घोटालों को लेकर केंद्र की राजनीति में गरमी काफी बढ़ गई है। इसका नतीजा ये हुआ कि संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही गुरुवार तक के लिए स्थगित हो गई। मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के हंगामे के बाद संसद के दोनों सदनों को स्थगित करना पड़ा। कोयला आवंटन को लेकर सीबीआई की रिपोर्ट और 2जी मामले में जेपीसी की रिपोर्ट के आधार पर बीजेपी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कानून मंत्री अश्वनी कुमार का इस्तीफा मांग रही है।
हालांकि इस बीच कोयला आवंटन पर स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट लोकसभा में पेश की गई। इसमें साल 2008 तक के सभी कोयला ब्लॉक आवंटन को अवैध बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1993 से लेकर 2008 तक के सभी कोयला ब्लॉक गलत तरीके से दिए गए हैं। गौरतलब है कि इस अवधि में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का शासनकाल भी शामिल है। इस रिपोर्ट के बाद दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।
बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद का कहना है कि कोल-गेट घोटाले में प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका साफ नजर आ रही है। लिहाजा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस्तीफा देना चाहिए। वहीं सरकार को कानून मंत्री अश्विनी कुमार को बर्खास्त किया जाना चाहिए।
बीजेपी के एक अन्य नेता यशवंत सिन्हा का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय को 2जी मामले में पूरी जानकारी थी। 2जी मामले में ए राजा के साथ प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की भूमिका भी है। लिहाजा वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री बराबर के दोषी हैं।
सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी का कहना है कि हर मुद्दे पर राजनीति करने की जरूरत नहीं है। विपक्ष को एनडीए कार्यकाल में हुए घोटालों पर भी नजर डालनी चाहिए।
हालांकि इस गतिरोध के बाद ससंद के चल पाने को लेकर आशंका पैदा हो गई है। ऐसे में इस गतिरोध के कारण फाइनेंस बिल, इंश्योरेंस बिल, जमीन अधिग्रहण बिल, खाद्य सुरक्षा कानून, पीएफआरडीए बिल और एफसीआरए बिल के एक बार फिर अटकने के आसार पैदा हो गए हैं।
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