट का इंतजार करना चाहिए। अगर बजट अच्छा रहा तो बाजार में फिर निवेश बढ़ेगा।
बजट के बाद एफआईआई निवेश फिर बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि अभी रुपये पर बहुत ज्यादा दबाव बना हुआ है। लिहाजा बजट के संतुलित होने की जरूरत है। बाजार में निवेश के लिए अच्छे शेयरों को चुनकर उनको कुछ समय तक होल्ड करने की रणनीति अपनानी चाहिए। छोटे मिडकैप शेयरों से दूर रहने की ही सलाह है। बाजार के बुरे दौर में मिडकैप शेयरों की हमेशा पिटाई हुई है। लार्जकैप शेयरों में खरीदारी करने की सलाह है।
अगर महंगाई दर में गिरावट आई तो आरबीआई की तरफ से प्रमुख ब्याज दरों में कटौती संभव है। हालांकि अभी प्रमुख ब्याज दरों में कटौती के कोई खास संकेत नहीं मिल रहे हैं। बाजार की मौजूदा चाल को देखते हुए बड़े घरेलू दिग्गज कंपनियों के अलावा आईटी सेक्टर और माइनिंग-मेटल शेयरों में खरीदारी की जा सकती है।
बजट पर इस बार बड़े ऐलानों की ज्यादा उम्मीद नहीं है। लेकिन बजट में इनकम पर टैक्स नहीं बढ़ाने का फैसला करना चाहिए और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने चाहिए। अगर वित्तीय घाटा 5 फीसदी तक आ जाए तो बाजार के लिए अच्छा होगा। बजट में एसटीटी हटाने का फैसला होना चाहिए।
बाजार में फिर से निवेशकों को लाने के लिए म्यूचुअल फंड के लिए इंसेटिव की घोषणा होनी चाहिए। दरअसल 5-6 वर्षों में लोगों को काफी नुकसान हुआ है। लिहाजा निवेशकों को म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश कर खरीदारी करनी चाहिए।
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Wednesday, February 27, 2013
11 मार्च से सीडीएमए स्पेक्ट्रम की नीलामी:
सीडीएमए स्पेक्ट्रम की नीलामी 11 मार्च से होगी। पहले ये नीलामी जीएसएम स्पेक्ट्रम की नीलामी खत्म होने के 2 दिन के बाद होनी थी। लेकिन किसी कंपनी के भाग न लेने के चलते 11 मार्च से शुरू होने वाली जीएसएम स्पेक्ट्रम की दिल्ली, मुंबई समेत 5 सर्किल में नीलामी रद्द हो गई है।
सीडीएमए स्पेक्ट्रम के 800 मेगाहर्ट्ज बैंड की नीलामी 11 मार्च को होगी। नीलामी में सिर्फ एक प्लेयर के भाग लेने के चलते नीलामी एक राउंड में ही खत्म हो जाएगी। और स्पेक्ट्रम बेस प्राइस पर बिकेगा। एमटीएस ब्रैंड के तहत सीडीएमए प्लेटफॉर्म पर सर्विस देने वाली सिस्टमा श्याम ने 11 सर्किल में स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए अर्जी दी है। कंपनी को इसके लिए 5,623 करोड़ रुपये देने होंगे।
जाहिर है कंपनियों की नीलामी में दिलचस्पी न होने से अब सरकार आपना 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएगी। नीलामी के दूसरी बार फेल होने के बाद सरकार क्या फिर से इन सर्किल में स्पेक्ट्रम नीलामी पर रखेगी। इसका फैसला जल्द ईजीओएम करेगी। लेकिन कंपनियों का कहना है कि स्पेक्ट्रम का दाम वाजिब नहीं है यहां तक हाल में ब्रिटेन, जर्मनी जैसे विकसित देशों में हुई 4जी नीलामी से भी कहीं ज्यादा है।
जानकारों का कहना है कि ये कंपनियों की साठगांठ भी हो सकती है। क्योंकि नीलामी के फेल होने से उनके लिए दाम कम कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाना आसान होगा। कंपनियां चाहती हैं कि उनके लाइसेंस की मियाद बढ़ जाए ताकि रिफार्मिंग के जरिए उनके पास मौजूद कीमती स्पेक्ट्रम वापिस नहीं लिया जाए।
900 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की रिफार्मिंग पर टेलिकॉम विभाग को 7 मार्च तक फैसला लेना है। इसी बीच सरकार स्पेक्ट्रम की तीसरे राउंड की नीलामी की तैयारी में जुट गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सरकार को 20 सर्किल में बचे सारे स्पेक्ट्रम की नीलामी करनी है।
भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्यूलर में से किसी ने भी नीलामी में भाग नहीं लिया। जबकि इन कंपनियों के दिल्ली, मुंबई और कोलकता लाइसेंस अगले साल नवंबर में खत्म हो रहे हैं। इन कंपनियों के पास 900 मेगाहर्ट्ज बैंड मौजूद है जिसकी कीमत 1800 मेगाहर्ट्ज से दोगुनी है। 900 मेगाहर्ट्ज की सिग्नल कवरेज दूसरे स्पेक्ट्रम के मुकाबले बेहतर है।
भारती एयरटेल और वोडाफोन ने दिल्ली हाईकोर्ट में 900 मेगाहर्ट्ज नीलामी के खिलाफ याचिका दायर की हुई है। इन कंपनियों का कहना है कि उनके लाइसेंस शर्तों के मुताबिक लाइसेंस की समयसीमा 10 साल तक बढ़नी चाहिए। कोर्ट ने सरकार से इस पर जवाब मांगा है।
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सीडीएमए स्पेक्ट्रम के 800 मेगाहर्ट्ज बैंड की नीलामी 11 मार्च को होगी। नीलामी में सिर्फ एक प्लेयर के भाग लेने के चलते नीलामी एक राउंड में ही खत्म हो जाएगी। और स्पेक्ट्रम बेस प्राइस पर बिकेगा। एमटीएस ब्रैंड के तहत सीडीएमए प्लेटफॉर्म पर सर्विस देने वाली सिस्टमा श्याम ने 11 सर्किल में स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए अर्जी दी है। कंपनी को इसके लिए 5,623 करोड़ रुपये देने होंगे।
