प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति ने वित्त वर्ष 2014 के लिए आर्थिक विकास का अनुमान जारी कर दिया है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति का मानना है कि वित्त वर्ष 2014 में देश की जीडीपी ग्रोथ 6.4 फीसदी रहेगी।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन सी रंगराजन का कहना है कि वित्त वर्ष 2014 में इंडस्ट्री की ग्रोथ 4.9 फीसदी और सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 7.7 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2014 में कृषि क्षेत्र की ग्रोथ 3.5 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2014 में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 4 फीसदी रहने का अनुमान है।
सी रंगराजन का मानना है कि आर्थिक सुधार को लेकर सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों का असर वित्त वर्ष 2014 में देखने को मिल सकता है। वित्त वर्ष 2013 के मुकाबले वित्त वर्ष 2014 में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का प्रदर्शन बेहतरीन सकता है। हालांकि यूरोजोन में मंदी और गहराने के आसार हैं। लेकिन भारत में प्रोजेक्ट्स पर तेज रफ्तार से काम शुरू करने से अच्छी ग्रोथ हासिल की जा सकती है।
सी रंगराजन के मुताबिक वित्त वर्ष 2014 में करेंट अकाउंट घाटा, जीडीपी के 4.7 फीसदी यानि 100 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। वहीं वित्त वर्ष 2013 में करेंट अकाउंट घाटा 5.1 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 के दौरान करेंट अकाउंट घाटे में निर्यात की ग्रोथ 9 फीसदी और आयात की ग्रोथ 8 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में महंगाई दर 6 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में खाद्य महंगाई दर 8 फीसदी के आसपास रह सकती है। महंगाई दर में गिरावट के साफ संकेत मिल रहे हैं, लेकिन करेंट अकाउंट घाटे को लेकर चिंता बरकरार है।
साल दर साल आधार पर वित्त वर्ष 2014 में व्यापार घाटा 200 अरब डॉलर से बढ़कर 213 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2013 में देश में एफडीआई निवेश 18 अरब डॉलर, जबकि वित्त वर्ष 2014 में 24 अरब डॉलर के एफडीआई निवेश का अनुमान है। सोने, कोयले और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें चिंता का विषय है। वित्त वर्ष 2013 में सोने का आयात 6,200 करोड़ डॉलर से घटकर 5,600 करोड़ डॉलर रह सकता है।
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