क्यूई3 तीन अक्षरों के इस छोटे से शब्द ने दुनियाभर के बाजारों में बड़े डर का माहौल पैदा कर दिया है। क्यूई यानि क्वांटिटेटिव इजिंग-3। आशंका जताई जा रही है कि अच्छे आर्थिक आंकड़ों से अमेरिका में जिस तरह से रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं उसे देखते हुए फेडरल रिजर्व बॉन्ड खरीद प्रोग्राम में कमी कर सकता है। सभी की नजरें अब 17-18 सितंबर को होने वाले एफओएमसी की बैठक पर है जिसमें क्यूई3 को लेकर फैसले के आसार हैं।
लेकिन अगर अमेरिका में क्यूई3 घटा तो हमारे देश में कैसा असर होगा? क्या शेयर बाजार में गिरावट आएगी। किन शेयरों और सेक्टर पर होगा इसका असर? क्या रिकवरी के मोड में आया रुपया फिर से पस्त हो जाएगा और महंगाई की आग को क्या फिर से हवा मिल जाएगी, इन्हीं सब सवालों का जवाब जानने के लिए सीएनबीसी आवाज़ ने जानकारों से इस पर राय ली।
क्यूई इकोनॉमी को सहारा देने के लिए अमेरिकी फेड का तरीका है। इसके तहत यूएस फेड हर महीने 85 अरब डॉलर के बॉन्ड खरीदता है। 2014 के मध्य तक फेड की बॉन्ड खरीदारी खत्म करने की योजना है। इसके लिए आर्थिक आंकड़ों पर 17-18 सितंबर को एफओएमसी बैठक होने वाली है। बैठक में क्यू3 में कमी को लेकर कुछ फैसले संभव हैं। फेड ने 21 मई को पहली बार साल अंत तक क्यूई3 में कमी के संकेत दिए थे।
क्यूई3 में कमी हुई तो भारतीय शेयर में एफआईआई का निवेश कम होने की आशंका है। विकसित देशों में आर्थिक ग्रोथ सुस्त होने की आशंका है और भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स के एक्सपोर्ट पर असर संभव है।
क्यूई3 भारत के लिए अहम है क्योंकि कम फॉरेक्स रिजर्व, ऊंचे महंगाई दर, बढ़ते करेंट अकाउंट घाटे के चलते अर्थव्यवस्था पर दबाव देखा जाएगा। क्यूई3 में कमी से डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी संभव है। कमजोर रुपये से कमोडिटी बाजार पर भी असर होगा। ग्लोबल कमोडिटीज का भारत के डब्ल्यूपीआई में 35 फीसदी वेटेज है।
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से महंगाई भी बढ़ेगी। रुपया 10 फीसदी टूटा तो महंगाई दर में 0.8-1 फीसदी का उछाल देखा जा सकता है। रुपये के कमजोर होने से कच्चे तेल के दाम भी बढेंगे। इंपोर्टेड दाल, खाद्य तेल के दामों में बढ़ोतरी होगी।
ब्लू ओशन कैपिटल के फाउंडर और सीईओ निपुण मेहता का कहना है कि फेडरल रिजर्व द्वारा क्यूई3 में धीरे धीरे कमी करने की उम्मीद है। फेड के अचानक बहुत बड़ी मात्रा में पैसा निकालने की संभावना नहीं है। अमेरिका में आए बेरोजगारी के आंकड़े और ट्रैजरी यील्ड में बढ़ोतरी के चलते फेड के पास ज्यादा पैसा निकालने का मौका नहीं होगा। क्यूई3 कम होने की आशंका के चलते वैश्विक बाजारों की करेंसी में जो गिरावट आई उसको ध्यान में रखते हुए फेडरल रिजर्व ज्यादा सख्ती नहीं करेगा।
हालांकि क्यूई3 में कमी होती है तो भी बैंकिंग शेयरों में ज्यादा गिरावट नहीं आनी चाहिए क्योंकि आरबीआई ने इसकी तैयारी पहले ही कम की हुई है और करेंसी स्वॉप जैसे कई कदम उठाए हैं।
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