Thursday, March 28, 2013

तीसरी तिमाही में करेंट अकाउंट घाटा बढ़कर 6.7% :

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद देश का करेंट अकाउंट घाटा कम नहीं हो पाया है। मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में देश का करेंट अकाउंट घाटा रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। वित वर्ष 2013 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में देश का करेंट अकाउंट घाटा बढ़कर 6.7 फीसदी हो गया है। वहीं वित्त वर्ष 2013 की दूसरी तिमाही में करेंट अकाउंट घाटा 5.4 फीसदी रहा था। वित्त वर्ष 2012 की तीसरी तिमाही में करेंट अकाउंट घाटा 4.4 फीसदी रहा था।

साल दर साल आधार पर तीसरी तिमाही में करेंट अकाउंट घाटा 20.2 अरब डॉलर से बढ़कर 32.6 अरब डॉलर हो गया है। सालाना आधार पर अप्रैल-दिसंबर के दौरान करेंट अकाउंट घाटा 56.5 अरब डॉलर से बढ़कर 71.7 अरब डॉलर हो गया है।

वहीं तीसरी तिमाही में देश का व्यापार घाटा 48.6 अरब डॉलर से बढ़कर 59.6 अरब डॉलर हो गया है। सालाना आधार पर तीसरी तिमाही में देश के मैन्यूफैक्चर्ड उत्पादों का निर्यात 7.6 फीसदी से बढ़कर 8.1 फीसदी रहा। सालाना आधार पर तीसरी तिमाही में देश के मैन्यूफैक्चर्ड उत्पादों का आयात 22.3 फीसदी से घटकर 9.4 फीसदी रहा।

सालाना आधार पर तीसरी तिमाही में देश में एफडीआई निवेश 5 अरब डॉलर से घटकर 2.5 अरब डॉलर रहा। वहीं सालाना आधार पर तीसरी तिमाही में देश से 3.8 अरब डॉलर के मुकाबले 6.3 अरब डॉलर की विदेशी निवेश निकाली गई। सालाना आधार पर सेवा क्षेत्र का आयात -8.9 फीसदी से बढ़कर -10.6 फीसदी रहा। वहीं सेवा क्षेत्र का निर्यात 6.4 फीसदी से घटकर 2 फीसदी रहा।

सालाना आधार पर तीसरी तिमाही में फॉरेक्स डेट इनफ्लो -8.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2.7 अरब डॉलर रहा। सालाना आधार पर नेट पोर्टफोलियो इंवेस्टमेंट 1.8 अरब डॉलर से बढ़कर 8.6 अरब डॉलर रहा। तीसरी तिमाही में देश का फॉरेक्स भंडार 80 डॉलर से बढ़ा है।

वित्त मंत्रालय का कहना है कि करेंट अकाउंट घाटे का आंकड़ा ज्यादा है, लेकिन धक्का लगने लायक नहीं है। उम्मीद है कि विदेशी निवेश से करेंट अकाउंट घाटे की भरपाई करने हो पाएगी।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक निर्यात में बढ़ोतरी जारी रहने से करेंट अकाउंट घाटे में कमी आएगी। वित्त वर्ष 2013 की तीसरी तिमाही के मुकाबले चौथी तिमाही में करेंट अकाउंट घाटे की स्थिति बेहतर होगी।

साल दर साल आधार पर दिसंबर 2012 में देश का विदेशी कर्ज 345.5 अरब डॉलर से बढ़कर 376.3 अरब डॉलर हो गया है। सालाना आधार पर दिसंबर में देश के कुल जीडीपी के मुकाबले विदेशी कर्ज 19.7 फीसदी से बढ़कर 20.6 फीसदी रहा। लंबी और छोटी अवधि के कर्जों से विदेशी कर्ज का बोझ बढ़ा है। एनआरआई डिपॉजिट और उधारी से लंबी अवधि का कर्ज बढ़ा है।

दिसंबर 2012 के अंत तक देश का लंबी अवधि का कर्ज 284.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। दिसंबर 2012 के अंत तक छोटी अवधि का कर्ज 91.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। कुल विदेशी कर्ज के मुकाबले छोटी अवधि के कर्ज का हिस्सा 24.4 फीसदी और लंबी अवधि के कर्ज का हिस्सा 75.6 फीसदी है।

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डेक्कन क्रॉनिकल के 7 डायरेक्टर होंगे गिरफ्तार :

रेलिगेयर चेक मामले में चंडीगढ़ कोर्ट ने डेक्कन क्रॉनिकल के 7 डायरेक्टरों को गिरफ्तार करने के आदेश दिए हैं। इन डायरेक्टरों को कोर्ट के सामने 23 मार्च को पेश होना था।

