प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन का कहना है कि वित्त वर्ष 2014 में जीडीपी ग्रोथ 5.3 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं वित्त वर्ष 2014 में करेंट अकाउंट घाटा जीडीपी का 3.8 फीसदी रहने का अनुमान है। मार्च 2014 के अंत तक महंगाई दर 5.5 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं वित्त वर्ष 2014 में औसतन डब्ल्यूपीआई महंगाई दर 5 फीसदी से ज्यादा रहने का अनुमान है।
सी रंगराजन के मुताबिक वित्त वर्ष 2014 में कृषि ग्रोथ 4.8 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में व्यापार घाटा 18,500 करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में इंपोर्ट 49,470 करोड़ डॉलर, जबकि एक्सपोर्ट 30,970 करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में इंडस्ट्री ग्रोथ 2.7 फीसदी रहने का अनुमान है।
वित्त वर्ष 2014 में घरेलू सेविंग रेट जीडीपी का 31 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में निवेश की दर जीडीपी का 34.7 फीसदी रहने का अनुमान है। इस साल खरीफ और रबी की अच्छी फसल का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में चावल और गेहूं का उत्पादन बढ़ने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में अनाज का रिकॉर्ड उत्पादन होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में ऑयलसीड उत्पादन 3.25 करोड़ टन होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में कपास का उत्पादन 3.5 करोड़ बेल्स होने का अनुमान है।
सी रंगराजन का मानना है कि फॉरेक्स स्थिरता और डब्ल्यूपीआई महंगाई दर में कमी से आरबीआई पॉलिसी दरें घटा सकता है। खाने-पीने की ऊंची महंगाई दर के चलते रिटेल महंगाई और डब्ल्यूपीआई महंगाई में अंतर बढ़ा है। सरकार को एफडीआई नियमों में ढील देने की जरूरत है। वित्त वर्ष 2014 में एफडीआई इनफ्लो 2170 करोड़ डॉलर और एफआईआई इनफ्लो 270 करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है। फॉरेक्स मार्केट में स्थिरता लौट रही है। सरकार ने और कदम उठाए तो इनफ्लो 1000-1500 करोड़ डॉलर जा सकता है।
सरकार को पब्लिक सेक्टर में निवेश बढ़ाने का सुझाव दिया है। सरकार के उठाए गए कदमों का असर साल के अंत तक दिखेगा। वित्त वर्ष 2014 में इंपोर्ट बिल 1800 करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में सोना-चांदी का इंपोर्ट 4,000 करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है। सोने के इंपोर्ट में इस साल और कमी आने की उम्मीद है। इस साल एसयूयूटीआई के शेयरों को बेचने पर विचार किया जा सकता है।
सी रंगराजन ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ग्रोथ में दिक्कत आ सकती है। ऑयल, गैस उत्पादन शेयरिंग फॉर्मूले पर जल्द फैसला होगा। इंडस्ट्रियल सेक्टर में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अक्टूबर-मार्च में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ग्रोथ बढ़ने का अनुमान है। ऑटो इंडस्ट्री उत्पादन में कमी के दौर से बाहर आ रही है।
कोटक महिंद्रा बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट इंद्रनील पान का कहना है कि अर्थव्यवस्था में 6.3 फीसदी की ग्रोथ को हासिल कर पाना संभव नहीं है इसलिए ग्रोथ का अनुमान घटाया गया है। वित्त वर्ष 2014 के लिए जीडीपी ग्रोथ 4.5 फीसदी से 5.3 फीसदी के बीच रह सकती है।
अगर डीजल के दाम बढ़ाए जाते हैं तो महंगाई में बढ़ोतरी हो सकती है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद का महंगाई कम रहने का अनुमान वास्तविक नहीं लगता है। इस बार मानसून अच्छा रहने से कृषि सेक्टर की ग्रोथ अच्छी रह सकती है जिससे खाद्य उत्पादों के दाम नीचे आ सकते हैं और डब्ल्यूपीआई महंगाई दर में थोड़ी गिरावट देखी जा सकती है।
अगर फेड की तरफ से क्यूई3 कम होने की घोषणा होती है तो डॉलर रुपये में अतर बढ़ सकता है और रुपये में गिरावट बढ़ सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपया 67-68 के दायरे में रह सकता है। हालांकि अगर फेड हर महीने सिर्फ 5-10 अरब डॉलर की कटौती करते हैं तो बाजार पर शायद ज्यादा असर ना पड़े लेकिन अगर इससे ज्यादा लिक्विडिटी कम होती है तो बाजार अस्थिर हो सकता है और रुपये में भी गिरावट बढ़ सकती है।
for more Information Plz log on to www.rpshares.com
No comments:
Post a Comment