कुछ ही दिनों में कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे आना शुरू होंगे। चौथी तिमाही में भी कंपनियों के नतीजों पर दबाव बना रहेगा। आय में ग्रोथ की रफ्तार कम होगी साथ ही मार्जिन में भी कमी आ सकती है।
चौथी तिमाही में कंपनियों की आय में ग्रोथ घटकर 7 फीसदी के आसपास आ सकती है। वहीं ऑपरेटिंग मार्जिन में 0.3-0.5 फीसदी की कमी संभव है।
निवेश आधारित सेक्टर जैसे कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स, सीमेंट, स्टील के 6-7 तिमाही के नतीजे खराब रहे हैं और इस तिमाही में भी ये सिलसिला जारी रहने की आशंका है। प्रोजेक्ट में देरी से कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स कंपनियों पर दबाव देखा जाएगा।
खपत आधारित सेक्टर जैसे 2 व्हीलर, कार, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग में भी कमी दिख रही है जिससे इस तिमाही में इनके नतीजे ज्यादा अच्छे रहने की उम्मीद नहीं है। ऊंची ब्याज दरों से इन कंपनियों के मुनाफे पर असर देखा जा रहा है।
रुपये में कमजोरी से आईटी, फार्मा कंपनियों के नतीजे बेहतर रह सकते हैं। आईटी और फार्मा कंपनियों में ज्यादातर निर्यात आधरित कारोबार होने से इन कंपनियों के नतीजे अच्छे रह सकते हैं।
कमाई बढ़ने से एफएमसीजी, सीमेंट, चीनी कंपनियों में अच्छी ग्रोथ देखी जाएगी। वित्त वर्ष 2014 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों के घटने का असर देखा जाएगा और इससे ऑटो, रियल एस्टेट सेक्टर में सुधार आएगा।
पिछले 9 महीने में कैपिटल गुड्स सेक्टर में ऑर्डर घटने की वजह से नतीजे खराब रहे हैं। चौथी तिमाही में भी ये स्थिति सुधरने की उम्मीद नहीं है।
चौथी तिमाही में स्टील कंपनियों की आय में ग्रोथ घटने की आशंका है। हालांकि टैरिफ बढ़ने और क्षमता विस्तार से पावर जेनरेशन कंपनियों को फायदा हो सकता है और इनके नतीजे अन्य सेक्टर के मुकाबले अच्छे रह सकते हैं।
मांग घटने से कमर्शियल व्हीकल, हाउसिंग, होटल कंपनियों पर दबाव देखा जाएगा। अगली 1-2 तिमाही तक इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव रहेगा और आय में कमी आएगी।
मीडिया सेक्टर में विज्ञापनों की घटती संख्या के चलते थोड़ी मंदी देखी जाएगी। हालांकि डिजिटाइजेशन के चलते टीवी मीडिया से जुड़ी कंपनियों के नतीजे अच्छे रह सकते हैं।
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