Thursday, February 28, 2013

कैसा रहा कमोडिटी बाजार के लिए बजट 2013:

वित्त मंत्री ने कमोडिटी वायदा पर ट्रांजैक्शन टैक्स लगा दिया है। कमोडिटी वायदा के नॉन-एग्री कमोडिटी कारोबार पर 0.01 फीसदी ट्रांजैक्शन टैक्स लगाया गया है।

हालांकि करेंसी वायदा में एफआईआई निवेश को इजाजत दी गई है। लेकिन एक बड़ा मसला गोल्ड इंपोर्ट, जिसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे, वित्त मंत्री ने इसका जिक्र तक नहीं किया। हालांकि एग्रीकल्चर और वेयरहाउंसिग सेक्टर पर वित्त मंत्री ने जोर जरूर दिया है।

बजट में कृषि कर्ज का लक्ष्य बढ़ाकर 7 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। नाबार्ड को वेयरहाउसिंग के लिए 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया जाएगा। एग्री रिसर्च के लिए 3,415 करोड़ रुपये का आवंटन किया जाएगा। वहीं पूर्वी भारत में खेती के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

वित्त मंत्री ने कृषि मंत्रालय को 27,049 करोड़ रुपये का आवंटन करने का ऐलान किया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 9,954 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। नेशनल फूड सिक्योरिटी के लिए अलग से 10,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है।

एमसीएक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीकांत जावलगेकर का कहना है कि नॉन-एग्री कमोडिटी पर सीटीटी लगाने का फैसला भेदभावपूर्ण है। वित्त मंत्री को सीटीटी लगाने का फैसला करेंसी और इंटरेस्ट रेट जैसे सभी डेरिवेटिव पर करना चाहिए था।

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बजट: क्या हुआ सस्ता, क्या हुआ महंगा:

बजट के बाद सब यही जानना चाहते है कि क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा। एयर कंडीशन माहौल में फिल्में देखने और खाने के शौकीन लोगों के लिए बुरी खबर है, क्योंकी वित्त मंत्री ने इस पर सर्विस टैक्स बढ़ाने का ऐलान किया है।

विदेशी कारों और मोटरसाइकिलों के शौकीन लोगों के लिए भी बुरी खबर है। टैक्सी के अलावा सभी एसयूवी पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है, यानि अब एसयूवी के दाम भी बढ़ेंगे। 1 करोड़ रुपये से महंगे घर पर भी 1 फीसदी टीडीएस लगेगा।

इसके अलावा आयातित सेट टॉप बॉक्स भी महंगे हो गए हैं। सिगरेट और सिगार के लिए भी अब ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। 2000 रुपये से ज्यादा की कीमत वाले मोबाइल पर भी शुल्क 1 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी हो गई है।

वहीं, रेडीमेड कपड़े और चमड़े का सामान सस्ता हो जाएगा। सिंगल स्क्रीन थिएटर और वोकेशनल कोर्स पर सर्विस टैक्स नहीं लगेगा, यानि ये सेवाएं सस्ती हो जाएंगी।

एसटीटी घटने की वजह से शेयरों की खरीद-फरोख्त सस्ती हो जाएगी। इसके अलावा म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन के लिए भी पहले के मुकाबले कम पैसे देने होंगे।

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बाजार को रास नहीं आया बजट, 1.5% टूटे:

बजट से बाजार को निराशा ही हाथ लगी। एसटीटी में थोड़ी कटौती तो जरूर की गई, लेकिन अमीरों और कॉरपोरेट्स पर टैक्स बोझ बढ़ा। सीटीटी ने भी बाजार का मूड खराब किया।

वित्त वर्ष 2014 के लिए वित्तीय घाटे का लक्ष्य 4.8 फीसदी रखा गया, लेकिन सरकार ने घाटा कैसे घटेगा इस पर रोशनी नहीं डाली। साथ ही, विकास को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे इस पर भी कोई सफाई नहीं आई।

लेकिन, बाजार को झटका लगा एफआईआई के टीआरसी नियमों में बदलाव से। साथ ही, अनलिस्टेड कंपनियों के शेयरों के बायबैक पर 20 फीसदी का टैक्स लगने से भी एफआईआई निराश हुए।

सेंसेक्स 291 अंक गिरकर 18861 और निफ्टी 104 अंक गिरकर 5693 पर बंद हुए। निफ्टी मिडकैप 4.5 फीसदी लुढ़का। बीएसई स्मॉलकैप 2 फीसदी टूटा। बाजार में करीब 4 लाख करोड़ का रिकॉर्ड टर्नओवर रहा।

पावर शेयर 4.25 फीसदी लुढ़के। बैंक, कैपिटल गुड्स, मेटल, पीएसयू, रियल्टी शेयर 3.5-2.7 फीसदी टूटे। ऑयल एंड गैस, ऑटो, हेल्थकेयर, एफएमसीजी शेयरों में 1.6-0.4 फीसदी की गिरावट आई।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में करीब 1 फीसदी की तेजी आई। आईटी शेयर 0.5 फीसदी मजबूत हुए। तकनीकी शेयरों में हल्की बढ़त दिखी।

बाजार की चाल

बजट के पहले बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से भी तेजी के संकेत मिलने से घरेलू बाजारों का जोश बढ़ा। खुलते ही बाजार ने रफ्तार पकड़ी और निफ्टी 5850 के करीब पहुंचा। सेंसेक्स 170 अंक चढ़ा।

कारोबार के पहले 2 घंटे तक बाजारों ने बढ़त बनाए रखी। बाजार की नजरें वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बजट भाषण पर टिकी थी। लेकिन, बजट भाषण शुरू होने के साथ बाजार धीरे-धीरे मजबूती गंवाते चले गए।

