Tuesday, February 26, 2013

सेंसेक्स 316 अंक टूटा, 5800 के नीचे बंद निफ्टी:

इटली के चुनावों में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने की वजह से यूरोजोन को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। जिसका असर दुनियाभर के बाजारों पर नजर आया। यूरोजोन के भविष्य को लेकर चिंता की वजह से शेयर बाजार टूटे।

वैश्विक बाजारों में आई भारी गिरावट से घरेलू बाजार भी अछूते न रह पाए। सेंसेक्स 316 अंक गिरकर 19015 और निफ्टी 93 अंक गिरकर 5761 पर बंद हुए।

छोटे और मझौले शेयर भी बिकवाली से बच नहीं पाए। निफ्टी मिडकैप 2 फीसदी और बीएसई स्मॉलकैप 2.5 फीसदी लुढ़के। चुनिंदा मिडकैप शेयरों की पिटाई दूसरे दिन भी जारी रही।

ऑयल एंड गैस, ऑटो, कैपिटल गुड्स, मेटल, पीएसयू, हेल्थकेयर और रियल्टी शेयर 3-2 फीसदी लुढ़के। बैंक, पावर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी शेयरों में 1.5-0.5 फीसदी की गिरावट आई।

हालांकि, कमजोर रुपये की वजह से आईटी और तकनीकी शेयर करीब 1 फीसदी चढ़े। 

बाजार की चाल

कमजोर अंतर्राष्ट्रीय संकेतों की वजह से बाजार गिरावट के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में ही बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ा। सेंसेक्स करीब 150 अंक टूटा और निफ्टी 5800 के स्तर के करीब पहुंचा।

बाजार दिग्गजों के साथ-साथ छोटे और मझौले शेयरों पर बिकवाली का दबाव नजर आया। निफ्टी मिडकैप और बीएसई स्मॉलकैप 1 फीसदी टूटे।

एशियाई बाजारों में बढ़ती गिरावट ने घरेलू बाजारों का मूड और खराब कर दिया। सेंसेक्स 200 अंक लुढ़का और निफ्टी 5800 के अहम स्तर के नीचे चला गया। 29 नवंबर 2012 के बाद पहली बार निफ्टी 5800 के नीचे फिसला।

कमजोर यूरोपीय संकेतों की वजह से घरेलू बाजारों में गिरावट गहराती नजर आई। सेंसेक्स 250 अंक से ज्यादा टूटा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर 2 फीसदी लुढ़के।

इसके बाद बाजार में गिरावट लगातार बढ़ती चली गई। सेंसेक्स 355 अंक टूटा और 19000 के अहम स्तर के नीचे फिसला। निफ्टी में भी 100 अंक से ज्यादा की कमजोरी आई।

23 जुलाई 2012 के बाद की बाजार की ये सबसे बड़ी गिरावट रही। 8 मई 2012 पहली बार निफ्टी 100 अंक से ज्यादा टूटा। साथ ही, 27 नवंबर 2012 के बाद पहली बार निफ्टी 5800 के नीचे बंद हुआ।

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