वित्त मंत्रालय के अधिकारी भारत की ग्रोथ स्टोरी बेचने में जुटे हुए हैं। अगले 1 महीने में सरकार 3 बड़ी रेटिंग एजेंसी- फिच, एसएंडपी और मूडीज के साथ बैठक करने वाली है, जहां साबित किया जाएगा कि भारत की रेटिंग क्यों सुधरनी चाहिए।
वहीं, रेटिंग घटने से सरकार की मुश्किलें बढ़ेंगी। रेटिंग डाउनग्रेड होने से सरकारी उधारी पर ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा। साथ ही, डाउनग्रेड से देश में निवेश का माहौल भी बिगड़ने की आशंका है।
रेटिंग सुधारने के लिए सरकार अपना वित्तीय घाटा 4.8 फीसदी तक कम करने की कोशिश में जुटी है। सब्सिडी में कटौती करके खर्चे कम करने की सरकार की योजना है।
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