सूत्रों के मुताबिक चंडीगढ़ पुलिस इन डायरेक्टरों की गिरफ्तारी के लिए डेक्कन क्रॉनिकल के हैदराबाद ऑफिस पहुंची है। डेक्कन क्रॉनिकल ने रेलिगेयर को 6 करोड़ रुपये का चेक जारी किया था, जो बाद में बाउंस हो गया।

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कमोडिटी बाजार: शनिवार को एग्री में क्या करें :

एग्री कमोडिटीज में कारोबार खत्म हो गया है। एनसीडीईएक्स पर सोयाबीन इन्ट्राडे में करीब 2 फीसदी टूटा था। हालांकि, सोयाबीन में रिकवरी दिखी और सोयाबीन 0.3 फीसदी की कमजोरी पर बंद हुआ। सरसों में मामूली बढ़त दिखी। सोयाऑयल लाल निशान में बंद हुआ।

चीनी में 0.7 फीसदी की गिरावट आई। गेहूं 1 फीसदी टूटा। मंडियों में आवक बढ़ने की वजह से चना 0.5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट पर बंद हुआ। एमसीएक्स पर मेंथा ऑयल 3 फीसदी लुढ़का। वहीं, आलू में 3 फीसदी का उछाल नजर आया। सीपीओ में 0.5 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी आई।

मसालों में एमसीएक्स पर इलायची 1 फीसदी चढ़ी। एनसीडीईएक्स पर जीरा भी 1 फीसदी मजबूत हुआ। काली मिर्च में करीब 1.5 फीसदी की तेजी आई। हालांकि, लाल मिर्च करीब 2.5 फीसदी टूटी। हल्दी भी 1.5 फीसदी गिरी।

कैस्टर सीड एनसीडीईएक्स (मई वायदा): खरीदें - 3655, स्टॉपलॉस - 3580, लक्ष्य - 3730-3735

कॉकुड एनसीडीईएक्स (मई वायदा): खरीदें - 1542, स्टॉपलॉस - 3480, लक्ष्य - 1559-1560

शाम के सत्र के लिए नॉन-एग्री में रणनीति

सोने में गिरावट बढ़ गई है। घरेलू बाजार में सोने का भाव 0.25 फीसदी से ज्यादा गिर गया है। कॉमैक्स पर सोना 1600 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है। चांदी में भी बिकवाली का दबाव है।

कच्चे तेल तेजी आई है। जर्मनी और इटली के अच्छे आंकड़ों से नायमैक्स पर कच्चा तेल 97 डॉलर की ओर बढ़ता दिख रहा है। इसी का असर घरेलू कारोबार पर पड़ा है। आईसीई पर ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पास पहुंच गया है।

222 रुपये के ऊपर जाने के बाद नैचुरल गैस पर बिकवाली का दबाव आया है। एमसीएक्स पर फिलहाल नैचुरल गैस पर 1 फीसदी गिर चुकी है।

बेस मेटल्स पर दबाव जारी है। जिंक 0.5 फीसदी से ज्यादा गिरा है। निकेल, लेड, एल्यूमिनियम में भी कमजोरी है। हालांकि, कॉपर में सुस्ती है। एलएमई पर कॉपर में तेजी है।

किस पर रहेगी नजर: फरवरी में जर्मनी का रिटेल सेल्स करीब 0.5 फीसदी बढ़ गई है। इसके साथ ही मार्च के दौरान जर्मनी में बेरोजगारी की दर में करीब 7.5 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। इसके अलावा इटली के बिजनेस कॉन्फिडेंस में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इटली का बिजनेस कॉन्फिडेंस बढ़कर 88.9 प्वाइंट पर पहुंच गया है। आज अमेरिका में जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं। साथ ही, अमेरिका में वीकली जॉबलेस डेटा भी जारी किया जाएगा।

कच्चा तेल: खरीदें - 5220, स्टॉपलॉस - 5190, लक्ष्य - 5290

जिंक एमसीएक्स (अप्रैल वायदा): बेचें - 104, स्टॉपलॉस - 105, लक्ष्य - 102.5

कॉपर एमसीएक्स (अप्रैल वायदा): बेचें - 418, स्टॉपलॉस - 421, लक्ष्य - 412

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सोने-चांदी का फीका प्रदर्शन, आगे क्या करें :

2013 की पहली तिमाही में सोने और चांदी ने निवेशकों को नेगेटिव रिटर्न दिया है। जनवरी से अब तक घरेलू बाजार में सोने का भाव 7 फीसदी तक गिरा है। वहीं चांदी ने 10 फीसदी से ज्यादा का गोता लगाया है।

