सोने की कीमतों में भारी गिरावट का असर गोल्ड फाइनेंस कंपनियों और गोल्ड लोन देने वाले बैंकों के शेयरों पर दिखा है। निवेशकों में चिंता है कि सोना सस्ता होने के बाद बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी के लोन डिफॉल्ट बढ़ जाएगा।
सोने में गिरावट आने के बाद बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी की मुश्किलें बढ़ी हैं। बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी के एसेट क्वॉलिटी पर दबाव आया है।
बैंक और गोल्ड एनबीएफसी मार्जिन रखकर गोल्ड लोन देती हैं, ताकि दाम कम होने के बाद डिफॉल्ट होने पर सोना बेचकर लोन वसूल किया जा सके। लेकिन, सोने के टूटने से बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी का मार्जिन कम हुआ है। सोने में और गिरावट आने पर ग्राहकों के पास लोन वापस करने का कारण नहीं रहता है।
सबसे ज्यादा असर उन बैंकों पर दिखेगा जिनके कुल पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन का हिस्सा ज्यादा है। खासतौर पर दक्षिण भारतीय बैंक काफी गोल्ड लोन देते हैं।
गोल्ड लोन पर ब्याज एक साथ रीपेमेंट के वक्त लिया जाता है और अगर सोने के दाम घटे तो लोन की रिकवरी मुश्किल हो जाती है। बैंकों और गोल्ड एनबीएफसी को अब अपनी रणनीति बदलनी होगी। सोने में गिरावट का मंथली गोल्ड स्कीम पर पर ज्यादा असर नहीं होगा।
मुथूट फाइनेंस और मन्नापुरम फाइनेंस चौथी तिमाही में घाटे में आ सकते हैं। अगर कंपनियों को सोना बेचना पड़े तो उनके मार्जिन पर दबाव दिखेगा।
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