बजट में कुछ खास हाथ न लगने से बाजार में निराशा नजर आई और उतार-चढ़ाव भरा कारोबार रहा। दोपहर 1 बजे के बाद बाजारों ने नीचे का रुख किया और निफ्टी 5800 के नीचे फिसला। मजबूत यूरोपीय संकेत भी बाजार को नहीं संभाल पाए।

बाजार लगातार मजबूती गंवाते चले गए। नए बजट में टीआरसी नियमों में बदलाव किए जाने की वजह से बाजार में घबराहट फैल गई। नए नियमों के मुताबिक डीटीएए के तहत टैक्स छूट पाने के लिए टीआरसी काफी नहीं है।

टीआरसी नियमों में फेरबदल के बाद जिन देशों के साथ भारत का डीटीएए करार है, उनके यहां से आने वाले निवेश पर टैक्स लग सकता है। भारत में सबसे ज्यादा एफआईआई निवेश मॉरिशस से आता है।

साथ ही, बजट में अनलिस्टेड कंपनियों के शेयरों के बायबैक पर 20 फीसदी का अंतिम विदहोल्डिंग टैक्स लगाए जाने का ऐलान हुआ है। इसका फिर से एफआईआई निवेश पर असर पड़ेगा।

सेंसेक्स 350 अंक से ज्यादा टूटकर 19000 के नीचे चला गया। निफ्टी भी 125 अंक लुढ़कर 5700 के नीचे फिसला। 27 नवंबर 2012 के बाद पहली बार निफ्टी 5700 के नीचे पहुंचा। आखिरी चंद मिनटों में बाजार थोड़ा संभले।


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आम आदमी को थोड़ी राहत, अमीरों पर ज्यादा टैक्स:

बजट में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आम आदमी को कोई राहत नहीं दी है। बजट में टैक्स दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है और ये पहले की तरह ही बनी रहेंगी।

2 से 5 लाख रुपये तक की आमदनी वालों पर 10 फीसदी का आयकर लागू है। 5 लाख से 10 लाख रुपये तक की आमदनी वालों को 20 फीसदी की दर से आयकर देना होता है। 10 लाख से 30 लाख रुपये तक की आमदनी वालों को 30 फीसदी की दर से आयकर अदा करना होता है।

2 से 5 लाख रुपये की आय वाले लोगों को 2000 रुपये का टैक्स क्रेडिट मिलेगा। वित्त मंत्री ने अमीरों पर सुपर रिच टैक्स का ऐलान किया है। सुपर रिच टैक्स के दायरे में 42,800 लोग आएंगे।

1 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई पर 10 फीसदी का सरचार्ज लगाया जाएगा। सरचार्ज 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई वाली कंपनियों पर 10 फीसदी का सरचार्ज लगाया जाएगा। ये 1 साल तक लागू रहेगा।

इसके अलावा 50,000 लाख से ज्यादा कीमत वाली अचल संपत्ति के ट्रांसफर पर 1 फीसदी की दर से टीडीएस लगेगा। हालांकि कृषि की जमीन पर कोई टीडीएस नहीं लगेगा।

नए नियमों के तहत 2 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगेगा जबकि 5 लाख रुपये तक की आय पर 28,000 रुपये का टैक्स लगेगा। 10 लाख रुपये तक की आय वालों को 1.3 लाख रुपये का टैक्स अदा करना होगा। इसके अलावा 20 लाख रुपये की आय वालों को 4.3 लाख रुपये का टैक्स देना होगा।

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बजट: सरकार को घाटे की चिंता, ग्रोथ की फ्रिक नहीं:

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने बजट भाषण में विदेशी निवेश बढ़ाने पर जोर देने की बात कही है। वित्त मंत्री ने वित्तीय घाटे से ज्यादा करेंट अकाउंट घाटे को लेकर चिंता जताई है। सोने और कोयले के आयात के कारण करेंट अकाउंट ज्यादा बढ़ रहा है। लिहाजा करेंट अकाउंट घाटे को कम करने के लिए विदेशी निवेश बढ़ाने के अलावा कोई उपाय नहीं है। करेंट अकाउंट घाटा पूरा करने के लिए 2 साल में 7,500 करोड़ डॉलर की जरूरत होगी।

वित्त वर्ष 2014 में वित्तीय घाटा 4.8 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2013 के लिए वित्तीय घाटे का लक्ष्य 5.2 फीसदी तय किया गया है। वित्त वर्ष 2014 में राजस्व घाटे का लक्ष्य 3.3 फीसदी तय किया गया है। वित्त वर्ष 2013 में राजस्व घाटा 3.9 फीसदी रहने का अनुमान है। सरकार ने टैक्स रिफॉर्म कमीशन बनाने का ऐलान किया है।

वित्त मंत्री ने महंगाई पर चौतरफा काबू पाने की जरूरत बताई है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। महंगाई दर को काबू करने के लिए खाद्य आपूर्ति दुरुस्त करने पर फोकस किया जाएगा। सरकार के उठाए गए कदमों से कोर महंगाई दर 4.5 फीसदी पर लाने में सफल रहेंगे।

वित्त मंत्री ने माना कि वित्त वर्ष 2013 का योजनागत खर्च ज्यादा था। वित्त वर्ष 2014 में योजनागत खर्च 5.65 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जोकि वित्त वर्ष 2013 से 30 फीसदी ज्यादा है। वित्त वर्ष 2014 में बच्चों की योजनाओं के लिए 77,236 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। 6 एम्स जैसे अस्पताल बनाने के लिए 16,500 करोड़ रुपये दिए जाने का प्रस्ताव है। मेडिकल शिक्षा और रिसर्च के लिए 4,700 करोड़ रुपये आवंटित किया जाएगा।