जनवरी के शुरूआत में सोना जहां 31700 रुपये के करीब कारोबार कर रहा था, अब इसका भाव गिरकर 29500 रुपये के करीब आ गया है। यानि सोने में करीब 2000 रुपये की भारी गिरावट आई है।

इसी तरह से साल के शुरुआत में चांदी जहां 61000 रुपये के पास कारोबार कर रही थी, अब इसका भाव गिरकर 54000 रुपये के नीचे आ गया है। यानि 3 महीनों में चांदी 7000 रुपये तक लुढ़की है।

कल गुडफ्राइडे के मौके पर दुनिया भर के बाजार बंद रहेंगे। इस वजह से आज इस तिमाही का अंतिम कारोबारी दिन है। छोटी अवधि में सोना 28000 रुपये का भाव दिखा सकता है।

लंबी अवधि में सोने में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, सोने के मुकाबले चांदी से ज्यादा रिटर्न मिल सकता है।

लंबी अवधि में सोना 32000-35000 रुपये और चांदी 70000-75000 रुपये का स्तर दिखा सकते हैं।

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गेल ने नहीं चुकाई 700 करोड़ रु की एक्साइज :

टैक्स चोरी रोकने की वित्त मंत्रालय मुहिम अब सरकारी कंपनियों तक भी पहुंचने लगी है। एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक गेल पर करीब 700 करोड़ रुपये की एक्साइज ड्यूटी नहीं चुकाने का आरोप लगा है।

सूत्रों का कहना है कि गेल पर एक्साइज ड्यूटी नहीं चुकाने के 2 मामले पकड़े गए हैं। पहले मामले में 426 करोड़ रुपये और दूसरे मामले में 284 करोड़ रुपये की एक्साइज ड्यूटी बकाया है।

गेल पर गलत कैटगरी के तहत प्रोडक्ट दिखाकर कम एक्साइज ड्यूटी चुकाने का आरोप लगाया गया है। एक्साइज डिपार्टमेंट ने गेल को ड्यूटी चुकाने का नोटिस भेजा है।

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अप्रैल-फरवरी में वित्तीय घाटा 5.07 लाख करोड़ रु :

वित्तीय घाटे के मोर्चे पर सरकार को राहत मिलती नहीं दिख रही है। अप्रैल-फरवरी में वित्तीय घाटा 5.07 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पूरे साल के लक्ष्य का 97.4 फीसदी है।

वहीं, अप्रैल-फरवरी के दौरान राजस्व घाटा 3.96 लाख करोड़ रुपये रहा। जबकि पिछले साल अप्रैल-फरवरी में राजस्व घाटा 3.81 लाख करोड़ रुपये रहा था।

पिछले साल के मुकाबले अप्रैल-फरवरी में सरकारी खर्च 11.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12.19 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, टैक्स वसूली 7.03 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 8.12 लाख करोड़ रुपये रही।

हालांकि, फरवरी के आंकड़े बेहतर रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले फरवरी में राजस्व घाटा 47100 करोड़ रुपये से घटकर 43900 करोड़ रुपये रहा। वहीं, वित्तीय घाटा 58600 करोड़ रुपये से घटकर 41680 करोड़ रुपये रहा।

फरवरी में सरकरा ने 1.08 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि टैक्स वसूली 66060 करोड़ रुपये की रही। पिछले साल फरवरी में सरकारी खर्चा 1.05 लाख करोड़ रुपये का था और 54100 करोड़ रुपये की टैक्स वसूली रही थी।

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जानिए वित्त वर्ष-13 के हिट-फ्लॉप शेयर :

वित्त वर्ष 2013 समाप्ति के कगार पर है, यह वित्त वर्ष बाजार के लिए काफी मिलाजुला रहा है। आर्थिक मोर्चे पर बाजार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में यहां यह आकलन करना बेहद जरूरी है कि इस कारोबारी साल में निवेशकों ने क्या खोया और क्या पाया है। यहां हम बता रहें हैं ऐसे शेयर जो वित्त वर्ष 2013 में हिट और फ्लॉप रहे हैं, वहीं आगामी कारोबारी साल में इन शेयरों की चाल कैसी रहेगी।

आईटीसी

आईटीसी के शेयर ने वित्त वर्ष 2013 में 35 फीसदी का रिटर्न दिया है। वहीं फिलहाल शेयर में 310-320 रुपये के स्तर पर रेसिस्टेंस है। ऐसे में मौजूदा निवेशकों को 300 रुपये के स्टॉपलॉस के साथ बने रहना चाहिए। हालांकि आनेवाले कारोबारी साल रिटर्न की तुलना में मौजूदा साल से कमजोर रहने की आशंका है।

