एफआईपीबी ने मलेशिया की एयरलाइंस एयर एशिया और टाटा संस के ज्वाइंट वेंचर में 49 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दी है। एयर एशिया-टाटा जेवी लाइसेंस मिलने के बाद ऑपरेशंस शुरू करेगी।
ज्वाइंट वेंचर में टाटा संस के अलावा अरुण भाटिया भी हिस्सेदार होंगे। जेवी में टाटा संस का 30 फीसदी और अरुण भाटिया का 21 फीसदी हिस्सा होगा। माना जा रहा है कि जेवी में 80 करोड़ रुपये का शुरुआती निवेश किया जाएगा।
एयर एशिया के मुताबिक भारत में लो कॉस्ट एयरलाइन के तौर पर जेवी बनाया जाएगा, जिसका फोकस टीयर-2 और टीयर 3 इलाकों पर होगा। नई कंपनी का नाम एयरएशिया होगा और इसका ऑपरेशन चेन्नई से किया जाएगा।
एयर एशिया रोजाना 25 देशों में 400 उड़ानें भरती हैं। 2010 तक कंपनी के पास 92 विमान थे। कंपनी ने 200 नए एयरबस विमान ऑर्डर किया हुआ है। एयर एशिया दुनिया की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन बनने की राह पर है।
जेट एयरवेज-एतिहाद डील और एयर एशिया के भारत में आने से एविएशन सेक्टर पर फोकस बढ़ गया है।
एविएशन सेक्टर के जानकार और स्पाइसजेट के फाउंडर अजय सिंह का कहना है कि विदेशी एयरलाइंस के भारत में आने से घरेलू एयरलाइंस के लिए मुकाबला तो बढ़ेगा लेकिन एविएशन इंडस्ट्री में सुधार भी होगा।
अजय सिंह के मुताबिक जेट एयरवेज और एतिहाद की डील जल्द होने की उम्मीद है और इसके बाद जेट एयरवेज के शेयर में अच्छा उछाल देखा जा सकता है।
अजय सिंह के मुताबिक किंगफिशर एयरलाइंस के दोबारा उड़ान भरने के लिए काफी मुश्किलें सामने हैं। विजय माल्या को कंपनी में जल्द ही बड़ी पूंजी डालनी होगी वर्ना कंपनी के लिए दोबारा खड़ा होना काफी चुनौती भरा होगा। कंपनी की हालत खराब होना पूरी एविएशन इंडस्ट्री के लिए अच्छा नहीं है।
अजय सिंह के मुताबिक भारत में विमान उड़ाने का खर्चा काफी ज्यादा है। एयर ट्रैफिक फ्यूल के महंगे होने के चलते विश्व के अन्य देशों के मुकाबले भारत में विमान उडा़ना करीब 50 फीसदी महंगा है।
विमानन मंत्री अजित सिंह का कहना है कि टाटा और एयर एशिया के जेवी में एफडीआई नियमों को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। इसमें छोटी मोटी प्रक्रिया संबंधी दिक्कत हो सकती है लेकिन इस जेवी के पूरा होने में कोई समस्या नहीं आनी चाहिए।
आईएमसी कमेटी ऑन एविएशन और एयरपोर्ट्स के चैयरमैन जितेंद्र भार्गव का कहना है कि एफआईपीबी का आज का कदम एविएशन इंडस्ट्री और ग्राहकों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। भारतीय एविएशन इंडस्ट्री को सस्ते किरायों वाली एयरलाइन कंपनी की बहुत जरूरत है।
एयर एशिया के आने से किरायों में कमी हुई तो ग्राहकों के लिए बहुत अच्छी खबर होगी। एविएशन इंडस्ट्री में पिछले 1 साल से मोनोपली का माहौल बना हुआ था जिससे सफर करने वाले यात्रियों का संख्या में कमी आई है।
एयर एशिया-टाटा ग्रुप ज्वाइंट वेंचर में प्रोमोटर अरुण भाटिया का कहना है कि रेगुलेटरों की मंजूरी के बाद एयरलाइंस शुरू होने में 6 महीने लगेंगे। आम आदमी को कम से कम दाम पर सर्विस देने की कोशिश की जाएगी। एयरलाइंस ज्वाइंट वेंचर में रतन टाटा के चेयरमैन बनने की उम्मीद है।
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