मनरेगा के लिए 33,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। सर्व शिक्षा अभियान पर 27,258 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। वित्त वर्ष 2014 में मिड-डे मील के लिए 13,215 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए 37,300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

पी चिदंबरम ने वित्त वर्ष 2014 में कृषि मंत्रालय को 27,049 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है। साथ ही छोटे किसानों के लिए ब्याज पर छूट जारी करने का फैसला किया गया है। फूड सिक्योरिटी के लिए 2,250 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। सिंचाई योजनाओं के लिए 5,387 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कृषि कर्ज के लिए 7 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने का लक्ष्य है।

वित्त मंत्री ने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2014 में रक्षा मंत्रालय को 2.03 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। वहीं अगले कुछ महीनों में जीएसटी का ड्राफ्ट बिल आने की उम्मीद है। बजट में 2007 से बकाया सर्विस टैक्स वालों के लिए आम माफी योजना लागू की जाएगी।

वित्त मंत्री पी चिदंबरम का कहना है कि अर्थव्यवस्था में सुधार लाने की सरकार लगातार कदम उठाती रहेगी।

पी चिदंबरम के मुताबिक करंट अकाउंट घाटा को काबू करने के लिए वित्तीय घाटे को कम करने से ज्यादा बड़ी चुनौती है। करंट अकाउंट घाटे को कम करने के लिए निर्यात को बढ़ावा देने की जरूरत है।

सरकार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कदम उठागी। पी चिदंबरम का कहना है कि जीडीपी दर 6 फीसदी से ऊपर जाने के बाद ही अर्थव्यवस्था में रिकवरी की शुरुआत समझना सही होगा।

पी चिदंबरम ने कहा है कि सेक्शन 90ए में संशोधन किया गया है, जिसके बाद डीटीएए के तहत टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए टीआरसी नाकाफी होगा। डीटीएए का फायदा लेने के लिए बेनिफीशियल ओनर का सबूत देना होगा।

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अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में जीडीपी दर 4.5%:

चाहे सरकार को अर्थव्यवस्था पर भरोसा हो, लेकिन मंदी के संकेत साफ दिखने लगे हैं। वित्त वर्ष 2013 की तीसरी तिमाही में जीडीपी दर 4.5 फीसदी रही है, जो 15 तिमाहियों में सबसे कम है।

पिछले साल अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में जीडीपी दर 6 फीसदी रही थी। वहीं, वित्त वर्ष 2013 की दूसरी तिमाही में जीडीपी दर 5.3 फीसदी रही थी।

पिछले साल के मुकाबले वित्त वर्ष 2013 की तीसरी तिमाही में माइनिंग सेक्टर ग्रोथ -2.6 फीसदी से घटकर -1.4 फीसदी रही। कंस्ट्रक्शन सेक्टर ग्रोथ 6.9 फीसदी से घटकर 5.8 फीसदी रही।

साल-दर-साल आधार पर अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर ग्रोथ 7.7 फीसदी से घटकर 4.5 फीसदी रही। वहीं, उद्योग की ग्रोथ 2.6 फीसदी से बढ़कर 3.3 फीसदी रही।

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डॉलर के मुकाबले रुपया 1% लुढ़का:

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे गिरकर 54.37 पर बंद हुआ है। बुधवार को रुपया 53.87 के स्तर पर पहुंचा था।

बजट में बड़े ऐलान होने की उम्मीद से रुपये ने मजबूती के साथ शुरुआत की थी और 53.68 पर खुला था। लेकिन, टीआरसी नियमों में बदलाव के बाद एफआईआई पर टैक्स लगने की आशंका से रुपया 54.48 तक टूटा।

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U.S. Stocks Fluctuate After GDP, Jobless Claims Reports:

U.S. stocks were little changed, with the Standard & Poor’s 500 Index poised for a four-month rally, as the economy grew less than forecast at the end of 2012 and jobless claims fell more than estimated last week.
Limited Brands Inc. (LTD), the owner of Victoria’s Secret chain, rose 3.1 percent after profit jumped. J.C. Penney Co. (JCP) tumbled 19 percent after saying its net loss widened to $552 million. Sears Holdings Corp. (SHLD), the retailer controlled by hedge-fund manager Edward Lampert, slumped 5.9 percent after posting a fourth- quarter loss that was larger than it forecast.

The S&P 500 (SPX) rose 0.1 percent to 1,517.13 at 11:04 a.m. in New York. The index has risen 1.3 percent this month. The Dow Jones Industrial Average added 2.27 points, or less than 0.1 percent, to 14,077.64. The measure is less than 1 percent away from its October 2007 (INDU) record. Trading in S&P 500 companies was about 20 percent below the 30-day average at this time of day.
“There were no real surprises here,” E. William Stone, chief investment strategist at PNC Wealth Management in Philadelphia, said in a telephone interview. His firm manages about $115 billion. “The economic numbers tell you that the pace of recovery is still sluggish. But they also give you signs that the recovery may be more durable.”
Gross domestic product grew at a 0.1 percent annual rate, up from a previously estimated 0.1 percent drop, revised figures from the Commerce Department showed. Economists predicted a 0.5 percent gain. Jobless claims fell to 344,000 in the week ended Feb. 23. The median forecast called for 360,000 applications. Business activity in the U.S. unexpectedly expanded in February at the fastest pace in almost a year.

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European Stocks Rise After Draghi Stimulus Comments:

European stocks climbed, with the benchmark index heading for its ninth straight monthly gain, as European Central Bank President Mario Draghi and Federal Reserve Chairman Ben S. Bernanke signaled they would maintain monetary support measures.
Bayer AG (BAYN) increased to the highest price in more than four weeks after saying sales will rise 4 percent to 5 percent this year. Telefonica (TEF) SA added 1.4 percent as Spain’s biggest phone company reported fourth-quarter earnings that beat analysts’ estimates. Royal Bank of Scotland Plc slid to its lowest price this year after posting a wider full-year loss.