एचयूएल

एचयूएल में ऊपरी स्तरों से काफी गिरावट देखी गई है, हालांकि शेयर में अह रिकवरी हो रही है। शेयर यदि 495-500 रुपये के स्तर पर आता है तो इसमें बिकवाली की रणनीति बनानी चाहिए। वहीं वित्त वर्ष 2014 एचयूएल के शेयर के लिए ज्यादा आकर्षक नहीं लग रहा है।

एचसीएल टेक

एचसीएल टेक के शेयर में वित्त वर्ष 2013 में 60 फीसदी का सकारात्मक रिटर्न दिया है। लंबी अवधि के लिहाज से ये शेयर काफी शानदार है। निवेशकों को इसमें बने रहना चाहिए, आनेवाले समय में शेयर 1,000-1,020 रुपये तक से स्तर छूने की क्षमता रखता है।

जिंदल स्टील एंड पावर

जिंदल के शेयर ने वित्त वर्ष 2013 में 35 फीसदी के नकारात्मक रिटर्न दिया है। फंडामेंटल नजरिए से शेयर काफी कमजोर लग रहा है। वहीं अगले 3 महीनों में शेयर में मौजूदा स्तरों से और ज्यादा गिरावट देखी जा सकती है।

बीएचईएल

वित्त वर्ष 2013 में बीएचईएल के शेयर में करीब 31 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों को लंबी अवधि के नजरिए से शेयर से दूरी बनाए रखना चाहिए। आनेवाले समय में शेयर लुढ़ककर 150-140 रुपये के स्तर दिखा सकता है।

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जानें 1 अप्रैल से आपकी जिंदगी में क्या बदलेगा :

1 अप्रैल यानि नए वित्तवर्ष में आपकी जिंदगी में बहुत कुछ बदल जाएगा जहां आपको रेल में सफर करने के लिए ज्यादा किराया चुकाना होगा वहीं एसी रेस्टोरेंट में खाना भी आपकी जेब पर भारी पड़ेगा।

1 अप्रैल से अपनी जेब ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार रहिए। अगर आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं तो आपको अब थोड़े ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। रेलवे 1 अप्रैल से रिजर्वेशन चार्ज बढ़ाने जा रहा है। अगर आप 1 अप्रैल से टिकट बुक कराएंगे तो अब आपको बुकिंग और टिकट कैंसिल करवाने के लिए 5 से 50 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे।

स्लीपर क्लास का टिकट बुक कराने पर 10 रूपये और कंफर्म टिकट कैंसिल करवाने पर 20 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे। साथ ही तत्काल टिकट करवाने पर भी आपको ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। तत्काल चार्ज बेसिक किराए का 30 फीसदी होगा। अगर आपने आईआरसीटीसी से टिकट बुक करवाया है तो स्लीपर क्लास के टिकट में 1 रूपया और एसी में 2 रूपया सर्विस टैक्स भी देना होगा। आपके लिए अच्छी बात ये है कि एक तारीख से आप 6 महीने और 12 महीने के सीजन टिकट खरीद पाएंगे।

ये तो हो गई सफर की बात अगर आप रेस्टोरेंट में खाना खाने जा रहे हैं तो यहां पर भी आपकी जेब पर चपत लगेगी। 1 अप्रैल से सभी एसी रेस्टोरेंट आपसे सर्विस टैक्स वसूलेंगे। अगर आप पैसा बचाना चाहते हैं तो घर पर ऑर्डर कर खाने में ही फायदा है। उधर इंश्योरेंस कंपनियां भी आपकी जेब पर नजर गड़ाए हुए है। 1 अप्रैल से आईआरडीए का कार पर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम औसतन 40 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार ने पीपीएफ ब्याज दर में जो 0.1 फीसदी कटौती की है वो भी 1 अप्रैल से लागू होगी।

अगर आप कार खरीदने की योजना बना रहे हैं तो जल्दी कर लें। होंडा अपनी कारों के दाम 1 अप्रैल से 2 फीसदी बढ़ाएगी। लग्जरी कार बनाने वाली कंपनी मर्सिडीज भी कारों के दाम 20 फीसदी तक बढ़ाएगी। ह्युंडई मोटर्स भी 1 तारीख से अपनी कारों के दाम बढ़ा सकती है। 1 अप्रैल से सेबी कॉल ऑक्शन की शुरूआत करेगा जिससे शेयरों में अचानक आए भारी उतार चढ़ाव पर रोक लगेगी। तो 1 अप्रैल से अपनी जिंदगी में इन बदलावों के लिए तैयार रहें।

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5600-5900 के दायरे में निफ्टी, मिडकैप से उम्मीद कम :