जाहिर है कंपनियों की नीलामी में दिलचस्पी न होने से अब सरकार आपना 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएगी। नीलामी के दूसरी बार फेल होने के बाद सरकार क्या फिर से इन सर्किल में स्पेक्ट्रम नीलामी पर रखेगी। इसका फैसला जल्द ईजीओएम करेगी। लेकिन कंपनियों का कहना है कि स्पेक्ट्रम का दाम वाजिब नहीं है यहां तक हाल में ब्रिटेन, जर्मनी जैसे विकसित देशों में हुई 4जी नीलामी से भी कहीं ज्यादा है।
जानकारों का कहना है कि ये कंपनियों की साठगांठ भी हो सकती है। क्योंकि नीलामी के फेल होने से उनके लिए दाम कम कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाना आसान होगा। कंपनियां चाहती हैं कि उनके लाइसेंस की मियाद बढ़ जाए ताकि रिफार्मिंग के जरिए उनके पास मौजूद कीमती स्पेक्ट्रम वापिस नहीं लिया जाए।
900 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की रिफार्मिंग पर टेलिकॉम विभाग को 7 मार्च तक फैसला लेना है। इसी बीच सरकार स्पेक्ट्रम की तीसरे राउंड की नीलामी की तैयारी में जुट गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सरकार को 20 सर्किल में बचे सारे स्पेक्ट्रम की नीलामी करनी है।
भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्यूलर में से किसी ने भी नीलामी में भाग नहीं लिया। जबकि इन कंपनियों के दिल्ली, मुंबई और कोलकता लाइसेंस अगले साल नवंबर में खत्म हो रहे हैं। इन कंपनियों के पास 900 मेगाहर्ट्ज बैंड मौजूद है जिसकी कीमत 1800 मेगाहर्ट्ज से दोगुनी है। 900 मेगाहर्ट्ज की सिग्नल कवरेज दूसरे स्पेक्ट्रम के मुकाबले बेहतर है।
भारती एयरटेल और वोडाफोन ने दिल्ली हाईकोर्ट में 900 मेगाहर्ट्ज नीलामी के खिलाफ याचिका दायर की हुई है। इन कंपनियों का कहना है कि उनके लाइसेंस शर्तों के मुताबिक लाइसेंस की समयसीमा 10 साल तक बढ़नी चाहिए। कोर्ट ने सरकार से इस पर जवाब मांगा है।
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बजटः क्या है कैपिटल और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर:
कल बजट पेश होने वाला है। उससे पहले हम आपको बजट से जुड़े कई शब्दों को समझा रहे हैं। आज आइए आपको बताते हैं कि कैपिटल एक्सपेंडिचर और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर क्या है।
जब आप कार खरीदते हैं तो ये कैपिटल एक्सपेंडीचर होता है जिसका फायदा आपको लांग टर्म में मिलता है लेकिन उसमें पेट्रोल भराना रेवेन्यू एक्सपेंडीचर है। जो कार में कोई वैल्यू नहीं जोड़ती। इसी प्रकार सरकार भी जमीन खरीदती है, बिल्डिंग बनाती है, मशीनें लगती है और इस तरह एसेट बनाने पर खर्च करती है, जिसका इस्तेमाल हम आप करते हैं। इससे न सिर्फ ऐसेट तैयार होता है बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके बनते हैं ये खर्च ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी हैं इसे ही हम कैपिटल एक्सपेंडीचर कहते हैं।
वित्तवर्ष 2013 में सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपये इस मद पर खर्च किए। कैपिटल एक्सपेंडीचर के लिए सरकार कर्ज लेती है, लेकिन मुश्किल तब होती है जब ये कर्ज काफी ज्यादा हो जाता है। इस समय सरकार कर्ज और उसके ब्याज भुगतान पर 3.20 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही है। कई बार घाटा कम करने के लिए खर्च कम करना आसान रास्ता है लेकिन ये गलत रास्ता है।
अब बात करते हैं रेवेन्यू एक्सपेंडीचर की। रेवेन्यू एक्सपेंडीचर सरकार के रोजमर्रा के खर्च हैं जैसे कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, मेंटीनेंस वगैरा-वगैरा। ये ग्रोथ के साथ साथ बढ़ते हैं लेकिन इनसे कोई फायदा नहीं होता है। वित्त वर्ष 2013 में सैलरी और पेंशन जैसे बड़े रोजमर्रा के खर्चों पर 12 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन खर्चों को कम करना मुश्किल है लेकिन जरुरी भी है। देखना होगा बजट में इन मदों पर खर्च कितना बढ़ता है।
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जब आप कार खरीदते हैं तो ये कैपिटल एक्सपेंडीचर होता है जिसका फायदा आपको लांग टर्म में मिलता है लेकिन उसमें पेट्रोल भराना रेवेन्यू एक्सपेंडीचर है। जो कार में कोई वैल्यू नहीं जोड़ती। इसी प्रकार सरकार भी जमीन खरीदती है, बिल्डिंग बनाती है, मशीनें लगती है और इस तरह एसेट बनाने पर खर्च करती है, जिसका इस्तेमाल हम आप करते हैं। इससे न सिर्फ ऐसेट तैयार होता है बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके बनते हैं ये खर्च ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी हैं इसे ही हम कैपिटल एक्सपेंडीचर कहते हैं।
