Monday, April 1, 2013

सुस्त पड़ने लगी अर्थव्यवस्था की रफ्तार :

ग्रोथ के मोर्चे पर सरकार को करारा झटका लगा है। फरवरी में कोर इंडस्ट्रीज की ग्रोथ -2.5 फीसदी रही है। जबकि पिछले साल ये आंकड़ा 7.7 फीसदी था। साल-दर-साल आधार पर अप्रैल-फरवरी में कोर इंडस्ट्रीज की ग्रोथ 5.2 फीसदी से घटकर 2.6 फीसदी रही।

कोर इंडस्ट्रीज की रफ्तार पूरी अर्थव्यवस्था की नब्ज है। अगर ये धीमी पड़ गई है, तो इसे अर्थव्यवस्था मंदी आने के संकेत माना जा सकता है। कोर इंडस्ट्रीज में कोयला, कच्चा तेल, नैचुरल गैस, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, फर्टिलाइजर, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल होती हैं।

कोर इंडस्ट्रीज के ग्रोथ आंकड़ों का इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) में करीब 40 फीसदी हिस्सा होता है। ऐसे में कोर इंडस्ट्रीज ग्रोथ के निगेटिव होने का मतलब है कि आईआईपी के आंकड़े भी निराशाजनक रह सकते हैं।

इतना ही नहीं मार्च में भी हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं। मार्च एचएसबीसी मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई 54.2 फीसदी से घटकर 52 पर पहुंच गया है, जो 16 महीनों का निचला स्तर है। विदेशी और घरेलू-दोनों बाजारों से नए ऑर्डर में कमी की वजह से मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में धीमापन दिखा है।

एचएसबीसी पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) करीब 450 कंपनियों से मिले आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जाता है। हालांकि, एचएसबीसी के मुताबिक इंडस्ट्री के लिए राहत की बात है कि मार्च में कच्चे माल की महंगाई दर में थोड़ी कमी दिखी है।

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