वित्त वर्ष 2013 के अंत में बाजार सुस्त हो गया है। बजट के बाद बाजार में अच्छी उछाल जरूर आई थी, लेकिन कुछ दिनों बाद ये तेजी हवा हो गई है। अब जानकार बाजार के कई दिनों तक सीमित दायरे में रहने का अनुमान जता रहे हैं।

अगले 6 महीने तक निफ्टी 5600-5900 के दायरे में ही झूमने वाला है। हालांकि उभरते हुए बाजारों के प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारतीय बाजार सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। लिहाजा आने वाले कुछ हफ्तों के बाद बाजार में उछाल संभव है। करेंट अकाउंट घाटे के आंकड़ों से बाजार पर कोई ज्यादा असर देखने को नहीं मिलने वाला है।

हाल के दिनों में मिडकैप शेयरों की बहुत ज्यादा पिटाई हुई है। ऐसे में पिटे हुए मिडकैप शेयरों को अपने ऊपरी स्तरों पर आने में काफी वक्त लग सकता है। ऑयल एंड गैस शेयरों में तेजी की उम्मीद है। मौजूदा स्तर से डीएलएफ में गिरावट की गुंजाइश कम है। ऑटो शेयरों में मांग और बिक्री की बजाए आंतरिक कारणों के चलते ज्यादा गिरावट आई है।

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कमोडिटी बाजार में आज क्या हो रणनीति :

रुपये में लौटी तेजी और अंतर्राष्ट्रीय बाजार की सुस्ती ने घरेलू बाजार में सोने पर दबाव बनाने का काम किया है। डॉलर के मुकाबले रुपया 54.46 पर खुला था, लेकिन अब रुपया 54.35 प्रति डॉलर के स्तर पर दिख रहा है। वहीं कॉमैक्स पर सोना सपाट होकर 1,606.50 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। नायमैक्स पर कच्चे तेल में भी सुस्ती दिख रही है।

फिलहाल एमसीएक्स पर सोना करीब 0.2 फीसदी की गिरावट के साथ 29,600 रुपये के नीचे कारोबार कर रहा है। वहीं चांदी 0.2 फीसदी लुढ़ककर 54,000 रुपये के नीचे बनी हुई है। एमसीएक्स पर कच्चा तेल सपाट होकर 5,260 रुपये पर कारोबार कर रहा है। एमसीएक्स पर बेस मेटल्स में 0.25-0.4 फीसदी की गिरावट आई है। कॉपर 0.4 फीसदी की कमजोरी के साथ 416 रुपये के नीचे कारोबार कर रहा है।

इस बीच एनसीडीईएक्स पर लाल मिर्च करीब 1.5 फीसदी की कमजोरी के साथ 6,500 रुपये पर आ गई है। हालांकि एनसीडीईएक्स पर धनिया करीब 1 फीसदी चढ़कर 6,730 रुपये पर कारोबार कर रहा है।

सोना एमसीएक्स (अप्रैल वायदा) : बेचें - 29780, स्टॉपलॉस - 29900 और लक्ष्य - 29500

नेचुरल गैस एमसीएक्स (अप्रैल वायदा) : खरीदें - 219, स्टॉपलॉस - 216 और लक्ष्य - 225

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Tuesday, March 26, 2013

सुस्ती पर बंद बाजार, मिडकैप की पिटाई:

होली की छुट्टी और एक्सपायरी के पहले बाजार सीमित दायरे में घूमते नजर आए। सेंसेक्स 23 अंक चढ़कर 18704 और निफ्टी 8 अंक चढ़कर 5642 पर बंद हुए।

लेकिन, मिडकैप शेयरों पर बिकवाली हावी रही। निफ्टी मिडकैप करीब 1 फीसदी टूटा। छोटे शेयरों में सुस्ती रही और बीएसई स्मॉलकैप मामूली बढ़त पर बंद हुआ।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयर 1.5 फीसदी और एफएमसीजी शेयर 1 फीसदी चढ़े। तकनीकी, आईटी, ऑटो और बैंक शेयर 0.6-0.3 फीसदी मजबूत हुए। हेल्थकेयर शेयरों में सुस्ती रही।

ऑयल एंड गैस, रियल्टी और कैपिटल गुड्स शेयर 2 फीसदी टूटे। पावर शेयरों में 1 फीसदी की गिरावट आई। मेटल और सरकारी कंपनियों के शेयर 0.3 फीसदी फिसले।

बाजार की चाल

अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से कमजोरी के संकेत मिलने से घरेलू बाजारों ने गिरावट के साथ शुरुआत की। लेकिन, कारोबार के पहले ही घंटे में बाजार संभले और सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में लौटे।