The Stoxx Europe 600 Index gained 0.7 percent to 289.04 at 3:59 p.m. in London, extending its advance this month to 0.7 percent, for its longest monthly winning streak since 1997. The benchmark has risen 3.4 percent this year as U.S. lawmakers agreed on a budget avoiding automatic fiscal changes that had threatened to push the world’s biggest economy into recession.
“Thanks to a strong mix of positive business results and signals of central banks remaining expansive, the upward trend on equity markets is strengthened and may continue,” said Daniel Gschwend, portfolio manager at Diem Client Partner AG in Zurich, which oversees more than 1 billion Swiss francs ($1.08 billion) in assets. “Looking at this long winning streak, however, I expect a substantial correction will soon be needed.”

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India to tax rich, luxury cars:

India unveiled plans to increase taxes on the rich and luxury cars in a bid to increase revenue as a slowdown in growth makes it harder for Asia's third largest economy to plug a yawning budget deficit.
Finance Minister P. Chidambaram said he had no choice but to impose a 10% tax surcharge for one year on taxable income of more than 10 million rupees, or about $186,000. Some 42,800 taxpayers would be affected, he said.

"When I need to raise resources, who can I go to except those who are relatively well placed in society?" he said in a speech to parliament Wednesday.
Chidambaram doubled an existing surcharge on some domestic firms to 10%. Foreign companies that already pay a higher corporate tax rate will face a new surcharge of 5%, up from 2% at present.


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Wednesday, February 27, 2013

बजट पर निर्भर बाजार; बढ़ेगा एफआईआई निवेश:

पिछले कई दिनों से बाजार में असमंजस भरी स्थिति बनी हुई है। कभी विदेशी संकेतों के असर से बाजार टूटा है, तो कभी बजट ऐलानों के अनुमानों से बाजार में डर हावी हुआ। लिहाजा दिग्गज जानकार मान रहे हैं कि बाजार पूरी तरह बजट पर निर्भर हो गया है। बजट के बाद बाजार की सही तस्वीर सामने आ पाएगी।

अमेरिकी फेड की वजह से बाजार में गिरावट देखने को मिली है। अमेरिकी फेड 6-8 महीने के लिए नकदी बनाए रखेगा। वहीं बजट के बाद भारतीय बाजारों में थोड़ी बढ़त देखने को मिल सकती है। फिलहाल बाजार में गिरावट अस्थायी है और निवेश के पहले लोगों को बजट का इंतजार करना चाहिए। अगर बजट अच्छा रहा तो बाजार में फिर निवेश बढ़ेगा।

बजट के बाद एफआईआई निवेश फिर बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि अभी रुपये पर बहुत ज्यादा दबाव बना हुआ है। लिहाजा बजट के संतुलित होने की जरूरत है। बाजार में निवेश के लिए अच्छे शेयरों को चुनकर उनको कुछ समय तक होल्ड करने की रणनीति अपनानी चाहिए। छोटे मिडकैप शेयरों से दूर रहने की ही सलाह है। बाजार के बुरे दौर में मिडकैप शेयरों की हमेशा पिटाई हुई है। लार्जकैप शेयरों में खरीदारी करने की सलाह है।

अगर महंगाई दर में गिरावट आई तो आरबीआई की तरफ से प्रमुख ब्याज दरों में कटौती संभव है। हालांकि अभी प्रमुख ब्याज दरों में कटौती के कोई खास संकेत नहीं मिल रहे हैं। बाजार की मौजूदा चाल को देखते हुए बड़े घरेलू दिग्गज कंपनियों के अलावा आईटी सेक्टर और माइनिंग-मेटल शेयरों में खरीदारी की जा सकती है।

बजट पर इस बार बड़े ऐलानों की ज्यादा उम्मीद नहीं है। लेकिन बजट में इनकम पर टैक्स नहीं बढ़ाने का फैसला करना चाहिए और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने चाहिए। अगर वित्तीय घाटा 5 फीसदी तक आ जाए तो बाजार के लिए अच्छा होगा। बजट में एसटीटी हटाने का फैसला होना चाहिए।

बाजार में फिर से निवेशकों को लाने के लिए म्यूचुअल फंड के लिए इंसेटिव की घोषणा होनी चाहिए। दरअसल 5-6 वर्षों में लोगों को काफी नुकसान हुआ है। लिहाजा निवेशकों को म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश कर खरीदारी करनी चाहिए।

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11 मार्च से सीडीएमए स्पेक्ट्रम की नीलामी:

सीडीएमए स्पेक्ट्रम की नीलामी 11 मार्च से होगी। पहले ये नीलामी जीएसएम स्पेक्ट्रम की नीलामी खत्म होने के 2 दिन के बाद होनी थी। लेकिन किसी कंपनी के भाग न लेने के चलते 11 मार्च से शुरू होने वाली जीएसएम स्पेक्ट्रम की दिल्ली, मुंबई समेत 5 सर्किल में नीलामी रद्द हो गई है।

सीडीएमए स्पेक्ट्रम के 800 मेगाहर्ट्ज बैंड की नीलामी 11 मार्च को होगी। नीलामी में सिर्फ एक प्लेयर के भाग लेने के चलते नीलामी एक राउंड में ही खत्म हो जाएगी। और स्पेक्ट्रम बेस प्राइस पर बिकेगा। एमटीएस ब्रैंड के तहत सीडीएमए प्लेटफॉर्म पर सर्विस देने वाली सिस्टमा श्याम ने 11 सर्किल में स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए अर्जी दी है। कंपनी को इसके लिए 5,623 करोड़ रुपये देने होंगे।