वित्तवर्ष 2013 में सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपये इस मद पर खर्च किए। कैपिटल एक्सपेंडीचर के लिए सरकार कर्ज लेती है, लेकिन मुश्किल तब होती है जब ये कर्ज काफी ज्यादा हो जाता है। इस समय सरकार कर्ज और उसके ब्याज भुगतान पर 3.20 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही है। कई बार घाटा कम करने के लिए खर्च कम करना आसान रास्ता है लेकिन ये गलत रास्ता है।
अब बात करते हैं रेवेन्यू एक्सपेंडीचर की। रेवेन्यू एक्सपेंडीचर सरकार के रोजमर्रा के खर्च हैं जैसे कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, मेंटीनेंस वगैरा-वगैरा। ये ग्रोथ के साथ साथ बढ़ते हैं लेकिन इनसे कोई फायदा नहीं होता है। वित्त वर्ष 2013 में सैलरी और पेंशन जैसे बड़े रोजमर्रा के खर्चों पर 12 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन खर्चों को कम करना मुश्किल है लेकिन जरुरी भी है। देखना होगा बजट में इन मदों पर खर्च कितना बढ़ता है।
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म्यूचुअल फंड एएमसी को सेबी की फटकार:
सेबी ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से कहा है कि वो खराब प्रदर्शन करने वाली स्कीम या तो वापस ले या फिर निवेशकों से फीस लेना बंद करे। सूत्रों के मुताबिक सेबी ने कई एएमसी की इस बात के लिए खिंचाई की है कि उनके कई फंड कई साल से बेंचमार्क इंडेक्स से खराब रिटर्न दे रहे हैं फिर भी वो एक के बाद एक नई स्कीम लांच कर रहे हैं।
निवेशकों को सलाह है कि अगर कोई फंड 5 साल की अवधि में अपने बेंचमार्क को पीछे छोड़ने में नाकामयाब रहता है, तो ऐसे फंड से बाहर निकलना ही बेहतर है।
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का छोटे निवेशकों पर फोकस नहीं है। म्यूचुअल फंड का ध्यान एयूएम जुटाने पर लगा हुआ है। म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को एनएफए के जरिए धोखा दिया है। यही वजह है कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में आने वाले समय में रीस्ट्रक्चरिंग संभव है। सेबी को रिटेल निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाना जरूरी है।
पिछले साल 329 ओपन एंडेड स्कीम में से 117 स्कीम अंडरपरफॉर्म रहे। 44 म्यूचुअल फंड कंपनियां 8.26 लाख करोड़ रुपये के एसेट मैनेज कर रही हैं। अंडरपरफॉर्म करने वाली स्कीम की बात करें तो पिछले 3 साल में रिलायंस ग्रोथ फंड ने 2.46 फीसदी का रिटर्न दिया है और इसका एयूएम 5,465 करोड़ रुपये रहा। वहीं पिछले 5 साल में बिड़ला सन लाइफ टैक्स रिलीफ 96 ने 1.5 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि इसका एयूएम 1,526 करोड़ रुपये है।
साथ ही आईडीएफसी इंफ्रा, एस्कॉर्ट इंफ्रा, बड़ौदा पायोनियर पीएसयू इक्विटी फंड, एसबीआई पीएसयू, बिड़ला सन लाइफ इक्विटी फंड और एचडीएफसी इंडेक्स निफ्टी जैसी स्कीम ने अपने बेंचमार्क से कम रिटर्न दिया है।
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निवेशकों को सलाह है कि अगर कोई फंड 5 साल की अवधि में अपने बेंचमार्क को पीछे छोड़ने में नाकामयाब रहता है, तो ऐसे फंड से बाहर निकलना ही बेहतर है।
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का छोटे निवेशकों पर फोकस नहीं है। म्यूचुअल फंड का ध्यान एयूएम जुटाने पर लगा हुआ है। म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को एनएफए के जरिए धोखा दिया है। यही वजह है कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में आने वाले समय में रीस्ट्रक्चरिंग संभव है। सेबी को रिटेल निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाना जरूरी है।
पिछले साल 329 ओपन एंडेड स्कीम में से 117 स्कीम अंडरपरफॉर्म रहे। 44 म्यूचुअल फंड कंपनियां 8.26 लाख करोड़ रुपये के एसेट मैनेज कर रही हैं। अंडरपरफॉर्म करने वाली स्कीम की बात करें तो पिछले 3 साल में रिलायंस ग्रोथ फंड ने 2.46 फीसदी का रिटर्न दिया है और इसका एयूएम 5,465 करोड़ रुपये रहा। वहीं पिछले 5 साल में बिड़ला सन लाइफ टैक्स रिलीफ 96 ने 1.5 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि इसका एयूएम 1,526 करोड़ रुपये है।
साथ ही आईडीएफसी इंफ्रा, एस्कॉर्ट इंफ्रा, बड़ौदा पायोनियर पीएसयू इक्विटी फंड, एसबीआई पीएसयू, बिड़ला सन लाइफ इक्विटी फंड और एचडीएफसी इंडेक्स निफ्टी जैसी स्कीम ने अपने बेंचमार्क से कम रिटर्न दिया है।
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मजबूत रुपये से नॉन-एग्री कमोडिटी पर दबाव:
आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने वित्तीय घाटे पर काबू पाने का संकेत दिया है। और इसी वजह से आज रुपये की चाल बदल गई है। लेकिन वित्तीय घाटे पर काबू और रुपये की मजबूती की खबरों का असर घरेलू कमोडिटी बाजार पड़ा है और सोना-चांदी समेत पूरे नॉन एग्री कमोडिटी में तेज गिरावट आई है।
