श्री सीमेंट्स के एमडी एच एम बांगड़ का कहना है कि कंपनी में क्षमता विस्तार पर काम चल रहा है जिसका पहला चरण जून 2013 तक पूरा हो जाएगा और मार्च 2014 तक दूसरा चरण पूरा हो जाएगा। कंपनी राजस्थान और रायपुर में नई यूनिट लगा रही है।
जून तक क्षमता में 30 लाख टन की बढ़ोतरी होगी और मार्च 2014 तक अतिरिक्त 30 लाख टन की बढ़ोतरी होगी। विस्तार के बाद मार्च 2014 तक कंपनी की क्षमता बढ़कर 1.9 करोड़ टन हो जाएगी। कंपनी की मौजूदा क्षमता 1.3 करोड़ टन है। आने वाले 5 सालों में कंपनी की क्षमता 3.5 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है।
कंपनी का दूसरा कारोबार पावर सेक्टर में है जिससे कंपनी की आय का 24-25 फीसदी हिस्सा आता है। कंपनी करीब 550 मेगावॉट बिजली बनाती है जिसमें से 50 मेगावॉट बिजली वेस्ट ट्रीटमेंट से बनती है और 500 मेगावॉट थर्मल पावर होती है। इस 550 मेगावॉट में से 100 मेगावॉट बिजली कंपनी खुद के लिए उपयोग करती है और बाकी 450 मेगावॉट बिजली राज्यों को बेचती है। कंपनी की बिजली राजस्थान, उत्तरांचल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु को बेची जाती है।
एच एम बांगड़ के मुताबिक कंपनी के ऊपर कोई कर्ज नहीं है और कंपनी की बैलेंसशीट में पर्याप्त कैश है। कंपनी क्षमता विस्तार के लिए कोई कर्ज नहीं लेगी और एनसीडी के मुकाबले कंपनी के पास ज्यादा एफडी और सरकारी सिक्योरिटीज हैं।
कंपनी के कारोबार में सालाना 8-10 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिल रही है। कंपनी को सबसे ज्यादा मांग रिटेल से मिल रही है। कंपनी की उत्तर भारत में अच्छी पकड़ है। राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराचंल में कंपनी मार्केट लीडर है।
श्री सीमेंट्स का मार्केट कैप 14,000 करोड़ रुपये का है और कंपनी में प्रोमोटरों की हिस्सेदारी 64.79 फीसदी है।
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