मिडकैप शेयरों में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। पिछले सप्ताह जोरदार गिरावट के बाद चालू कारोबारी सप्ताह में भी मिडकैप शेयर भारी मात्रा में लुढ़क चुके हैं। इस हफ्ते अब तक एचडीआईएल 28 फीसदी, स्टर्लिंग बायोटेक 21 फीसदी, आईवीआरसीएल 20 फीसदी, जबकि श्रेई इंफ्रा 19 फीसदी तक टूट चुका है। हालांकि कंपनियों की ओर से कई बार सफाई दी भी गई कि फंडामेंटल नजरिए से वह काफी मजबूत हैं। बावजूद इसके मिडैकप शेयर लुढ़कते जा रहे हैं।
मौजूदा समय में मिडकैप शेयरों में गिरावट फंडामेंटल नहीं बल्कि कमजोर तकनीकी कारणों के चलते देखी जा रही है। मिडकैप क्षेत्र की कंपनियों के कारोबारी ढाचें में कोई बदलाव नहीं आया है, साथ ही कई कंपनियां भारी नकदी पर बैठी हैं। हालांकि एनबीएफसी भुगतान नहीं मिलने पर कुछ कंपनियों के गिरवी शेयर बेच रही हैं, यह एक कारण मिडकैप शेयर में गिरावट का जरूर हो सकता है।
इसके अलावा मौजूदा समय में बाजार में खरीदारी का रुझान नहीं दिखाई दे रहा है। वहीं विदेश संस्थागत निवेशकों(एफआईआई) की ओर से अंधाधुंध ट्रेडिंग की जा रही है। वहीं सरकार अपने विनिवेश के लक्ष्य को जल्द हासिल करने के लिए औने-पौने दामों पर कंपनियों के शेयर बेच रही है। जिसके चलते बाजार में दूसरे शेयरों के वैल्युएशन खराब हो रहे हैं।
सरकार को ओएफएस लाने की प्रक्रिया में सुधार करना चाहिए। वहीं बाजार नियामक को भी मार्केट मेकिंग जैसे नियमों में सख्ती लाना होगा। जिसके बाद ही बाजार के रुख में सुधार आएगा और निवेशकों का भरोसा लौटेगा।
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इसके अलावा मौजूदा समय में बाजार में खरीदारी का रुझान नहीं दिखाई दे रहा है। वहीं विदेश संस्थागत निवेशकों(एफआईआई) की ओर से अंधाधुंध ट्रेडिंग की जा रही है। वहीं सरकार अपने विनिवेश के लक्ष्य को जल्द हासिल करने के लिए औने-पौने दामों पर कंपनियों के शेयर बेच रही है। जिसके चलते बाजार में दूसरे शेयरों के वैल्युएशन खराब हो रहे हैं।
सरकार को ओएफएस लाने की प्रक्रिया में सुधार करना चाहिए। वहीं बाजार नियामक को भी मार्केट मेकिंग जैसे नियमों में सख्ती लाना होगा। जिसके बाद ही बाजार के रुख में सुधार आएगा और निवेशकों का भरोसा लौटेगा।
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