घरेलू बाजार में सोने और चांदी की गिरावट बढ़ गई है। दरअसल डॉलर के मुकाबले रुपये में आई मजबूती से घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दोहरा दबाव पड़ा है। क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दबाव में आ गए हैं।
फिलहाल कॉमैक्स पर सोने और चांदी में 0.5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं एमसीएक्स पर सोना 0.6 फीसदी लुढ़ककर 29,920 रुपये पर कारोबार कर रहा है। चांदी 0.7 फीसदी की टूटकर 54,200 रुपये के नीचे आ गई है। एमसीएक्स पर कच्चा तेल 0.25 फीसदी फिसलकर 5,015 रुपये पर आ गया है।
बेस मेटल्स में भी गिरावट आई है। एमसीएक्स पर कॉपर का भाव करीब 1 फीसदी टूट चुका है। इसी तरह से एल्यूमीनियम, निकेल और जिंक में भी तेज गिरावट आई है, हालांकि लंदन मेटल एक्सचेंज पर और शंघाई मेटल एक्सचेंज पर अभी भी कॉपर में मजबूती कायम है।
एनसीडीईएक्स पर कैस्टर सीड 3.5 फीसदी चढ़ गया है। हालांकि एनसीडीईएक्स पर हल्दी और धनिया में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
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घरेलू बाजार में सोने और चांदी की गिरावट बढ़ गई है। दरअसल डॉलर के मुकाबले रुपये में आई मजबूती से घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दोहरा दबाव पड़ा है। क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दबाव में आ गए हैं।
फिलहाल कॉमैक्स पर सोने और चांदी में 0.5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं एमसीएक्स पर सोना 0.6 फीसदी लुढ़ककर 29,920 रुपये पर कारोबार कर रहा है। चांदी 0.7 फीसदी की टूटकर 54,200 रुपये के नीचे आ गई है। एमसीएक्स पर कच्चा तेल 0.25 फीसदी फिसलकर 5,015 रुपये पर आ गया है।
बेस मेटल्स में भी गिरावट आई है। एमसीएक्स पर कॉपर का भाव करीब 1 फीसदी टूट चुका है। इसी तरह से एल्यूमीनियम, निकेल और जिंक में भी तेज गिरावट आई है, हालांकि लंदन मेटल एक्सचेंज पर और शंघाई मेटल एक्सचेंज पर अभी भी कॉपर में मजबूती कायम है।
एनसीडीईएक्स पर कैस्टर सीड 3.5 फीसदी चढ़ गया है। हालांकि एनसीडीईएक्स पर हल्दी और धनिया में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
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बजट से पहले क्या खरीदें, अविनाश गोरक्षकर की पिक्स:
अब बाजार को बजट का इंतजार है और बजट में होने वाले ऐलानों से किन शेयरों में तेजी आएगी जहां अभी खरीदारी करना फायदेमंद होगा। मिंट डायरेक्ट डॉटकॉम के अविनाश गोरक्षकर से जानते हैं कि बजट से पहले क्या खरीदना चाहिए।
सुप्रीम इंफ्राः
ये मुंबई की ईपीसी कंपनी है जो रोड, बिल्डिंग और पुल बनाती है। कंपनी का प्रदर्शन पिछले 2-3 सालों से काफी अच्छा चल रहा है। कंपनी की ऑर्डर बुक 4500 करोड़ रुपये की है। कंपनी ने हाल ही में तीसरी तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं जिनमें आय करीब 35 फीसदी और मुनाफा करीब 30 फीसदी की दर से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2013 में कंपनी के 1800 करोड़ रुपये की आय और 125 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2013 में कंपनी का ईपीएस 65 रुपये रह सकता है। वित्त वर्ष 2014 में कंपनी की आय 2300 करोड़ रुपये और ईपीएस 80 रुपये रह सकती है। 1 साल में सुप्रीम इंफ्रा का शेयर 270 रुपये तक जा सकता है।
तमिलनाडु न्यूज प्रिंट एंड पेपर्स (टीएनपीएल):
ये देश की सबसे बड़ी न्यूजपेपर प्रिंट करने वाली कंपनी है। कंपनी के तीसरी तिमाही नतीजों में कंपनी ने 18 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है जबकि इससे पिछली तिमाही में कंपनी ने 21 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया था। पिछले 9 महीने में कंपनी ने 50 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा लिया है। वित्त वर्ष 2013 में कंपनी का मुनाफा 75 करोड़ रुपये रह सकता है। मार्च 2013 तक कंपनी की बुक वैल्यू 145 रुपये हो जाएगी। इस कंपनी के वैल्यूएशन काफी सस्ते है। 1 साल में टीएनपीएल का शेयर 140 रुपये का लक्ष्य हासिल कर सकता है।
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सुप्रीम इंफ्राः
ये मुंबई की ईपीसी कंपनी है जो रोड, बिल्डिंग और पुल बनाती है। कंपनी का प्रदर्शन पिछले 2-3 सालों से काफी अच्छा चल रहा है। कंपनी की ऑर्डर बुक 4500 करोड़ रुपये की है। कंपनी ने हाल ही में तीसरी तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं जिनमें आय करीब 35 फीसदी और मुनाफा करीब 30 फीसदी की दर से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2013 में कंपनी के 1800 करोड़ रुपये की आय और 125 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2013 में कंपनी का ईपीएस 65 रुपये रह सकता है। वित्त वर्ष 2014 में कंपनी की आय 2300 करोड़ रुपये और ईपीएस 80 रुपये रह सकती है। 1 साल में सुप्रीम इंफ्रा का शेयर 270 रुपये तक जा सकता है।
