अब तक जो सोना शानदार रिटर्न देकर निवेशकों को लगातार अपनी ओर खींच रहा था, उसकी चमक फीकी पड़ रही है। जानकार तो कह रहे हैं कि अगले साल तक सोना 25,000 रुपये तक लुढ़क सकता है।
रिटर्न के लिहाज से सबसे भरोसमंद कमोडिटी पर चौतरफा दबाव बढ़ रहा है। दबाव की कई वजह हैं। पहली अमेरिकी राहत पैकेज में कटौती को लेकर बाजार में चर्चा फिर से गर्म है। बड़े निवेशकों की बिकवाली से दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड फंड एसपीडीआर गोल्ड की होल्डिंग 3 साल के निचले स्तर पर आ गई है।
सोने में गिरावट की तीसरी वजह है। इस साल सोने के भाव 10 फीसदी गिर जाएंगे। इसके अलावा साइप्रस अब फंड जुटाने के लिए अपने रिजर्व से 10 टन सोना बेचेगा।
निवेशकों को डर है कि संकट में फंसे यूरोजोन के दूसरे देश भी इसी रास्ते पर आ सकते हैं। जानकारों का मानना है कि अगर ऐसा होता है, तो सोने में तेज गिरावट आएगी। दरअसल सोने पर दबाव लगातार बन रहा है। और 2 महीने के अंदर दूसरी बार सोने पर अनुमान घटा दिया है।
इस साल के अंत तक ग्लोबल मार्केट में सोना 1450 डॉलर और अगले साल तक ये 1270 डॉलर तक भी फिसल सकता है। जानकारों का मानना है कि ऐसे में घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतें लुढ़क सकती हैं।
पिछले कई वर्षों के दौरान सोने की कीमतों को बढ़ाने में दुनिया के सेंट्रल बैंकों का बड़ा हाथ था। अबतक सिर्फ निवेशकों की बिकवाली से ही सोने में गिरावट आई है। साइप्रस ने जिस मकसद के लिए सोना बेचने का फैसला लिया है इसके लिए दूसरे देश भी सोने का भंडार हल्का कर सकते हैं। बेशक ऐसे में सोने में गिरावट आनी तय है।
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