Thursday, September 12, 2013

जेपी एसोसिएट्स, अल्ट्राटेक पर जानकारों की राय



जेपी एसोसिएट्स और अल्ट्राटेक सीमेंट में बड़ा सौदा हुआ है। कर्ज में डूबी जेपी एसोसिएट्स ने अपना गुजरात सीमेंट प्लांट अल्ट्राटेक सीमेंट को बेच दिया है। जेपी एसोसिएट्स और अल्ट्राटेक सीमेंट में सौदा 3800 करोड़ रुपये में हुआ है। आइए जानते हैं इस इस डील के बाद दिग्गज ब्रोकरों और जानकारों ने अपनी क्या राय दी है।

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ने जेपी एसोसिएट्स पर खरीद की राय बरकरार रखते हुए 96 रुपये का लक्ष्य दिया है। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच का कहना है कि सीमेंट डील से कंपनी के कर्ज में कमी होगी और फ्री कैश फ्लो में सुधार होगा। हालांकि डील के वैल्यूएशन प्लांट लगाने के खर्च से ज्यादा है।

डॉएश बैंक ने जेपी एसोसिएट पर बिकवाली की राय देते हुए 26 रुपये का लक्ष्य दिया है। उनका मानना है कि इस डील से ईपीएस में 1.5 रुपये प्रति शेयर की वृद्धि होगी। ये डील कर्ज में कटौती की ओर कंपनी का पहला कदम होगा। कर्ज कम करने के लिए कंपनी को और कई सारे एसेट बेचने होंगे।

एचएसबीसी ने जेपी एसोसिएट्स पर अंडरवेट की रेटिंग बरकरार रखते हुए 30 रुपये का लक्ष्य दिया है। एचएसबीसी का कहना है कि इस डील से कंपनी के कर्ज में 6 फीसदी की कमी होगी और वित्त वर्ष 2015 तक कंपनी के मुनाफे में 80-90 फीसदी की बढ़त संभव होगी।
लेकिन अभी शेयर में बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है।

मैक्वायरी ने अंडरपरफॉर्मर रेटिंग बरकरार रखते हुए जेपी एसोसिएट का लक्ष्य बढ़ाकर 38 रुपये प्रति शेयर किया। मैक्वायरी के मुताबिक कंपनी के कर्ज में बड़ी कटौती की भारी जरूरत है। इस डील से कंपनी के ईपीएस में बढ़त होगी। लेकिन अभी मौजूदा स्तरों से शेयर प्राइस में बढ़त की गुंजाइश सीमित है।

मॉर्गन स्टैनली का कहना है कि सीमेंट डील का कदम सही दिशा में हैं और डील के वैल्यूएशन भी काफी उचित हैं। इस डील से कंपनी के कर्ज में 7 फीसदी और ब्याज पर खर्च में 11 फीसदी की कमी होगी। वित्त वर्ष 2015 तक कंपनी के मुनाफे में 30 फीसदी की बढ़त संभव है।

सीएलएसए ने अल्ट्राटेक सीमेंट पर 1800 रुपये प्रति शेयर का लक्ष्य रखा है। सीएलएसए के मुताबिक पहले साल में ईएपीएस में 4-5 फीसदी की कमी का अनुमान है। इस डील से पश्चिम भारत में कंपनी का कारोबार मजबूत होगा।

डॉएश बैंक ने अल्ट्राटेक सीमेंट पर होल्ड की सलाह देते हुए 1860 रुपये प्रति शेयर का लस्य तय किया है। उनका मानना है कि इस डील से छोटी अवधि में ईपीएस में कमी होगी। वित्त वर्ष 2015 में कंपनी के ईपीएस में 6 फीसदी और वित्त वर्ष 2016 में 8 फीसदी की कमी संभव है। मध्यम अवधि में कंपनी के मुनाफे में सुधार होगा।


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