रेल मंत्री पवन बंसल ने संसद में रेल बजट पेश किया है। 17 साल के बाद पहली बार कांग्रेस के किसी मंत्री ने रेल बजट पेश किया है।
रेल मंत्री पवन बंसल ने अपने भाषण में भारतीय रेल को वित्तीय मजबूती देने पर जोर दिया। साथ ही लागत में बढ़ोतरी पर चिंता जताई। लेकिन मालभाड़े में बढ़ोतरी कर ही लागत को कम करने की वकालत की।
वित्त वर्ष 2013 में रेलवे को 24,600 करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल घाटा 22,500 करोड़ रुपये रहा था। रेलवे का घाटा आगे और बढ़ने का अनुमान है। साथ ही पैसों की कमी के चलते रेलवे के कई प्रोजेक्ट अधर में लटके हुए हैं।
12वीं पंचवार्षिक योजना के तहत रेलवे को 5.19 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी, जिसमें 1.94 लाख करोड़ रुपये की बजटीय आवंटन का समावेश होगा। 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और आंतरिक संसाधनों के जरिए 1.05 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई जाएगी। रेलवे के 1 अरब टन मालढुलाई के क्लब में शामिल होने की उम्मीद है, अब तक इस क्लब में चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2013 में रेलवे को 1.94 लाख करोड़ का बजटीय आवंटन मिला है। सेंट्रल रोड़ फंड से रेलवे को 5000 करोड़ रुपये की जगह 1100 करोड़ रुपये ही मिले हैं।
पवन बंसल ने कहा है कि रेलवे को 2012 में वित्त मंत्रालय से 3000 करोड़ रुपये का कर्ज लेना पड़ा है। रेलवे ने ये कर्ज ब्याज समेत वित्त मंत्रालय को लौटा दिया है। रेलवे की कोशिश कर रहा है कि वित्त वर्ष 2013 का अंत सरप्लस के साथ हो।
वित्त वर्ष 2014 में रेलवे का बाजार से 15103 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने का लक्ष्य है। वित्त वर्ष 20147 में रेलवे की ग्रॉस ट्रैफिक रिसिप्ट 1.44 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। रेलवे इंफ्रा प्रोजेक्ट के लिए बजटीय आवंटन पर निर्भरता कम करना चाहता है।
अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से रेलवे के मालढुलाई में 10 करोड़ टन की कमी आई है। रेलवे को उम्मीद है कि मालढ़ुलाई से होने की आय में 9 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। 2013-14 के लिए रेलवे ने 1047 लाख टन मालढ़ुलाई का लक्ष्य रखा है।
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रेल बजट को ग्रोथ बढ़ाने वाला बजट करार दिया है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद ये अच्छा बजट है। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि मौजूदा हालात में इससे बेहतर रेल बजट नहीं हो सकता है। रेल मंत्री को सीमाओं के अंदर ही काम करना होता है।
विपक्षी पार्टियों ने रेल बजट पर निराशा जताई है। बीएसपी प्रमुख मायावती के मुताबिक इस बजट में मध्यम वर्ग के लोगों के लिए कुछ नहीं है। किरायों में बढ़ोतरी नहीं की ये कहना गलत होगा। वहीं फ्यूल सरचार्ज बढ़ना यात्रियों के लिए बोझ है।
जनता दल यूनाइटेड के शरद यादव का कहना है कि रेल बजट में कमजोर इलाकों पर ध्यान नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा की अनदेखी की गई है। विकास के पुराने कामों को दोबारा शुरू करने का ऐलान नहीं हुआ।
रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन विवेक सहाय का कहना है कि रेल बजट से सरकार ने अपनी चुनावी लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश की है क्योंकि यूपीए सरकार का आखिरी बजट है। सरकार रेलवे के क्षेत्र में काम कर रही है लेकिन इसकी रफ्तार धीमी है। हालांकि रेलवे का मालभाड़े में बढ़ोतरी करना जरूरी है और इसके जरिए सरकार अपना घाटा कम करनी चाहती है।
सरकार को नई ट्रेनों पर फोकस करना चाहिए क्योंकि रेलवे पर लगातार भार बढ़ रहा है। रेलवे के लिए हर क्षेत्र में काम करने की कोशिश की जा रही है जिसका असर आगे चलकर देखा जाएगा।
पीडब्लूसी में सीनियर मैनेजर राजाजी मिश्रान का कहना है कि रेलवे मंत्री ने नए पीपीपी मॉडल का दायरा बढ़ाने के संकेत दिए हैं जो रेलवे के लिए अच्छा संकेत है। रेलवे में निजी भागीदारी बढ़ने से रेलवे के प्रोजेक्ट समय से पूरे हो पाएंगे और इसका फायदा रेलवे का राजस्व बढ़ने के रूप में मिलेगा।
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