साल के अंत तक कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। भले ही राज्यों के विधानसभा चुनाव देश की गद्दी पर पहुंचने का सेमीफाइनल मैच होगा, लेकिन अब सभी को इंतजार आम चुनावों का ही है। आलम ये है कि बाजार भी अब आम चुनावों पर अपनी नजरें टिकाएं बैठ गया है। बाजार के दिग्गज जानकार भी यही मान रहे हैं कि आम चुनाव का ऐलान होने तक बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी।
एनबीआईई के पशुपति आडवाणी का कहना है कि बाजार पर फिलहाल मंदी का नजरिया नहीं है। लेकिन आम चुनाव का ऐलान होने तक बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी। बाजार के लिए रुपये की कमजोरी जरूर चिंता का विषय बन गई है। लिहाजा अगर भारत की रेटिंग डाउनग्रेड हुई तो डॉलर के मुकाबले रुपया 80 तक भी गिर सकता है।
पशुपति आडवाणी के मुताबिक अमेरिका की भी दिक्कतें फिलहाल खत्म नहीं हुई हैं। क्यूई3 में बड़ी कमी की आशंका नहीं है। जनवरी 2014 में फेड का नए चेयरमैन आने के बाद पॉलिसी को लेकर अंतिम कदम आने में 2-3 महीने लगेंगे। वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नए गर्वनर रघुराम राजन को आरबीआई गवर्नर के तौर पर शुरुआत में छोटी अवधि के लिए कदम उठाने होंगे।
पशुपति आडवाणी का मानना है कि सरकार की तरफ से उठाए गए हाल के कदमों के बावजूद सोने का इंपोर्ट जारी रहना चिंता का विषय है। हालांकि भारत में खपत आगे भी बरकरार रहने की उम्मीद है।
शेयरों की चाल को लेकर कहा जाय तो एफएमसीजी सेक्टर में आईटीसी और टेलिकॉम सेक्टर में भारती एयरटेल पर दांव लगाया जा सकता है। लेकिन अच्छे प्राइवेट बैंकों में एफआईआई की बिकवाली का दबाव है। वहीं फार्मा शेयरों में ल्यूपिन और सिप्ला जैस शेयरों में खरीदारी का मौका है।
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