जाहिर है कंपनियों की नीलामी में दिलचस्पी न होने से अब सरकार आपना 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएगी। नीलामी के दूसरी बार फेल होने के बाद सरकार क्या फिर से इन सर्किल में स्पेक्ट्रम नीलामी पर रखेगी। इसका फैसला जल्द ईजीओएम करेगी। लेकिन कंपनियों का कहना है कि स्पेक्ट्रम का दाम वाजिब नहीं है यहां तक हाल में ब्रिटेन, जर्मनी जैसे विकसित देशों में हुई 4जी नीलामी से भी कहीं ज्यादा है।

जानकारों का कहना है कि ये कंपनियों की साठगांठ भी हो सकती है। क्योंकि नीलामी के फेल होने से उनके लिए दाम कम कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाना आसान होगा। कंपनियां चाहती हैं कि उनके लाइसेंस की मियाद बढ़ जाए ताकि रिफार्मिंग के जरिए उनके पास मौजूद कीमती स्पेक्ट्रम वापिस नहीं लिया जाए।

900 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की रिफार्मिंग पर टेलिकॉम विभाग को 7 मार्च तक फैसला लेना है। इसी बीच सरकार स्पेक्ट्रम की तीसरे राउंड की नीलामी की तैयारी में जुट गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सरकार को 20 सर्किल में बचे सारे स्पेक्ट्रम की नीलामी करनी है।

भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्यूलर में से किसी ने भी नीलामी में भाग नहीं लिया। जबकि इन कंपनियों के दिल्ली, मुंबई और कोलकता लाइसेंस अगले साल नवंबर में खत्म हो रहे हैं। इन कंपनियों के पास 900 मेगाहर्ट्ज बैंड मौजूद है जिसकी कीमत 1800 मेगाहर्ट्ज से दोगुनी है। 900 मेगाहर्ट्ज की सिग्नल कवरेज दूसरे स्पेक्ट्रम के मुकाबले बेहतर है।

भारती एयरटेल और वोडाफोन ने दिल्ली हाईकोर्ट में 900 मेगाहर्ट्ज नीलामी के खिलाफ याचिका दायर की हुई है। इन कंपनियों का कहना है कि उनके लाइसेंस शर्तों के मुताबिक लाइसेंस की समयसीमा 10 साल तक बढ़नी चाहिए। कोर्ट ने सरकार से इस पर जवाब मांगा है।

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बजटः क्या है कैपिटल और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर:

कल बजट पेश होने वाला है। उससे पहले हम आपको बजट से जुड़े कई शब्दों को समझा रहे हैं। आज आइए आपको बताते हैं कि कैपिटल एक्सपेंडिचर और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर क्या है।

जब आप कार खरीदते हैं तो ये कैपिटल एक्सपेंडीचर होता है जिसका फायदा आपको लांग टर्म में मिलता है लेकिन उसमें पेट्रोल भराना रेवेन्यू एक्सपेंडीचर है। जो कार में कोई वैल्यू नहीं जोड़ती। इसी प्रकार सरकार भी जमीन खरीदती है, बिल्डिंग बनाती है, मशीनें लगती है और इस तरह एसेट बनाने पर खर्च करती है, जिसका इस्तेमाल हम आप करते हैं। इससे न सिर्फ ऐसेट तैयार होता है बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके बनते हैं ये खर्च ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी हैं इसे ही हम कैपिटल एक्सपेंडीचर कहते हैं।

वित्तवर्ष 2013 में सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपये इस मद पर खर्च किए। कैपिटल एक्सपेंडीचर के लिए सरकार कर्ज लेती है, लेकिन मुश्किल तब होती है जब ये कर्ज काफी ज्यादा हो जाता है। इस समय सरकार कर्ज और उसके ब्याज भुगतान पर 3.20 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही है। कई बार घाटा कम करने के लिए खर्च कम करना आसान रास्ता है लेकिन ये गलत रास्ता है।

अब बात करते हैं रेवेन्यू एक्सपेंडीचर की। रेवेन्यू एक्सपेंडीचर सरकार के रोजमर्रा के खर्च हैं जैसे कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, मेंटीनेंस वगैरा-वगैरा। ये ग्रोथ के साथ साथ बढ़ते हैं लेकिन इनसे कोई फायदा नहीं होता है। वित्त वर्ष 2013 में सैलरी और पेंशन जैसे बड़े रोजमर्रा के खर्चों पर 12 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन खर्चों को कम करना मुश्किल है लेकिन जरुरी भी है। देखना होगा बजट में इन मदों पर खर्च कितना बढ़ता है।

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म्यूचुअल फंड एएमसी को सेबी की फटकार:

सेबी ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से कहा है कि वो खराब प्रदर्शन करने वाली स्कीम या तो वापस ले या फिर निवेशकों से फीस लेना बंद करे। सूत्रों के मुताबिक सेबी ने कई एएमसी की इस बात के लिए खिंचाई की है कि उनके कई फंड कई साल से बेंचमार्क इंडेक्स से खराब रिटर्न दे रहे हैं फिर भी वो एक के बाद एक नई स्कीम लांच कर रहे हैं।

निवेशकों को सलाह है कि अगर कोई फंड 5 साल की अवधि में अपने बेंचमार्क को पीछे छोड़ने में नाकामयाब रहता है, तो ऐसे फंड से बाहर निकलना ही बेहतर है।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का छोटे निवेशकों पर फोकस नहीं है। म्यूचुअल फंड का ध्यान एयूएम जुटाने पर लगा हुआ है। म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को एनएफए के जरिए धोखा दिया है। यही वजह है कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में आने वाले समय में रीस्ट्रक्चरिंग संभव है। सेबी को रिटेल निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाना जरूरी है।