दोपहर तक बाजार में उतार-चढ़ाव भरा कारोबार दिखाई दिया। लेकिन, एशियाई बाजारों में गिरावट कम होने से घरेलू बाजारों ने भी मजबूती का रुख किया।

हालांकि, यूरोपीय बाजारों की मजबूत शुरुआत के बावजूद घरेलू बाजारों ने बढ़त गंवा दी। सेंसेक्स-निफ्टी ने लाल निशान में गोता लगाया। मिडकैप शेयरों में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई।

कारोबार के आखिरी आधे में घंटे में बाजार ने फिर से रफ्तार पकड़ने की कोशिश की। लेकिन, बाजार मजबूती को बनाए नहीं रख सके और दोबारा फिसले।

क्या चढ़ा, क्या गिरा

दिग्गजों में भारती एयरटेल 3 फीसदी चढ़ा। भारती एयरटेल की सब्सिडियरी कंपनी ने 10 साल के बॉन्ड्स जारी कर 50 करोड़ डॉलर जुटाए हैं।

कोल इंडिया में 1.5 फीसदी की तेजी आई। खबरें हैं कि सरकार कंपनी की रीस्ट्रक्चरिंग के लिए सलाहकारों की जल्द नियुक्ति करने वाली है।

एचयूएल, रैनबैक्सी, टाटा मोटर्स, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल टेक, टीसीएस 2.5-1 फीसदी मजबूत हुए।

क्रेडिट सुईस ने एनआईआईटी टेक को आउटपरफॉर्मर की रेटिंग दी है। एनआईआईटी टेक के शेयरों में 2.5 फीसदी तक की तेजी आई।

आईआरबी इंफ्रा को गोवा-कर्नाटक सीमा को 4 लेन का करने के लिए 2,600 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है।

एमटीएनएल बोर्ड ने 3000 करोड़ रुपये एनसीडी के जरिए जुटाने की मंजूरी दे दी है। एमटीएनएल 0.5 फीसदी तक मजबूत हुआ।

एलेंबिक फार्मा को एंटी हाइपर टेंशन दवा बनाने के लिए अमेरिकी एफडीए से मंजूरी मिली है। एलेंबिक फार्मा 1 फीसदी तक चढ़ा।

रिलायंस इंफ्रा 5.5 फीसदी लुढ़का। शेयर 2003 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा है। रिलांयस कैपिटल, रिलायंस कम्यूनिकेशंस, रिलायंस पावर जैसे बाकी एडीएजी शेयरों में 2.25-2.5 फीसदी की गिरावट आई।

रिलायंस इंडस्ट्रीज में 3.5 फीसदी की गिरावट आई। शेयर 29 नवंबर 2012 के बाद के निचले स्तर पर पहुंचा है।

फाइजर ने डेट्रॉल एलए नामक दवा के पेटेंट को लेकर ल्यूपिन के खिलाफ अदालत में मुकदमा कर दिया है। लुपिन 1 फीसदी गिरा।

एलएंडटी ने पैंटालून से नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कारोबार में 50 फीसदी हिस्सा 500 करोड़ रुपये में खरीदा है। एलएंडटी 2 फीसदी और पैंटालून रिटेल 4 फीसदी टूटे।

मूडीज द्वारा बीएफएसआर रेटिंग को घटाने के बाद सिंडिकेट बैंक 4 फीसदी, आईओबी 2 फीसदी और ओरियंटल बैंक 1.5 फीसदी लुढ़के।

यूनाइटेड स्पिरिट्स के शेयरों में 1 फीसदी कमजोरी आई। खबरे हैं कि अगले हफ्ते डियाजियो यूनाइटेड स्पिरिट्स के लिए ओपन ऑफर ला सकता है।

आंजनेया लाइफ 5 फीसदी टूटा। 22 कारोबारी सत्रों में आंजनेया लाइफकेयर के शेयर 80.8 फीसदी लुढ़क चुके हैं।

जेट एयरवेज 1 वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट 60 केबिन क्रू के साथ एतिहाद को लीज पर देगी। जेट एयरवेज 1.5 फीसदी गिरा।

डीबी रियल्टी के प्रोमोटर्स ने एफडीएफसी के पास 2.6 करोड़ शेयर गिरवी रखें हैं। डीबी रियल्टी 3 फीसदी लुढ़का।

उत्तम गालवा ने क्यूआईपी के लिए फ्लोर प्राइस 76.48 रुपये प्रति शेयर तय किया है। उत्तम गालवा 4.5 फीसदी तक टूटा।

अंतर्राष्ट्रीय संकेत

एशियाई बाजारों में शंघाई कंपोजिट 1.25 फीसदी टूटा। निक्केई 0.6 फीसदी गिरा। स्ट्रेट्स टाइम्स, कॉस्पी और हैंग सैंग में 0.6-0.25 फीसदी की मजबूती आई।

