Friday, February 15, 2013

बजट 2013 से वरिष्ठ नागरिकों की उम्मीदें

भारत में अधिकांश लोगों की कामकाजी जिंदगी का अंत 58-60 साल की उम्र में हो जाता है। ऐसा तब होता है जब लोग सरकारी नौकरी या प्राइवेट नौकरी से रिटायर हो जाते हैं। इसलिए इस आयु में आमदनी होनी बंद हो जाती है। पिछले 2-3 सालों में घर के बजट के बढ़ते खर्चो से इस आयु वर्ग ( कुल जनसंख्या का 7.5 फीसदी यानी 7.7 करोड़ लोग) पर सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ता है।

रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ नागरिकों के लिए उनके निवेश से मिलने वाला रिटर्न ही आय का सबसे बड़ा स्त्रोत होता है। पिछले कुछ सालों से ऊंची ब्याज दरों के चलते रिटर्न ज्यादा मिलते हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई में ये कारगर साबित नहीं होता है। इसके अलावा कई टैक्स भी अदा करने होते हैं जो आय पर असर डालते हैं। इसलिए सबसे पहली बात जो वरिष्ठ नागरिक इस बजट से चाहते हैं वो है कि टैक्स छूट में बढ़ोतरी की सीमा बढ़ाई जाए।

फिलहाल वरिष्ठ नागरिक जिनकी आय 2.5 लाख रुपये से कम है वो ही टैक्स देने से बच पाते हैं। वहीं जिनकी आयु 80 साल से अधिक है उन्हें 5 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स देने से छूट मिलती है। तो क्या जो वरिष्ठ नागरिक 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के हैं उन्हें भी 5 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स देने से छूट नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने पूरी उम्र टैक्स अदा किया है और अब उन्हें इससे कुछ विश्राम मिलना चाहिए।

वहीं वरिष्ठ नागरिक भी दूसरे अन्य लोगों की तरह सेक्शन 80 सी के अंतर्गत टैक्स छूट बढ़ाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। 80सी के अंतर्गत मिलने वाली टैक्स छूट कई निवेशों में बंटी होती है और अगर इसमें बढ़ोतरी होती है इसका स्वागत ही होगा।

इसके अलावा सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम पर मिलने वाली टैक्स छूट में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। फिलहाल ये निवेश ईटीटी श्रेणी में आता है। इसके अंतर्गत 80सी के तहत मिलने वाली टैक्स छूट केवल निवेश करने पर ही मिल सकती है। इसके चलते तिमाही आय या अन्य आय किसी भी दूसरी आय की तरह टैक्स के अधीन आती है। इसके तहत 15 लाख रुपये तक के निवेश पर ही टैक्स छूट मिल सकती है।

और अंत में वरिष्ठ नागरिक काफी बेसब्री से नए डीटीसी कोड के आने का इंतजार कर रहे हैं कि उसमें उनके लिए भी कुछ घोषणा हो सकती है।

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