तमिलनाडु न्यूज प्रिंट एंड पेपर्स (टीएनपीएल):
ये देश की सबसे बड़ी न्यूजपेपर प्रिंट करने वाली कंपनी है। कंपनी के तीसरी तिमाही नतीजों में कंपनी ने 18 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है जबकि इससे पिछली तिमाही में कंपनी ने 21 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया था। पिछले 9 महीने में कंपनी ने 50 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा लिया है। वित्त वर्ष 2013 में कंपनी का मुनाफा 75 करोड़ रुपये रह सकता है। मार्च 2013 तक कंपनी की बुक वैल्यू 145 रुपये हो जाएगी। इस कंपनी के वैल्यूएशन काफी सस्ते है। 1 साल में टीएनपीएल का शेयर 140 रुपये का लक्ष्य हासिल कर सकता है।
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आर्थिक सर्वेक्षण: वित्तवर्ष-14 में 6.1-6.7% की ग्रोथ:
संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश हो गया है। अगले साल सरकार को अर्थव्यवस्था में मजबूती लौटने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2014 में जीडीपी दर 6.1-6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं वित्त वर्ष 2013 में जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी रह सकती है।
मार्च महीने में महंगाई दर घटकर 6.2-6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। महंगाई दर में गिरावट के चलते ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश होगी। वैश्विक कीमतों में गिरावट और आरबीआई के कदमों के चलते महंगाई दर में गिरावट देखने को मिली है। हालांकि आने वाले दिनों में अमीर देशों में ब्याज दरों में कटौती से महंगाई बढ़ सकती है।
देश में आर्थिक मंदी खत्म होने के करीब है और अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत हैं। मंदी से मुकाबले के लिए आर्थिक सुधार तेज करने की जरूरत है। हालांकि वित्तीय और व्यापार घाटे का बढ़ना चिंता का विषय है। लिहाजा वैश्विक स्थिति को देखते हुए डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ाना जरूरी होगा। डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई में बढ़ोतरी होने की आशंका है। लेकिन निर्यात में जल्द सुधार आने की संभावना कम है। व्यापार घाटा कम करने के लिए सोने का आयात घटाने की जरूरत है। वहीं फूड सिक्योरिटी बिल से सब्सिडी बढ़ने का खतरा है। सब्सिडी खर्च को काबू में लाने पर जोर दिया जाएगा।
वित्त वर्ष 2013 में टैक्स वसूली बजटीय लक्ष्य से काफी कम रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में आईआईपी ग्रोथ में सुधार की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2013 में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 6.6 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2014 में वित्तीय घाटा 4.8 फीसदी और व्यापार घाटा 4.6 फीसदी रह सकता है। वित्त वर्ष 2013 में वित्तीय घाटे में 0.2 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है।
उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश बढ़ाना बड़ी चुनौती बन गया है। निवेश की कमी के कारण औद्योगिक रफ्तार कमजोर हो गई है। वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में दबाव देखने को मिल रहा है।
फाइनेंशियल सेक्टर पर छोटी अवधि और लंबी अवधि के कारकों के चलते दबाव देखने को मिल रहा है। जोखिम से बचने के लिए निवेशक शेयर बाजार में पैसे लगाने से बच रहे हैं। जीडीपी ग्रोथ बढ़ने से बैंकों के एनपीए कम होंगे।
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मार्च महीने में महंगाई दर घटकर 6.2-6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। महंगाई दर में गिरावट के चलते ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश होगी। वैश्विक कीमतों में गिरावट और आरबीआई के कदमों के चलते महंगाई दर में गिरावट देखने को मिली है। हालांकि आने वाले दिनों में अमीर देशों में ब्याज दरों में कटौती से महंगाई बढ़ सकती है।
देश में आर्थिक मंदी खत्म होने के करीब है और अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत हैं। मंदी से मुकाबले के लिए आर्थिक सुधार तेज करने की जरूरत है। हालांकि वित्तीय और व्यापार घाटे का बढ़ना चिंता का विषय है। लिहाजा वैश्विक स्थिति को देखते हुए डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ाना जरूरी होगा। डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई में बढ़ोतरी होने की आशंका है। लेकिन निर्यात में जल्द सुधार आने की संभावना कम है। व्यापार घाटा कम करने के लिए सोने का आयात घटाने की जरूरत है। वहीं फूड सिक्योरिटी बिल से सब्सिडी बढ़ने का खतरा है। सब्सिडी खर्च को काबू में लाने पर जोर दिया जाएगा।