पिछले साल 329 ओपन एंडेड स्कीम में से 117 स्कीम अंडरपरफॉर्म रहे। 44 म्यूचुअल फंड कंपनियां 8.26 लाख करोड़ रुपये के एसेट मैनेज कर रही हैं। अंडरपरफॉर्म करने वाली स्कीम की बात करें तो पिछले 3 साल में रिलायंस ग्रोथ फंड ने 2.46 फीसदी का रिटर्न दिया है और इसका एयूएम 5,465 करोड़ रुपये रहा। वहीं पिछले 5 साल में बिड़ला सन लाइफ टैक्स रिलीफ 96 ने 1.5 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि इसका एयूएम 1,526 करोड़ रुपये है।

साथ ही आईडीएफसी इंफ्रा, एस्कॉर्ट इंफ्रा, बड़ौदा पायोनियर पीएसयू इक्विटी फंड, एसबीआई पीएसयू, बिड़ला सन लाइफ इक्विटी फंड और एचडीएफसी इंडेक्स निफ्टी जैसी स्कीम ने अपने बेंचमार्क से कम रिटर्न दिया है।

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मजबूत रुपये से नॉन-एग्री कमोडिटी पर दबाव:

आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने वित्तीय घाटे पर काबू पाने का संकेत दिया है। और इसी वजह से आज रुपये की चाल बदल गई है। लेकिन वित्तीय घाटे पर काबू और रुपये की मजबूती की खबरों का असर घरेलू कमोडिटी बाजार पड़ा है और सोना-चांदी समेत पूरे नॉन एग्री कमोडिटी में तेज गिरावट आई है।

घरेलू बाजार में सोने और चांदी की गिरावट बढ़ गई है। दरअसल डॉलर के मुकाबले रुपये में आई मजबूती से घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दोहरा दबाव पड़ा है। क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दबाव में आ गए हैं।

फिलहाल कॉमैक्स पर सोने और चांदी में 0.5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं एमसीएक्स पर सोना 0.6 फीसदी लुढ़ककर 29,920 रुपये पर कारोबार कर रहा है। चांदी 0.7 फीसदी की टूटकर 54,200 रुपये के नीचे आ गई है। एमसीएक्स पर कच्चा तेल 0.25 फीसदी फिसलकर 5,015 रुपये पर आ गया है।

बेस मेटल्स में भी गिरावट आई है। एमसीएक्स पर कॉपर का भाव करीब 1 फीसदी टूट चुका है। इसी तरह से एल्यूमीनियम, निकेल और जिंक में भी तेज गिरावट आई है, हालांकि लंदन मेटल एक्सचेंज पर और शंघाई मेटल एक्सचेंज पर अभी भी कॉपर में मजबूती कायम है।

एनसीडीईएक्स पर कैस्टर सीड 3.5 फीसदी चढ़ गया है। हालांकि एनसीडीईएक्स पर हल्दी और धनिया में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

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बजट से पहले क्या खरीदें, अविनाश गोरक्षकर की पिक्स:

अब बाजार को बजट का इंतजार है और बजट में होने वाले ऐलानों से किन शेयरों में तेजी आएगी जहां अभी खरीदारी करना फायदेमंद होगा। मिंट डायरेक्ट डॉटकॉम के अविनाश गोरक्षकर से जानते हैं कि बजट से पहले क्या खरीदना चाहिए।

सुप्रीम इंफ्राः

ये मुंबई की ईपीसी कंपनी है जो रोड, बिल्डिंग और पुल बनाती है। कंपनी का प्रदर्शन पिछले 2-3 सालों से काफी अच्छा चल रहा है। कंपनी की ऑर्डर बुक 4500 करोड़ रुपये की है। कंपनी ने हाल ही में तीसरी तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं जिनमें आय करीब 35 फीसदी और मुनाफा करीब 30 फीसदी की दर से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2013 में कंपनी के 1800 करोड़ रुपये की आय और 125 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2013 में कंपनी का ईपीएस 65 रुपये रह सकता है।  वित्त वर्ष 2014 में कंपनी की आय 2300 करोड़ रुपये और ईपीएस 80 रुपये रह सकती है। 1 साल में सुप्रीम इंफ्रा का शेयर 270 रुपये तक जा सकता है।

तमिलनाडु न्यूज प्रिंट एंड पेपर्स (टीएनपीएल): 

ये देश की सबसे बड़ी न्यूजपेपर प्रिंट करने वाली कंपनी है। कंपनी के तीसरी तिमाही नतीजों में कंपनी ने 18 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है जबकि इससे पिछली तिमाही में कंपनी ने 21 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया था। पिछले 9 महीने में कंपनी ने 50 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा लिया है। वित्त वर्ष 2013 में कंपनी का मुनाफा 75 करोड़ रुपये रह सकता है। मार्च 2013 तक कंपनी की बुक वैल्यू 145 रुपये हो जाएगी। इस कंपनी के वैल्यूएशन काफी सस्ते है। 1 साल में टीएनपीएल का शेयर 140 रुपये का लक्ष्य हासिल कर सकता है।

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आर्थिक सर्वेक्षण: वित्तवर्ष-14 में 6.1-6.7% की ग्रोथ:

संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश हो गया है। अगले साल सरकार को अर्थव्यवस्था में मजबूती लौटने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2014 में जीडीपी दर 6.1-6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं वित्त वर्ष 2013 में जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी रह सकती है।

मार्च महीने में महंगाई दर घटकर 6.2-6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। महंगाई दर में गिरावट के चलते ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश होगी। वैश्विक कीमतों में गिरावट और आरबीआई के कदमों के चलते महंगाई दर में गिरावट देखने को मिली है। हालांकि आने वाले दिनों में अमीर देशों में ब्याज दरों में कटौती से महंगाई बढ़ सकती है।