यूरोपीय बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। सीएसी 0.75 फीसदी चढ़ा है। डीएएक्स में करीब 0.5 फीसदी की मजबूती है। एफटीएसई में 0.2 फीसदी की बढ़त है।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आई है। रुपया 54.31 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। सोमवार को रुपया 54.17 पर बंद हुआ था।

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कैसे रहेंगे कंपनियों के चौथी तिमाही नतीजे:

कुछ ही दिनों में कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे आना शुरू होंगे। चौथी तिमाही में भी कंपनियों के नतीजों पर दबाव बना रहेगा। आय में ग्रोथ की रफ्तार कम होगी साथ ही मार्जिन में भी कमी आ सकती है।

चौथी तिमाही में कंपनियों की आय में ग्रोथ घटकर 7 फीसदी के आसपास आ सकती है। वहीं ऑपरेटिंग मार्जिन में 0.3-0.5 फीसदी की कमी संभव है।

निवेश आधारित सेक्टर जैसे कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स, सीमेंट, स्टील के 6-7 तिमाही के नतीजे खराब रहे हैं और इस तिमाही में भी ये सिलसिला जारी रहने की आशंका है। प्रोजेक्ट में देरी से कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स कंपनियों पर दबाव देखा जाएगा।

खपत आधारित सेक्टर जैसे 2 व्हीलर, कार, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग में भी कमी दिख रही है जिससे इस तिमाही में इनके नतीजे ज्यादा अच्छे रहने की उम्मीद नहीं है। ऊंची ब्याज दरों से इन कंपनियों के मुनाफे पर असर देखा जा रहा है।

रुपये में कमजोरी से आईटी, फार्मा कंपनियों के नतीजे बेहतर रह सकते हैं। आईटी और फार्मा कंपनियों में ज्यादातर निर्यात आधरित कारोबार होने से इन कंपनियों के नतीजे अच्छे रह सकते हैं।

कमाई बढ़ने से एफएमसीजी, सीमेंट, चीनी कंपनियों में अच्छी ग्रोथ देखी जाएगी। वित्त वर्ष 2014 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों के घटने का असर देखा जाएगा और इससे ऑटो, रियल एस्टेट सेक्टर में सुधार आएगा।

पिछले 9 महीने में कैपिटल गुड्स सेक्टर में ऑर्डर घटने की वजह से नतीजे खराब रहे हैं। चौथी तिमाही में भी ये स्थिति सुधरने की उम्मीद नहीं है।

चौथी तिमाही में स्टील कंपनियों की आय में ग्रोथ घटने की आशंका है। हालांकि टैरिफ बढ़ने और क्षमता विस्तार से पावर जेनरेशन कंपनियों को फायदा हो सकता है और इनके नतीजे अन्य सेक्टर के मुकाबले अच्छे रह सकते हैं।

मांग घटने से कमर्शियल व्हीकल, हाउसिंग, होटल कंपनियों पर दबाव देखा जाएगा। अगली 1-2 तिमाही तक इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव रहेगा और आय में कमी आएगी।

मीडिया सेक्टर में विज्ञापनों की घटती संख्या के चलते थोड़ी मंदी देखी जाएगी। हालांकि डिजिटाइजेशन के चलते टीवी मीडिया से जुड़ी कंपनियों के नतीजे अच्छे रह सकते हैं।

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फाइजर ने ल्यूपिन को अदालत में घसीटा:

2 दवा कंपनियों की लड़ाई अदालत में पहुंच गई है। फाइजर ने डेट्रॉल एलए नामक दवा के पेटेंट को लेकर ल्यूपिन के खिलाफ अदालत में मुकदमा कर दिया है। ल्यूपिन ने डेट्राल एलए के जेनरिक वर्जन के लिए अर्जी दी हुई है। डेट्रॉल एलए की सालाना बिक्री 60 करोड़ डॉलर की है और ये दवा मूत्ररोग के विकारों में काम आती है।

डेट्रॉल के जेनरिक वर्जन के लिए सबसे पहले टेवा ने अर्जी दी हुई है। इंपैक्स, मायलान, एपोटेक्स और टोरेंट फार्मा ने भी डेट्रॉल एलए के जेनरिक वर्जन के लिए अर्जी दी हुई है। फाइजर ने जेनरिक कंपनियों के साथ पेटेंट का मुद्दा सुलझा लिया है। डेट्रॉल के जेनरिक वर्जन के साल 2014 के शुरुआत तक बाजार में आने की उम्मीद है।