वित्त वर्ष 2013 में टैक्स वसूली बजटीय लक्ष्य से काफी कम रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में आईआईपी ग्रोथ में सुधार की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2013 में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 6.6 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2014 में वित्तीय घाटा 4.8 फीसदी और व्यापार घाटा 4.6 फीसदी रह सकता है। वित्त वर्ष 2013 में वित्तीय घाटे में 0.2 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है।
उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश बढ़ाना बड़ी चुनौती बन गया है। निवेश की कमी के कारण औद्योगिक रफ्तार कमजोर हो गई है। वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में दबाव देखने को मिल रहा है।
फाइनेंशियल सेक्टर पर छोटी अवधि और लंबी अवधि के कारकों के चलते दबाव देखने को मिल रहा है। जोखिम से बचने के लिए निवेशक शेयर बाजार में पैसे लगाने से बच रहे हैं। जीडीपी ग्रोथ बढ़ने से बैंकों के एनपीए कम होंगे।
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सेंसेक्स 137 अंक चढ़ा, 5797 पर बंद निफ्टी:
अर्थव्यवस्था के हालात सुधरने और कर्ज सस्ता होने की उम्मीद से बाजार में जोश आया। सेंसेक्स 137 अंक चढ़कर 19152 और निफ्टी 35 अंक चढ़कर 5797 पर बंद हुए।
दिग्गजों के साथ-साथ मझौले शेयरों में भी खरीदारी लौटी। निफ्टी मिडकैप 1 फीसदी चढ़ा। हालांकि, चुनिंदा मिडकैप शेयरों की पिटाई जारी रही। बीएसई स्मॉलकैप 0.2 फीसदी मजबूत हुआ।
कैपिटल गुड्स शेयर 2.5 फीसदी और रियल्टी शेयर 2 फीसदी उछले। ऑयल एंड गैस, मेटल, एफएमसीजी, पावर, पीएसयू, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और बैंक शेयर 1.2-0.8 फीसदी चढ़े। ऑटो शेयरों में 0.5 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई।
आईटी शेयर 1 फीसदी टूटे। तकनीकी शेयरों में 0.25 फीसदी की गिरावट आई। हेल्थकेयर शेयरों में सुस्त कारोबार रहा।
बाजार की चाल
मजबूत अंतर्राष्ट्रीय संकेतों की वजह से घरेलू बाजार तेजी के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 125 अंक चढ़ा। हालांकि, अच्छी शुरुआत करने के बाद बाजार से जोश गायब होता नजर आया।
निफ्टी लाल निशान में फिसला और सेंसेक्स ने भी 19000 के नीचे का स्तर छुआ। छोटे और मझौले शेयरों में भी कमजोरी दिखी। सुबह 11 बजे के बाद बाजार संभलते नजर आए।
सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था में मजबूती लौटने की उम्मीद जताए जाने के बाद बाजारों का मूड सुधरा। इसके अलावा मार्च तक महंगाई कम होने के अनुमान से आरबीआई द्वारा दरें जल्द घटाए जाने की संभावना बढ़ने से बाजार उछले।
सेंसेक्स 150 अंक से ज्यादा उछला और निफ्टी 5800 के ऊपर पहुंचा। मिडकैप शेयर भी संभले। बाजारों के साथ-साथ रुपये पर भी सकात्मक असर दिखा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 54 के अहम स्तर के नीचे पहुंचा।
यूरोपीय बाजारों की मजबूत शुरुआत की वजह से घरेलू बाजारों में भी तेजी बढ़ती नजर आई। सेंसेक्स करीब 200 अंक चढ़ा और निफ्टी में भी करीब 60 अंक की तेजी आई। निफ्टी मिडकैप 1 फीसदी चढ़ा।
हालांकि, दोपहर 2:30 बजे के बाद यूरोपीय बाजारों के मजबूती गंवाने के बाद घरेलू बाजार भी ऊपरी स्तरों से फिसले।
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दिग्गजों के साथ-साथ मझौले शेयरों में भी खरीदारी लौटी। निफ्टी मिडकैप 1 फीसदी चढ़ा। हालांकि, चुनिंदा मिडकैप शेयरों की पिटाई जारी रही। बीएसई स्मॉलकैप 0.2 फीसदी मजबूत हुआ।
कैपिटल गुड्स शेयर 2.5 फीसदी और रियल्टी शेयर 2 फीसदी उछले। ऑयल एंड गैस, मेटल, एफएमसीजी, पावर, पीएसयू, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और बैंक शेयर 1.2-0.8 फीसदी चढ़े। ऑटो शेयरों में 0.5 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई।
आईटी शेयर 1 फीसदी टूटे। तकनीकी शेयरों में 0.25 फीसदी की गिरावट आई। हेल्थकेयर शेयरों में सुस्त कारोबार रहा।
बाजार की चाल
मजबूत अंतर्राष्ट्रीय संकेतों की वजह से घरेलू बाजार तेजी के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 125 अंक चढ़ा। हालांकि, अच्छी शुरुआत करने के बाद बाजार से जोश गायब होता नजर आया।
निफ्टी लाल निशान में फिसला और सेंसेक्स ने भी 19000 के नीचे का स्तर छुआ। छोटे और मझौले शेयरों में भी कमजोरी दिखी। सुबह 11 बजे के बाद बाजार संभलते नजर आए।
सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था में मजबूती लौटने की उम्मीद जताए जाने के बाद बाजारों का मूड सुधरा। इसके अलावा मार्च तक महंगाई कम होने के अनुमान से आरबीआई द्वारा दरें जल्द घटाए जाने की संभावना बढ़ने से बाजार उछले।
सेंसेक्स 150 अंक से ज्यादा उछला और निफ्टी 5800 के ऊपर पहुंचा। मिडकैप शेयर भी संभले। बाजारों के साथ-साथ रुपये पर भी सकात्मक असर दिखा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 54 के अहम स्तर के नीचे पहुंचा।
यूरोपीय बाजारों की मजबूत शुरुआत की वजह से घरेलू बाजारों में भी तेजी बढ़ती नजर आई। सेंसेक्स करीब 200 अंक चढ़ा और निफ्टी में भी करीब 60 अंक की तेजी आई। निफ्टी मिडकैप 1 फीसदी चढ़ा।
हालांकि, दोपहर 2:30 बजे के बाद यूरोपीय बाजारों के मजबूती गंवाने के बाद घरेलू बाजार भी ऊपरी स्तरों से फिसले।
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कैस्ट्रॉल का मुनाफा बढ़ा, बिक्री में गिरावट:
साल 2012 की चौथी तिमाही में कैस्ट्रॉल का मुनाफा 10.3 फीसदी बढ़कर 118 करोड़ रुपये हो गया है। साल 2011 की चौथी तिमाही में कैस्ट्रॉल का मुनाफा 107 करोड़ रुपये रहा था।
हालांकि साल 2012 की चौथी तिमाही में कैस्ट्रॉल की बिक्री 1.4 फीसदी घटकर 758 करोड़ रुपये रही। साल 2011 की चौथी तिमाही में कैस्ट्रॉल की बिक्री 768.7 करोड़ रुपये रही थी
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हालांकि साल 2012 की चौथी तिमाही में कैस्ट्रॉल की बिक्री 1.4 फीसदी घटकर 758 करोड़ रुपये रही। साल 2011 की चौथी तिमाही में कैस्ट्रॉल की बिक्री 768.7 करोड़ रुपये रही थी
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कमोडिटी बाजारः बेस मेटल्स में क्या करें:
अमेरिका में नए घरों की बिक्री बढ़ने से लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर की कीमतों को कुछ सपोर्ट मिला है। लेकिन घरेलू बाजार में रुपये की मजबूती से मेटल पर दबाव बना हुआ है। एमसीएक्स पर बेस मेटल्स में 0.5-1 फीसदी के आसपास गिरावट देखने को मिल रही है।
एमसीएक्स पर कॉपर 0.4 फीसदी की गिरावट के साथ 42.50 रुपये पर कारोबार कर रहा है। एल्यूमिनियम में 0.75 फीसदी, निकेल में 0.9 फीसदी, लेड में 0.3 फीसदी और जिंक में 0.4 फीसदी की कमजोरी आई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार की जोरदार बढ़त के बाद सोना फिर से दबाव में आ गया है। साथ ही घरेलू बाजार में भी गिरावट पर कारोबार हो रहा है। रुपये में मजबूती से आज सोने पर दोहरा दबाव पड़ा है। चांदी में भी गिरावट देखी जा रही है।
फिलहाल एमसीएक्स पर सोना 0.6 फीसदी की कमजोरी के साथ 29,900 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं चांदी 0.8 फीसदी लुढ़ककर 54,150 रुपये पर आ गई है।
कच्चा तेल भी दबाव में आ गया है। मुख्य रूप से यूरोप की आर्थिक सेहत बिगड़ने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। नायमैक्स पर कच्चा तेल 93 डॉलर के नीचे आ गया है। वहीं घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर कच्चा तेल 0.25 फीसदी फिसलकर 5,015 रुपये पर आ गया है। एमसीएक्स पर नेचुरल गैस में भी 0.25 फीसदी लुढ़का है और इसका भाव 187.50 रुपये के नीचे आ गया है।
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एमसीएक्स पर कॉपर 0.4 फीसदी की गिरावट के साथ 42.50 रुपये पर कारोबार कर रहा है। एल्यूमिनियम में 0.75 फीसदी, निकेल में 0.9 फीसदी, लेड में 0.3 फीसदी और जिंक में 0.4 फीसदी की कमजोरी आई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार की जोरदार बढ़त के बाद सोना फिर से दबाव में आ गया है। साथ ही घरेलू बाजार में भी गिरावट पर कारोबार हो रहा है। रुपये में मजबूती से आज सोने पर दोहरा दबाव पड़ा है। चांदी में भी गिरावट देखी जा रही है।
फिलहाल एमसीएक्स पर सोना 0.6 फीसदी की कमजोरी के साथ 29,900 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं चांदी 0.8 फीसदी लुढ़ककर 54,150 रुपये पर आ गई है।
कच्चा तेल भी दबाव में आ गया है। मुख्य रूप से यूरोप की आर्थिक सेहत बिगड़ने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। नायमैक्स पर कच्चा तेल 93 डॉलर के नीचे आ गया है। वहीं घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर कच्चा तेल 0.25 फीसदी फिसलकर 5,015 रुपये पर आ गया है। एमसीएक्स पर नेचुरल गैस में भी 0.25 फीसदी लुढ़का है और इसका भाव 187.50 रुपये के नीचे आ गया है।
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Chidambaram set to present India's 82nd budget, his eighth:
Finance Minister P. Chidambaram will present India's 82nd Union Budget in the Lok Sabha on Thursday. This will be his eighth Budget - two short of the record 10 set by former prime minister Morarji Desai.
