दुनिया के बाजारों की नजर टिकी है साइप्रस पर और खुद साइप्रस रूस से उम्मीद लगाए है। साइप्रस रूस से 5.75 अरब डॉलर का कर्ज चाहता है। साथ ही उसे पहले से लिए गए 2.5 अरब डॉलर के कर्ज में रियायत भी चाहिए। फिलहाल साइप्रस के वित्त मंत्री इसी मांग के साथ रूस गए हैं।
2 दौर की बातचीत में रुस ने मदद से इनकार भी कर दिया है लेकिन साइप्रस के वित्त मंत्री मॉस्को में ही डटे हैं। उधर मौजूदा आर्थिक संकट से निकलने के लिए साइप्रस की संसद में फिर वोटिंग होगी। नए प्रस्ताव के तहत बैंकों में जमा लोगों के पैसों पर थोड़ा टैक्स लगाया जा सकता है।
दरअसल साइप्रस की अर्थव्यवस्था डांवाडोल है और उसे तुरंत आर्थिक मदद की जरूरत है लेकिन उसकी संसद ने यूरोपीय यूनियन के बेलआउट को ठुकरा दिया है। इस बेलआउट में उसे अपने देश के बचत खातों पर करीब 6 फीसदी का टैक्स लगाना था।
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2 दौर की बातचीत में रुस ने मदद से इनकार भी कर दिया है लेकिन साइप्रस के वित्त मंत्री मॉस्को में ही डटे हैं। उधर मौजूदा आर्थिक संकट से निकलने के लिए साइप्रस की संसद में फिर वोटिंग होगी। नए प्रस्ताव के तहत बैंकों में जमा लोगों के पैसों पर थोड़ा टैक्स लगाया जा सकता है।
दरअसल साइप्रस की अर्थव्यवस्था डांवाडोल है और उसे तुरंत आर्थिक मदद की जरूरत है लेकिन उसकी संसद ने यूरोपीय यूनियन के बेलआउट को ठुकरा दिया है। इस बेलआउट में उसे अपने देश के बचत खातों पर करीब 6 फीसदी का टैक्स लगाना था।
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