देश में आर्थिक मंदी खत्म होने के करीब है और अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत हैं। मंदी से मुकाबले के लिए आर्थिक सुधार तेज करने की जरूरत है। हालांकि वित्तीय और व्यापार घाटे का बढ़ना चिंता का विषय है। लिहाजा वैश्विक स्थिति को देखते हुए डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ाना जरूरी होगा। डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई में बढ़ोतरी होने की आशंका है। लेकिन निर्यात में जल्द सुधार आने की संभावना कम है। व्यापार घाटा कम करने के लिए सोने का आयात घटाने की जरूरत है। वहीं फूड सिक्योरिटी बिल से सब्सिडी बढ़ने का खतरा है। सब्सिडी खर्च को काबू में लाने पर जोर दिया जाएगा।

वित्त वर्ष 2013 में टैक्स वसूली बजटीय लक्ष्य से काफी कम रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में आईआईपी ग्रोथ में सुधार की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2013 में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 6.6 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2014 में वित्तीय घाटा 4.8 फीसदी और व्यापार घाटा 4.6 फीसदी रह सकता है। वित्त वर्ष 2013 में वित्तीय घाटे में 0.2 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है।

उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश बढ़ाना बड़ी चुनौती बन गया है। निवेश की कमी के कारण औद्योगिक रफ्तार कमजोर हो गई है। वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में दबाव देखने को मिल रहा है।

फाइनेंशियल सेक्टर पर छोटी अवधि और लंबी अवधि के कारकों के चलते दबाव देखने को मिल रहा है। जोखिम से बचने के लिए निवेशक शेयर बाजार में पैसे लगाने से बच रहे हैं। जीडीपी ग्रोथ बढ़ने से बैंकों के एनपीए कम होंगे।

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सेंसेक्स 137 अंक चढ़ा, 5797 पर बंद निफ्टी:

अर्थव्यवस्था के हालात सुधरने और कर्ज सस्ता होने की उम्मीद से बाजार में जोश आया। सेंसेक्स 137 अंक चढ़कर 19152 और निफ्टी 35 अंक चढ़कर 5797 पर बंद हुए।

दिग्गजों के साथ-साथ मझौले शेयरों में भी खरीदारी लौटी। निफ्टी मिडकैप 1 फीसदी चढ़ा। हालांकि, चुनिंदा मिडकैप शेयरों की पिटाई जारी रही। बीएसई स्मॉलकैप 0.2 फीसदी मजबूत हुआ।

कैपिटल गुड्स शेयर 2.5 फीसदी और रियल्टी शेयर 2 फीसदी उछले। ऑयल एंड गैस, मेटल, एफएमसीजी, पावर, पीएसयू, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और बैंक शेयर 1.2-0.8 फीसदी चढ़े। ऑटो शेयरों में 0.5 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई।

आईटी शेयर 1 फीसदी टूटे। तकनीकी शेयरों में 0.25 फीसदी की गिरावट आई। हेल्थकेयर शेयरों में सुस्त कारोबार रहा।

बाजार की चाल

मजबूत अंतर्राष्ट्रीय संकेतों की वजह से घरेलू बाजार तेजी के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 125 अंक चढ़ा। हालांकि, अच्छी शुरुआत करने के बाद बाजार से जोश गायब होता नजर आया।

निफ्टी लाल निशान में फिसला और सेंसेक्स ने भी 19000 के नीचे का स्तर छुआ। छोटे और मझौले शेयरों में भी कमजोरी दिखी। सुबह 11 बजे के बाद बाजार संभलते नजर आए।

सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था में मजबूती लौटने की उम्मीद जताए जाने के बाद बाजारों का मूड सुधरा। इसके अलावा मार्च तक महंगाई कम होने के अनुमान से आरबीआई द्वारा दरें जल्द घटाए जाने की संभावना बढ़ने से बाजार उछले।

सेंसेक्स 150 अंक से ज्यादा उछला और निफ्टी 5800 के ऊपर पहुंचा। मिडकैप शेयर भी संभले। बाजारों के साथ-साथ रुपये पर भी सकात्मक असर दिखा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 54 के अहम स्तर के नीचे पहुंचा।

यूरोपीय बाजारों की मजबूत शुरुआत की वजह से घरेलू बाजारों में भी तेजी बढ़ती नजर आई। सेंसेक्स करीब 200 अंक चढ़ा और निफ्टी में भी करीब 60 अंक की तेजी आई। निफ्टी मिडकैप 1 फीसदी चढ़ा।

हालांकि, दोपहर 2:30 बजे के बाद यूरोपीय बाजारों के मजबूती गंवाने के बाद घरेलू बाजार भी ऊपरी स्तरों से फिसले।

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कैस्ट्रॉल का मुनाफा बढ़ा, बिक्री में गिरावट:

साल 2012 की चौथी तिमाही में कैस्ट्रॉल का मुनाफा 10.3 फीसदी बढ़कर 118 करोड़ रुपये हो गया है। साल 2011 की चौथी तिमाही में कैस्ट्रॉल का मुनाफा 107 करोड़ रुपये रहा था।

हालांकि साल 2012 की चौथी तिमाही में कैस्ट्रॉल की बिक्री 1.4 फीसदी घटकर 758 करोड़ रुपये रही। साल 2011 की चौथी तिमाही में कैस्ट्रॉल की बिक्री 768.7 करोड़ रुपये रही थी

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कमोडिटी बाजारः बेस मेटल्स में क्या करें:

अमेरिका में नए घरों की बिक्री बढ़ने से लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर की कीमतों को कुछ सपोर्ट मिला है। लेकिन घरेलू बाजार में रुपये की मजबूती से मेटल पर दबाव बना हुआ है। एमसीएक्स पर बेस मेटल्स में 0.5-1 फीसदी के आसपास गिरावट देखने को मिल रही है।

