वित्त मंत्रालय ने काले धन की हेराफेरी में शामिल 3 निजी बैंकों की जांच शुरू कर दी है। लेकिन, 2 साल पहले ही एक गोपनीय जांच में सरकार के सामने ये सच्चाई आ गई थी। लेकिन तब इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
2 साल पहले सरकार को पता चला था कि कई निजी बैंक ब्लैक मनी को व्हाइट करने का गोरखधंधा कर रहे हैं। सरकार की जांच में दिल्ली के एक मिडिलमैन अब्दुल मुनाफ खान का पता चला था जो एचडीएफसी बैंक, आईएनजी वैश्य बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में करोड़ो रुपये जमा कराता था।
ये रिपोर्ट 2011 में तैयार हुई थी और इसे वित्त मंत्री, गृह मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, आरबीआई, सीबीआई और ईडी के डायरेक्टरों को भेजा गया था। रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया था कि मुनाफ ने जनवरी से जून 2011 के बीच इन 6 बैंकों में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा करवाए। सीबीआई ने मुनाफ को पकड़ा भी था, लेकिन जांच पूरी नहीं होने के चलते उसे छोड़ दिया गया।
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2 साल पहले सरकार को पता चला था कि कई निजी बैंक ब्लैक मनी को व्हाइट करने का गोरखधंधा कर रहे हैं। सरकार की जांच में दिल्ली के एक मिडिलमैन अब्दुल मुनाफ खान का पता चला था जो एचडीएफसी बैंक, आईएनजी वैश्य बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में करोड़ो रुपये जमा कराता था।
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