बजट से पहले बाजार में डर हावी हो गया था। हालांकि बजट के बाद बाजार की चाल मजबूत होने के आसार दिख रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय संकेतों से भी घरेलू बाजार में उछाल देखने को मिल रही है। लिहाजा अब दिग्गज जानकार मान रहे हैं कि मार्च महीना बाजार के लिए बेहतर साबित होगा।
प्रभुदास लीलाधर की ज्वाइंट एमडी अमीषा वोरा का कहना है कि अभी भले कुछ दिनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव रहेगा। लेकिन बाजार में इस बार नकदी की दिक्कत नहीं रहेगी। लिहाजा पिछले सालों के मुकाबले इस बार मार्च में बाजार की चाल बेहतर रहने की उम्मीद है। मौजूदा स्तरों पर बाजार में निवेश करने की सलाह है। अगर प्रमुख ब्याज दरों में कटौती हुई तो बाजार के लिए हालात और अच्छे होंगे।
अमीषा वोरा का मानना है कि अभी बाजार में रिटेल निवेशकों के आने में वक्त लग सकता है। बाजार की चाल पर कहें तो मध्यम अवधि के लिए ये खरीदारी का सही मौका है। अभी शेयरों में बिकवाली की बजाए तेजी का इंतजार करें। ऑटो शेयर ज्यादा भरोसेमंद नजर आ रहे हैं। साथ ही सरकारी और प्राइवेट बैंक के शेयरों में भी खरीदारी की जा सकती है। इस समय ऑटो और फाइनेंशियल शेयरों में ज्यादा एक्शन रहने वाला है।
ऑयल एंड गैस सेक्टर पर अमीषा वोरा का कहना है कि इस सेक्टर पर सब्सिडी का बोझ कम होने की उम्मीद है। ऐसे में ऑयल एंड गैस कंपनियों के आगे के दिन अच्छे रहने वाले हैं। ऑयल एंड गैस सेक्टर में केर्न इंडिया में निवेश करने की सलाह है। लेकिन पूरे सेक्टर की निवेश के लिहाज से बात करें अभी जोखिम बना रह सकता है। वहीं इंफ्रा और पावर शेयर की वैल्यूएशन काफी सस्ती नजर आ रही है। फिर भी इंफ्रा और पावर सेक्टर में अभी दबाव बना रहेगा। आईटी और एफएमसीजी में निवेश कम करने की सलाह है। एविएशन कंपनियों में भी सावधानी के साथ निवेश करने की सलाह है।
अमीषा वोरा के मुताबिक मारुति सुजुकी, आईसीआईसीआई बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में निवेश किया जा सकता है। साथ ही मौजूदा स्तर पर यूनाइटेड फॉस्फोरस पर दांव लगाया जा सकता है।
एएसके इंवेस्टमेंट मैनेजर्स के सीआईओ प्रतीक अग्रवाल का कहना है कि 19 मार्च को आने वाली क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई ब्याज दरों में कटौती कर सकता हैय़ हालांकि पिछली बार आरबीआई के दरों में कमी करने के बावजूद ज्यादा बैंकों ने ब्याज दरें नहीं घटाई लेकिन इस बार प्रमुख दरों में गिरावट होने के बाद बैंक अपनी ब्याज दरों में कटौती कर सकते हैं।
इस बार आरबीआई के दरें घटाने के बाद बैंक, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटो सेक्टर को फायदा मिल सकता है लेकिन इससे बाजार को कितना फायदा मिल पाएगा ये देखना जरूरी है।
प्रतीक अग्रवाल के मुताबिक इंफ्रा, रियल एस्टेट में ब्य़ाज दरों से ज्यादा कॉर्पोरेट गवर्नेंस का मुद्दा अहम है। जिन कंपनियों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस अच्छी है निवेशकों को उन्हीं शेयरों में निवेश करना चाहिए।
