इकॉनोमी में छाई इस मंदी में एक उम्मीद की किरण नजर आ रही है। चारों तरफ से घिरी यूपीए सरकार भी इस उम्मीद में बैठी है कि मॉनसून सब परेशानियों का हल साबित होगा। इस साल सामान्य से 11 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। इसलिए बंपर फसल की उम्मीद है। इसके साथ ग्रामीण शेत्रों में रह रहे लोगों के हाथ में पैसा आएगा और वो ज्यादा सामान खरीदेंगे।
26 जुलाई तक बुआई पिछले साल के 680 लाख से बढ़कर 747 लाख हेक्टेअर रही है। इस साल खरीफ बुआई का क्षेत्र 10.5 करोड़ हेक्टेयर होने की उम्मीद है, जो पिछले साल के मुकाबले 7 फीसदी ज्यादा है। वित्त वर्ष 2014 की पहली तिमाही में कृषि सेक्टर की ग्रोथ 2.7 फीसदी रही है। जबकि पूरे साल के लिए 5 फीसदी कृषि ग्रोथ का अनुमान है।
इस फॉर्मूले के सफल होने पर बहुत कुछ बदल जाएगा। डिमांड बढ़ेगी, हालात सुधरेंगे। तो क्या इस साल भारत - इंडिया को बचाएगा। या फिर अच्छे मॉनसून को जादू की छड़ी समझना गलत होगा।
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