देश में कर्मचारियों और मैनेजमेंट के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ऑटो कंपनियों में हड़ताल के बाद अब बिड़ला समूह की सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक में भी हड़ताल हो गई है। मुद्दा वही है जिसके बिगड़ने की वजह से मारुति में हिंसा की नौबत आ गई थी, यानी कॉन्ट्रैक्ट लेबर।
अल्ट्राटेक सीमेंट की महाराष्ट्र के आवरपुर यूनिट में 26 फरवरी से काम ठप हो गया है। कंपनी के करीब 2,200 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। पिछले 3 महीने से कर्मचारी सांकेतिक भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी ने सीमेंट वेज बोर्ड का उल्लंघन किया है। मैनेजमेंट वेज बोर्ड के मुताबिक सैलरी नहीं बढ़ा रहा और कर्मचारियों को परमानेंट भी नहीं कर रहा है।
कंपनी में अभी 2,200 कर्मचारी हैं जिनमें से केवल 350 कर्मचारी ही परमानेंट हैं। 20-25 साल की नौकरी के बाद भी कॉन्ट्रैक्ट लेबर को केवल 210 रुपये रोज दिए जा रहे हैं। दरअसल 2004 में बिड़ला ग्रुप ने लार्सन एंड टूब्रो से आवरपुर प्लांट खरीदा था। तब कंपनी में 850 परमानेंट कर्मचारी थे जिनकी संख्या अब घटकर केवल 350 रह गई है।
सीमेंट वेज बोर्ड के मुताबिक सीमेंट कंपनी में परमानेंट कर्मचारी ही होने चाहिए। यूनियन का कहना है कि कम से कम 500 और कर्मचारी परमानेंट किए जाने चाहिए और साथ ही कॉन्ट्रैक्ट लेबर की सैलरी बढ़े। लेकिन इस मामले में मैनेजमेंट कुछ भी करने को तैयार नहीं है। यूनियन का ये भी आरोप है कि रीजन लेबर कमिश्नर भी मैनेजमेंट का पक्ष ले रहा है।
महाराष्ट्र के इस प्लांट की क्षमता करीब 36 लाख टन सालाना है। और कंपनी 350 करोड़ रुपये सालाना मुनाफा कमाती है। लेकिन हड़ताल के कारण कंपनी को अब भारी नुकसान हो सकता है। सीएनबीसी आवाज़ ने कंपनी के मैनेजमेंट से भी बात करने की कोशिश की लेकिन कंपनी की ओर से कोई बात करने को उपलब्ध नहीं था।
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अल्ट्राटेक सीमेंट की महाराष्ट्र के आवरपुर यूनिट में 26 फरवरी से काम ठप हो गया है। कंपनी के करीब 2,200 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। पिछले 3 महीने से कर्मचारी सांकेतिक भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी ने सीमेंट वेज बोर्ड का उल्लंघन किया है। मैनेजमेंट वेज बोर्ड के मुताबिक सैलरी नहीं बढ़ा रहा और कर्मचारियों को परमानेंट भी नहीं कर रहा है।
कंपनी में अभी 2,200 कर्मचारी हैं जिनमें से केवल 350 कर्मचारी ही परमानेंट हैं। 20-25 साल की नौकरी के बाद भी कॉन्ट्रैक्ट लेबर को केवल 210 रुपये रोज दिए जा रहे हैं। दरअसल 2004 में बिड़ला ग्रुप ने लार्सन एंड टूब्रो से आवरपुर प्लांट खरीदा था। तब कंपनी में 850 परमानेंट कर्मचारी थे जिनकी संख्या अब घटकर केवल 350 रह गई है।
सीमेंट वेज बोर्ड के मुताबिक सीमेंट कंपनी में परमानेंट कर्मचारी ही होने चाहिए। यूनियन का कहना है कि कम से कम 500 और कर्मचारी परमानेंट किए जाने चाहिए और साथ ही कॉन्ट्रैक्ट लेबर की सैलरी बढ़े। लेकिन इस मामले में मैनेजमेंट कुछ भी करने को तैयार नहीं है। यूनियन का ये भी आरोप है कि रीजन लेबर कमिश्नर भी मैनेजमेंट का पक्ष ले रहा है।
महाराष्ट्र के इस प्लांट की क्षमता करीब 36 लाख टन सालाना है। और कंपनी 350 करोड़ रुपये सालाना मुनाफा कमाती है। लेकिन हड़ताल के कारण कंपनी को अब भारी नुकसान हो सकता है। सीएनबीसी आवाज़ ने कंपनी के मैनेजमेंट से भी बात करने की कोशिश की लेकिन कंपनी की ओर से कोई बात करने को उपलब्ध नहीं था।
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