प्रधानमंत्री चीनी को डीकंट्रोल करने में तेजी चाहते हैं। हालांकि सीएनबीसी आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक चीनी डीकंट्रोल पर असमंजस बरकरार है। इसके रास्ते में कई अड़ंगे आ सकते हैं। गुरुवार को सीसीईए के एजेंडे में चीनी डीकंट्रोल का प्रस्ताव शामिल नहीं किया गया है।
सूत्रों का कहना है कि चीनी डीकंट्रोल का अंतिम प्रस्ताव फूड मिनिस्ट्री से कैबिनेट सेक्रेट्रिएट नहीं भेजा गया है। दरअसल वित्त मंत्रालय ने शुगर डीकंट्रोल के कुछ प्रस्तावों पर सफाई मांगी है। वित्त मंत्रालय ने चीनी पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के प्रस्ताव पर सफाई मांगी है।
सूत्रों के मुताबिक फूड मिनिस्ट्री ने डीकंट्रोल से बढ़ने वाली सब्सिडी को एक्साइज से बढ़ाने का सुझाव दिया है। वहीं वित्त मंत्रालय ने गन्ने का स्टेट एडवाइजरी प्राइस राज्यों पर छोड़ने पर चिंता जताई है। वित्त मंत्रालय को स्टेट एडवाइजरी प्राइस से चीनी के दाम बढ़ने का डर है। 14 मार्च को होने वाली सीसीईए की बैठक में इन सभी मुद्दों पर विचार हो सकता है।
हालांकि इंडियन शुगर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल अविनाश वर्मा का कहना है कि शुगर डीकंट्रोल को लेकर कोई अड़चन नजर नहीं आ रही है। मार्च महीने के अंत तक चीनी डीकंट्रोल पर फैसला आने की उम्मीद है। सरकार के फैसले से इंडस्ट्री को 3,000 करोड़ रुपये का फायदा होगा। लेवी कोटा के चलते शुगर इंडस्ट्री को 3,000 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ता है।
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सूत्रों का कहना है कि चीनी डीकंट्रोल का अंतिम प्रस्ताव फूड मिनिस्ट्री से कैबिनेट सेक्रेट्रिएट नहीं भेजा गया है। दरअसल वित्त मंत्रालय ने शुगर डीकंट्रोल के कुछ प्रस्तावों पर सफाई मांगी है। वित्त मंत्रालय ने चीनी पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के प्रस्ताव पर सफाई मांगी है।
सूत्रों के मुताबिक फूड मिनिस्ट्री ने डीकंट्रोल से बढ़ने वाली सब्सिडी को एक्साइज से बढ़ाने का सुझाव दिया है। वहीं वित्त मंत्रालय ने गन्ने का स्टेट एडवाइजरी प्राइस राज्यों पर छोड़ने पर चिंता जताई है। वित्त मंत्रालय को स्टेट एडवाइजरी प्राइस से चीनी के दाम बढ़ने का डर है। 14 मार्च को होने वाली सीसीईए की बैठक में इन सभी मुद्दों पर विचार हो सकता है।
हालांकि इंडियन शुगर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल अविनाश वर्मा का कहना है कि शुगर डीकंट्रोल को लेकर कोई अड़चन नजर नहीं आ रही है। मार्च महीने के अंत तक चीनी डीकंट्रोल पर फैसला आने की उम्मीद है। सरकार के फैसले से इंडस्ट्री को 3,000 करोड़ रुपये का फायदा होगा। लेवी कोटा के चलते शुगर इंडस्ट्री को 3,000 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ता है।
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