Thursday will also see Chidambaram equal the eight-budget track record of his predecessor, Pranab Mukherjee, who is now the president.
Since independence in August 1947, the country has seen a total of 25 ministers hold the finance portfolio. It has also seen 81 budgets - 65 normal annual budgets, 12 interim budgets and four special-occasion budgetary measures, also called mini-budgets.
The tenures of two leaders holding the finance portfolio - Inder Kumar Gujral and Hemvati Nandan Bahugana - did not afford them the pleasure of presenting a national budget.
Among the others, Morarji Desai presented eight normal and two interim budgets, which had taken his tally to a record 10 - this remains unchallenged so far.
Chidambaram, on Thursday, will surpass Yashwant Sinha, Y.B. Chavan and C.D. Deshmukh - who all presented seven budgets each. Prime Minister Manmohan Singh and the country's fourth finance minister T.T. Krishnamachari have presented six budgets each.
The next in line in terms of number of budgets presented are R. Venkataraman and H.M. Patel with three Budgets each, while Jaswant Singh, V.P. Singh, C. Subramaniam, John Mathai and R.K. Shanmukham Chetty have two each to their credit.
Among those who have presented one budget each all as prime ministers holding additional charge of the finance portfolio are Jawaharlal Nehru, his daughter Indira Gandhi and his grandson Rajiv Gandhi.
These apart, Charan Singh, N.D. Tiwari, Madhu Dandavate, S.B. Chavan and Sachindra Chaudhuri have also presented one budget each.
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Thursday will also see Chidambaram equal the eight-budget track record of his predecessor, Pranab Mukherjee, who is now the president.
Since independence in August 1947, the country has seen a total of 25 ministers hold the finance portfolio. It has also seen 81 budgets - 65 normal annual budgets, 12 interim budgets and four special-occasion budgetary measures, also called mini-budgets.
The tenures of two leaders holding the finance portfolio - Inder Kumar Gujral and Hemvati Nandan Bahugana - did not afford them the pleasure of presenting a national budget.
Among the others, Morarji Desai presented eight normal and two interim budgets, which had taken his tally to a record 10 - this remains unchallenged so far.
Chidambaram, on Thursday, will surpass Yashwant Sinha, Y.B. Chavan and C.D. Deshmukh - who all presented seven budgets each. Prime Minister Manmohan Singh and the country's fourth finance minister T.T. Krishnamachari have presented six budgets each.
The next in line in terms of number of budgets presented are R. Venkataraman and H.M. Patel with three Budgets each, while Jaswant Singh, V.P. Singh, C. Subramaniam, John Mathai and R.K. Shanmukham Chetty have two each to their credit.
Among those who have presented one budget each all as prime ministers holding additional charge of the finance portfolio are Jawaharlal Nehru, his daughter Indira Gandhi and his grandson Rajiv Gandhi.
These apart, Charan Singh, N.D. Tiwari, Madhu Dandavate, S.B. Chavan and Sachindra Chaudhuri have also presented one budget each.
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SBI raises fixed deposit rates by 0.25%:
State Bank of India (SBI), the largest bank of the country, today announced increase in interest rate on fixed deposits by 0.25 per cent on select maturities.
Of the total 9 maturity periods for fixed deposits, rates have been revised upwards in 4 categories with maturities of over one year.
The new rates would be effective from March 1, SBI said in a statement.
With the revision, the interest rate on 1-2 years fixed deposit would go up to 8.75 percent, from 8.50 percent. Similarly, term deposit 2-3 years, 3-5 years and 5-10 years would also earn higher interest rate of 8.75 percent.
However, the bank has left interest rate unchanged for deposits less than 1 year.
Earlier this month, the bank had cut lending rate by 0.05 percent, soon after the Reserve Bank cut its key policy rates.
After this marginal reduction, SBI's base rate, or the minimum rate of lending, came down to 9.70 percent from 9.75 percent effective February 4.
In its third quarter policy review on January 29, RBI had lowered key short-term lending rate by 0.25 per cent and also injected Rs 18,000 crore liquidity through similar reduction of Cash Reserve Ratio.
The repo rate, at which RBI lends to banks, was eased after a gap of nine months as the central bank fought the stubbornly high inflation through tight money policy, leading to high interest rate regime.
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Of the total 9 maturity periods for fixed deposits, rates have been revised upwards in 4 categories with maturities of over one year.
The new rates would be effective from March 1, SBI said in a statement.
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However, the bank has left interest rate unchanged for deposits less than 1 year.
Earlier this month, the bank had cut lending rate by 0.05 percent, soon after the Reserve Bank cut its key policy rates.
After this marginal reduction, SBI's base rate, or the minimum rate of lending, came down to 9.70 percent from 9.75 percent effective February 4.
In its third quarter policy review on January 29, RBI had lowered key short-term lending rate by 0.25 per cent and also injected Rs 18,000 crore liquidity through similar reduction of Cash Reserve Ratio.
The repo rate, at which RBI lends to banks, was eased after a gap of nine months as the central bank fought the stubbornly high inflation through tight money policy, leading to high interest rate regime.
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