एमसीएक्स पर कॉपर 0.4 फीसदी की गिरावट के साथ 42.50 रुपये पर कारोबार कर रहा है। एल्यूमिनियम में 0.75 फीसदी, निकेल में 0.9 फीसदी, लेड में 0.3 फीसदी और जिंक में 0.4 फीसदी की कमजोरी आई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार की जोरदार बढ़त के बाद सोना फिर से दबाव में आ गया है। साथ ही घरेलू बाजार में भी गिरावट पर कारोबार हो रहा है। रुपये में मजबूती से आज सोने पर दोहरा दबाव पड़ा है। चांदी में भी गिरावट देखी जा रही है।

फिलहाल एमसीएक्स पर सोना 0.6 फीसदी की कमजोरी के साथ 29,900 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं चांदी 0.8 फीसदी लुढ़ककर 54,150 रुपये पर आ गई है।

कच्चा तेल भी दबाव में आ गया है। मुख्य रूप से यूरोप की आर्थिक सेहत बिगड़ने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। नायमैक्स पर कच्चा तेल 93 डॉलर के नीचे आ गया है। वहीं घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर कच्चा तेल 0.25 फीसदी फिसलकर 5,015 रुपये पर आ गया है। एमसीएक्स पर नेचुरल गैस में भी 0.25 फीसदी लुढ़का है और इसका भाव 187.50 रुपये के नीचे आ गया है।

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Chidambaram set to present India's 82nd budget, his eighth:

Finance Minister P. Chidambaram will present India's 82nd Union Budget in the Lok Sabha on Thursday. This will be his eighth Budget -  two short of the record 10 set by former prime minister Morarji Desai.

Thursday will also see Chidambaram equal the eight-budget track record of his predecessor, Pranab Mukherjee, who is now the president.

Since independence in August 1947, the country has seen a total of 25 ministers hold the finance portfolio. It has also seen 81 budgets - 65 normal annual budgets, 12 interim budgets and four special-occasion budgetary measures, also called mini-budgets.

The tenures of two leaders holding the finance portfolio - Inder Kumar Gujral and Hemvati Nandan Bahugana - did not afford them the pleasure of presenting a national budget.

Among the others, Morarji Desai presented eight normal and two interim budgets, which had taken his tally to a record 10 - this remains unchallenged so far. 

Chidambaram, on Thursday, will surpass Yashwant Sinha, Y.B. Chavan and C.D. Deshmukh - who all presented seven budgets each. Prime Minister Manmohan Singh and the country's fourth finance minister T.T. Krishnamachari have presented six budgets each.

The next in line in terms of number of budgets presented are R. Venkataraman and H.M. Patel with three Budgets each, while Jaswant Singh, V.P. Singh, C. Subramaniam, John Mathai and R.K. Shanmukham Chetty have two each to their credit.

Among those who have presented one budget each all as prime ministers holding additional charge of the finance portfolio are Jawaharlal Nehru, his daughter Indira Gandhi and his grandson Rajiv Gandhi.

These apart, Charan Singh, N.D. Tiwari, Madhu Dandavate, S.B. Chavan and Sachindra Chaudhuri have also presented one budget each.

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SBI raises fixed deposit rates by 0.25%:

State Bank of India   (SBI), the largest bank of the country, today announced increase in interest rate on fixed deposits by 0.25 per cent on select maturities.

Of the total 9 maturity periods for fixed deposits, rates have been revised upwards in 4 categories with maturities of over one year.

The new rates would be effective from March 1, SBI said in a statement.

With the revision, the interest rate on 1-2 years fixed deposit would go up to 8.75 percent, from 8.50 percent. Similarly, term deposit 2-3 years, 3-5 years and 5-10 years would also earn higher interest rate of 8.75 percent.
However, the bank has left interest rate unchanged for deposits less than 1 year.

Earlier this month, the bank had cut lending rate by 0.05 percent, soon after the Reserve Bank cut its key policy rates.

After this marginal reduction, SBI's base rate, or the minimum rate of lending, came down to 9.70 percent from 9.75 percent effective February 4.

In its third quarter policy review on January 29, RBI had lowered key short-term lending rate by 0.25 per cent and also injected Rs 18,000 crore liquidity through similar reduction of Cash Reserve Ratio.

The repo rate, at which RBI lends to banks, was eased after a gap of nine months as the central bank fought the stubbornly high inflation through tight money policy, leading to high interest rate regime.

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Tuesday, February 26, 2013

ग्वार वायदा दोबारा शुरू करने की कोशिश तेज:

ग्वार वायदा को दोबारा शुरू करने को लेकर वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) ने फिर से कोशिश शुरू कर दी है। सीएनबीसी आवाज़ को सूत्रों से मिली एक्लूसिव जानकारी के मुताबिक इसी कोशिश के तहत एफएमसी जोधपुर में हाजिर के कारोबारियों के साथ अहम बैठक कर रहा है।

पिछले साल ग्वार वायदा में हो रही गड़बड़ियों के मामले को सबसे पहले सीएनबीसी आवाज ने ही उठाया था। एफएमसी को इस पूरे मामले में कई तरह की जांच करनी पड़ी थी। कई कारोबारी और ब्रोकरों पर गंभीर आरोप भी लगे थे और एफएमसी ने उनके ऊपर जुर्माना भी लगाया था।

अब ग्वार वायदा को बंद हुए करीब 1 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस वजह से कई संगठनों की ओर से इसे दोबारा शुरू करने की मांग की जा रही है। हालांकि पिछले अनुभवों को देखते हुए वायदा बाजार आयोग इस बार बेहद संभल-संभलकर चल रहा है। और इसी के तहत आज जोधपुर में ग्वार के कारोबार से जुड़े सारे पक्षों के साथ एफएमसी बैठक कर रहा है।

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