सूत्रों से एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि वित्त वर्ष 2014 में भारत के लिए एच-1बी वीजा रिजेक्शन रेट 60 फीसदी हो सकता है। वित्त वर्ष 2013 में रिजेक्शन रेट 45 फीसदी था।
सूत्रों में मुताबिक 1 हफ्ते में ही एच-1बी वीजा अर्जियों का पूरे साल का कोटा भर चुका है। अब भारतीय आईटी कंपनियां एच-1बी वीजा के विकल्प तलाश कर रही हैं। ज्यादातर कंपनियों ने अमेरिका में ही भर्तियां करना शुरू कर दिया है।
माना जा रहा है कि इंफोसिस, विप्रो, टीसीएस को भी अमेरिका में ही कैंपस हाइरिंग का सहारा लेना पड़ सकता है। नैस्कॉम का कहना है कि मामले पर भारत सरकार अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग से चर्चा करेगी।
नैस्कॉम अमेरिका के प्रस्तावित इमिग्रेशन नियमों में बदलावों पर अपने सुझाव भेजेगा। अमेरिका की सरकार घरेलू प्रोफेशनल्स के हितों को ध्यान में रखते हुए इमिग्रेशन कानून कड़ा करने की तैयारी में है।
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