नतीजों का दौर शुरु हो चुका है और मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के नतीजों के साथ ऑयल एंड गैस सेक्टर के नतीजों की शुरुआत होगी। ऑयल एंड गैस सेक्टर में क्या रणनीति अपनाएं।
चौथी तिमाही में ऑयल कंपनियों की अंडर रिकवरी 37,000 करोड़ रुपये रह सकती है जो तीसरी तिमाही के मुकाबले बहुत थोड़ी ही कम हुई है। तीसरी तिमाही में कंपनियों की अंडर रिकवरी 40,000 करोड़ रुपये थी। इसका असर कंपनियों के नतीजों पर देखने को मिल सकता है।
वित्त वर्ष 2013 की चौथी तिमाही में एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी के नतीजे अच्छे रह सकते हैं। चौथी तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज के जीआरएम 10 डॉलर प्रति बैरल रह सकते हैं। इसके अलावा कंपनी के पेटकैम मार्जिन भी अच्छे रह सकते हैं। कंपनी का मुनाफा 5500 करोड़ रुपये के आसपास आ सकता है हालांकि कंपनी के मार्जिन पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है।
जनवरी-मार्च तिमाही में केर्न इंडिया के नतीजे सपाट रह सकते हैं। कंपनी का मुनाफा और आय स्थिर रहने का अनुमान है। अगर सरकार सब्सिडी शेयरिंग फार्मूले में बदलाव करती है तो ओएनजीसी पर दबाव देखने को मिल सकता है।
चौथी तिमाही नतीजों के आधार पर निवेशक ऑयल इंडिया, केर्न इंडिया, ओएनजीसी में निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा गैस कंपनियों में जीएसपीएल और पेट्रोनेट एलएनजी में निवेश किया जा सकता है।
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