Tuesday, February 26, 2013

बजट के बाद मिलेगा बाजार में निवेश का मौका:

बजट के पहले भले बाजार दबाव में नजर आ रहे हैं। हालांकि निवेशकों को बाजार में निवेश करने का सही मौका बजट के बाद ही नजर आ रहा है। जानकारों का भी यही मानना है कि अब बजट के बाद बाजार का मूड देखकर निवेश की अगली रणनीति बनानी चाहिए।

प्रामेरिका मयूचुअल फंड के एमडी और सीईओ विजय मंत्री का कहना है कि बजट के बाद अगर बाजार में 5-7 फीसदी की गिरावट आती है तो निवेश के लिए वैल्यूएशन अच्छे हो सकते हैं। उस समय बाजार में निवेश किया जा सकता है।

इस समय बाजार में खरीदारी का मौका नहीं है। खासकर मिडकैप शेयरों में खरीदारी नहीं करनी चाहिए। मिडकैप शेयर काफी चढ़ चुके हैं और अब उनमें गिरावट आ रही है।

विजय मंत्री के मुताबिक 2013 में बाजार में गिरावट के पीछे वैश्विक लिक्विडिटी में गिरावट अहम वजह है। बजट में वित्त मंत्री को वैश्विक पूंजी और घरेलू निवेशकों को बाजार में लाने के लिए कदम उठाने चाहिए।

बजट में घरेलू संस्थागत निवेशकों को बाजार में लाने के लिए कुछ उपाय उठाए जाने चाहिए। घरेलू बचत को बाजार में लाने के लिए कुछ घोषणाएं होनी चाहिए। रिटेल निवेशकों को बाजार में सीधे पूंजी डालने की सलाह नहीं है और म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करने की सलाह दी जा रही है। निवेशकों को बाजार में लाने के लिए राजीव गांधी इक्विटी स्कीम को ज्यादा आकर्षक बनाया जा सकता है। इसे क्लोज एंडेड फंड बनाया जा सकता है, इसमें डीमैट की अनिवार्य शर्त को खत्म किया जा सकता है। इन सब उपायों से रिटेल निवेशकों का म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ेगा।

विजय मंत्री के मुताबिक 2013 में बाजार में सेक्टर की बजाए खास शेयरों पर आधारित कारोबार होगा। निवेशकों को ऐसी कंपनियों से बचना चाहिए जिनमें विदेशी कर्ज ज्यादा है। बाजार में कुछ जोखिम का आकलन कर लेना चाहिए और इसके आधार पर निवेश कर लेना चाहिए।

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के रिसर्च हेड ज्योतिवर्धन जयपुरिया का कहना है कि बाजार को बजट से बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है। हालांकि बजट के चलते बाजार में ज्यादा निराशा भी नहीं देखने को मिलेगी। दरअसल पिछले साल की मजबूती के कारण इस साल बाजार में मुनाफावसूली हावी हुई है। साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के साथ सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।

ज्योतिवर्धन जयपुरिया के मुताबिक तीसरी तिमाही के नतीजों से बाजार निराश हुए हैं। हालांकि वित्त वर्ष 2014 बाजार के लिए अच्छा साबित होगा। वित्त वर्ष 2014 कंपनियों की कमाई के लिहाज से भी बेहतर साबित होगा और कंपनियों की आय 10 फीसदी से ज्यादा बढ़ेगी। साल 2013 में घरेलू बाजार में एफआईआई निवेश कम रह सकता है। साल 2013 में भारतीय बाजार सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है।

सीएलएसए के लॉरेंस बैलेंको का कहना है कि निफ्टी में 5,756 के स्तर से दोबारा उछाल देखने को मिलेगा। अगर निफ्टी को 5,756 के स्तर पर सपोर्ट मिलता है, तो बाजार 6,300 के स्तर तक जा सकता है।

डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर यू आर भट का कहना है कि अमेरिका और यूरोप की चिंताओं के कारण भारतीय बाजारों का कुछ दिनों तक नीचे की ओर ही रुझान रहने वाला है। अगर बजट में बेहतर ऐलान हुए तो बाजार में उछाल देखने को मिलेगा। हालांकि बजट में कुछ खास ऐलान नहीं हुए तो निफ्टी 5700-5900 के दायरे में झूमते रहेगा। भारतीय बाजार में एफआईआई निवेश का रुख भी कमजोर रहने का अनुमान है।

यू आर भट का मानना है कि स्पेक्ट्रम नीलामी के फ्लॉप रहने से टेलिकॉम कंपनियों को फायदा मिलेगा। बजट में इंफ्रा सेक्टर के लिए ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है। कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुद्दे से जूझने वाली मिडकैप कंपनियों से दूर रहने की सलाह है। यूरोपियन यूनियन के मुद्दे सुलझने से भारतीय बाजार में तेजी दिख सकती है।

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