आरबीआई ने भारतीय कंपनियों की विदेश में सीधे निवेश पर सफाई दी है। आरबीआई का कहना है कि विदेश में निवेश पर रोक के नियम 14 अगस्त के पहले हुए करारों पर लागू नहीं होंगे।
आरबीआई के मुताबिक विदेशी इक्विटी होल्डिंग कंपनी से फॉरेक्स कर्ज जुटाने के नियम आसान हो गए हैं। कंपनियां जनरल कॉरपोरेट काम के लिए फॉरेक्स कर्ज जुटा सकेंगी। कंपनियां अप्रुवल रूट के जरिए इक्विटी होल्डर से फॉरेक्स कर्ज जुटा सकेंगी। कंपनियों को कम से कम 7 साल के लिए फॉरेक्स कर्ज लेना होगा। हालांकि विदेश में जुटाए गए फॉरेक्स कर्ज के प्री-पेमेंट पर रोक लगाई गई है। कर्ज से जुटाई गई पूंजी सब्सिडियरी और ग्रुप कंपनी को नहीं दी जा सकेगी।
आरबीआई ने ईसीबी के जरिए निवेश पर नेटवर्थ के 400 फीसदी की सीमा बरकरार रखी है। इससे पहले आरबीआई ने ईसीबी के जरिए निवेश पर नेटवर्थ के की सीमा 400 फीसदी से घटाकर 100 फीसदी तय की थी। साथ ही आरबीआई ने भारतीय नागरिक की विदेश में निवेश की गई पूंजी पर भी सफाई जारी की है। भारतीय नागरिक विदेश में पढ़ने के लिए 1.75 लाख डॉलर से ज्यादा नहीं भेज सकेंगे।
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