ब्याज दरें घटने के बाद भी ऑटो सेक्टर में गाड़ियों की बिक्री ज्यादा बढ़ने का अनुमान नहीं है। फरवरी में ऑटो बिक्री आंकड़ों में गिरावट आई है। अगले 1 साल तक ऑटो सेक्टर में मंदी के संकेत बने रहेंगे क्योंकि अर्थव्यवस्था 5 फीसदी से कम की ग्रोथ दिखा रही है। हालांकि अगर इस साल मानसून अच्छा रहता है तो जीडीपी में 1 फीसदी की बढ़त का अनुमान है।
देश में निर्यात आधारित कंपनियों को मुनाफा मिलने का अनुमान है क्योंकि रुपये की गिरावट बढ़ रही है। इसके अलावा उभरते देशों के बाजार सुधरने का भी भारतीय बाजारों को फायदा मिलेगा।
यूबीएस इंडिया के गौतम छाओछड़िया का कहना है कि बजट में वित्तीय मजबूती को लेकर वित्त मंत्री ने भरोसा दिया है। बजट के आसपास बाजार में आई गिरावट से अच्छे शेयरों में खरीदारी का मौका बना है। चौथी तिमाही के नतीजों से ही बाजार की आगे की चाल पर कुछ कहा जा सकता है। इस साल भारतीय बाजारों से 10 फीसदी तक के रिटर्न मिलने की उम्मीद है। फिलहाल आईटी सेक्टर में इंफोसिस में दांव लगाने का मौका दिखाई दे रहा है।
वहीं एंबिट कैपिटल के सीईओ एंड्र्यू हॉलैंड का कहना है कि बजट में ग्रोथ और करेंट अकाउंट घाटे को लेकर कोई सफाई नहीं आई है। साथ ही बाजार पर अमेरिका के कर्ज और इटली की राजनीतिक अस्थिरता का असर देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों का प्रदर्शन सबसे निराशाजनक रहने की उम्मीद है। भारतीय बाजारों के मुकाबले चीन के बाजार ज्यादा आकर्षक रहेंगे।
एंड्र्यू हॉलैंड के मुताबिक बैंक, रियल एस्टेट और चुनिंदा कैपिटल गुड्स कंपनियों के शेयरों में दांव लगाया जा सकता है। बाजार में तेजी के लिए सरकार की तरफ से पॉलिसी के मोर्चे पर और कदम उठाए जाने की जरूरत है।
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प्रभुदास लीलाधर की ज्वाइंट एमडी अमीषा वोरा का कहना है कि अभी भले कुछ दिनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव रहेगा। लेकिन बाजार में इस बार नकदी की दिक्कत नहीं रहेगी। लिहाजा पिछले सालों के मुकाबले इस बार मार्च में बाजार की चाल बेहतर रहने की उम्मीद है। मौजूदा स्तरों पर बाजार में निवेश करने की सलाह है। अगर प्रमुख ब्याज दरों में कटौती हुई तो बाजार के लिए हालात और अच्छे होंगे।
अमीषा वोरा का मानना है कि अभी बाजार में रिटेल निवेशकों के आने में वक्त लग सकता है। बाजार की चाल पर कहें तो मध्यम अवधि के लिए ये खरीदारी का सही मौका है। अभी शेयरों में बिकवाली की बजाए तेजी का इंतजार करें। ऑटो शेयर ज्यादा भरोसेमंद नजर आ रहे हैं। साथ ही सरकारी और प्राइवेट बैंक के शेयरों में भी खरीदारी की जा सकती है। इस समय ऑटो और फाइनेंशियल शेयरों में ज्यादा एक्शन रहने वाला है।
ऑयल एंड गैस सेक्टर पर अमीषा वोरा का कहना है कि इस सेक्टर पर सब्सिडी का बोझ कम होने की उम्मीद है। ऐसे में ऑयल एंड गैस कंपनियों के आगे के दिन अच्छे रहने वाले हैं। ऑयल एंड गैस सेक्टर में केर्न इंडिया में निवेश करने की सलाह है। लेकिन पूरे सेक्टर की निवेश के लिहाज से बात करें अभी जोखिम बना रह सकता है। वहीं इंफ्रा और पावर शेयर की वैल्यूएशन काफी सस्ती नजर आ रही है। फिर भी इंफ्रा और पावर सेक्टर में अभी दबाव बना रहेगा। आईटी और एफएमसीजी में निवेश कम करने की सलाह है। एविएशन कंपनियों में भी सावधानी के साथ निवेश करने की सलाह है।
अमीषा वोरा के मुताबिक मारुति सुजुकी, आईसीआईसीआई बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में निवेश किया जा सकता है। साथ ही मौजूदा स्तर पर यूनाइटेड फॉस्फोरस पर दांव लगाया जा सकता है।
एएसके इंवेस्टमेंट मैनेजर्स के सीआईओ प्रतीक अग्रवाल का कहना है कि 19 मार्च को आने वाली क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई ब्याज दरों में कटौती कर सकता हैय़ हालांकि पिछली बार आरबीआई के दरों में कमी करने के बावजूद ज्यादा बैंकों ने ब्याज दरें नहीं घटाई लेकिन इस बार प्रमुख दरों में गिरावट होने के बाद बैंक अपनी ब्याज दरों में कटौती कर सकते हैं।
इस बार आरबीआई के दरें घटाने के बाद बैंक, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटो सेक्टर को फायदा मिल सकता है लेकिन इससे बाजार को कितना फायदा मिल पाएगा ये देखना जरूरी है।
प्रतीक अग्रवाल के मुताबिक इंफ्रा, रियल एस्टेट में ब्य़ाज दरों से ज्यादा कॉर्पोरेट गवर्नेंस का मुद्दा अहम है। जिन कंपनियों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस अच्छी है निवेशकों को उन्हीं शेयरों में निवेश करना चाहिए।
ब्याज दरें घटने के बाद भी ऑटो सेक्टर में गाड़ियों की बिक्री ज्यादा बढ़ने का अनुमान नहीं है। फरवरी में ऑटो बिक्री आंकड़ों में गिरावट आई है। अगले 1 साल तक ऑटो सेक्टर में मंदी के संकेत बने रहेंगे क्योंकि अर्थव्यवस्था 5 फीसदी से कम की ग्रोथ दिखा रही है। हालांकि अगर इस साल मानसून अच्छा रहता है तो जीडीपी में 1 फीसदी की बढ़त का अनुमान है।
देश में निर्यात आधारित कंपनियों को मुनाफा मिलने का अनुमान है क्योंकि रुपये की गिरावट बढ़ रही है। इसके अलावा उभरते देशों के बाजार सुधरने का भी भारतीय बाजारों को फायदा मिलेगा।
यूबीएस इंडिया के गौतम छाओछड़िया का कहना है कि बजट में वित्तीय मजबूती को लेकर वित्त मंत्री ने भरोसा दिया है। बजट के आसपास बाजार में आई गिरावट से अच्छे शेयरों में खरीदारी का मौका बना है। चौथी तिमाही के नतीजों से ही बाजार की आगे की चाल पर कुछ कहा जा सकता है। इस साल भारतीय बाजारों से 10 फीसदी तक के रिटर्न मिलने की उम्मीद है। फिलहाल आईटी सेक्टर में इंफोसिस में दांव लगाने का मौका दिखाई दे रहा है।
वहीं एंबिट कैपिटल के सीईओ एंड्र्यू हॉलैंड का कहना है कि बजट में ग्रोथ और करेंट अकाउंट घाटे को लेकर कोई सफाई नहीं आई है। साथ ही बाजार पर अमेरिका के कर्ज और इटली की राजनीतिक अस्थिरता का असर देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों का प्रदर्शन सबसे निराशाजनक रहने की उम्मीद है। भारतीय बाजारों के मुकाबले चीन के बाजार ज्यादा आकर्षक रहेंगे।
एंड्र्यू हॉलैंड के मुताबिक बैंक, रियल एस्टेट और चुनिंदा कैपिटल गुड्स कंपनियों के शेयरों में दांव लगाया जा सकता है। बाजार में तेजी के लिए सरकार की तरफ से पॉलिसी के मोर्चे पर और कदम उठाए जाने की जरूरत है।
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