हालांकि फाइजर के मुकदमा दायर करने के चलते अमेरिकी बाजार में ल्यूपिन की डेट्राल के साथ एंट्री देरी से होने की आशंका है। इस खबर के बाद एनएसई पर ल्यूपिन के शेयरों में 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

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स्टील कीमतों में नहीं होगी बढ़ोतरी: सेल:

वैश्विक मंदी की वजह से घरेलू स्टील की मांग पर असर पड़ रहा है। हाल में आई गिरावट के बाद घरेलू स्टील की मांग में बढ़ोतरी आने की उम्मीद है।

सेल के चेयरमैन, सी एस वर्मा के मुताबिक मौजूदा स्तर से अब स्टील के दामों में बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। 2012 में स्टील के दाम 10 फीसदी तक घटे थे।

22 मार्च 2013 को सेल में एलआईसी का हिस्सा बढ़कर 9.13 फीसदी हो गया है, जबकि 31 दिसंबर 2012 को कंपनी में एलआईसी का हिस्सा 3.69 फीसदी था। सेल के ओएफएस में एलआईसी ने 35 फीसदी हिस्से के लिए बोली लगाई थी।

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बाजार से उठा कंपनियों का भरोसा: सेबी:

सेबी ने माना है कि कंपनियों की पूंजी जुटाने की क्षमता में कमी आई है। सेबी के चेयरमैन, यू के सिन्हा का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कंपनियों द्वारा बाजार से जुटाई गई पूंजी में भारी गिरावट आई है।

यू के सिन्हा के मुताबिक पिछले 3 साल में कंपनियों ने 60000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना टाली है। वित्त वर्ष 2013 में अब तक कंपनियों ने बाजार से 14400 करोड़ रुपये जुटाए हैं। जबकि पिछले साल ये आंकड़ा 16000 करोड़ रुपये था।

कंपनियों द्वारा कम पूंजी जुटाए जाने का सीधा पर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। निवेश घटने से ग्रोथ की रफ्तार सुस्त होती है। लेकिन, यू के सिन्हा का मानना है कि सरकार और आरबीआई द्वारा उठाए गए कदम ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए काफी है।

हाल में लिस्टेड कंपनियों में से 60 फीसदी कंपनियों के शेयरों का भाव इश्यू प्राइस के नीचे आ चुका है। यू के सिन्हा के मुताबिक आईपीओ शेयरों पर नजर रखने के लिए इंवेस्टर बैंकर्स की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है।

जून से 25 फीसदी पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम लागू होना है। यू के सिन्हा के मुताबिक नियमों को लागू न करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रावाई होगी। 200 कंपनियों में अब तक प्रमोटरों के पास 75 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है।

सेबी शेयर बायबैक के लिए जल्द नियम बनाने वाला है। शेयर बायबैक नियम निवेशकों के हित की रक्षा करने के लिए बनाए जाएंगे। इसी साल सेबी इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए नए नियमों का ऐलान करेगा।

इसके अलावा सेबी बिना आईपीओ के एसएमई ट्रेडिंग को मंजूरी देने पर विचार कर रहा है। सभी निवेश विकल्पों के लिए एक ही केवाईसी फॉर्म लागू करने पर 2 महीनों में अंतिम सिफारिशें जारी की जाएंगी।

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22 दिन में आंजनेया लाइफ 81% टूटा:

फरवरी से आंजनेया लाइफकेयर के शेयरों की पिटाई हो रही है। 22 कारोबारी सत्रों में आंजनेया लाइफकेयर के शेयर 80.8 फीसदी लुढ़क चुके हैं। आज भी शेयर 5 फीसदी गिरा हुआ है।

18 मार्च को आंजनेया लाइफकेयर ने 7.5 करोड़ डॉलर के एफसीसीबी इश्यू लाई थी, जिसे ठंडा रिस्पॉन्स मिला। कंपनी सिर्फ 4 करोड़ डॉलर की जुटाई पाई।

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दिशाहीन बाजार, मिडकैप शेयर टूटे:

बाजार असमंजस में नजर आ रहे हैं और उतार-चढ़ाव भरा कारोबार हो रहा है। दोपहर 2:35 बजे, सेंसेक्स 38 अंक चढ़कर 18719 और निफ्टी 11 अंक चढ़कर 5645 के स्तर पर हैं। मिडकैप शेयर 1.25 फीसदी टूटे हैं।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और एफएमसीजी शेयर 1 फीसदी चढ़े हैं। तकनीकी, आईटी, ऑटो और बैंक शेयर 0.6-0.2 फीसदी मजबूत हैं। हेल्थकेयर शेयर सुस्त हैं।

रियल्टी शेयर 2.5 फीसदी लुढ़के हैं। कैपिटल गुड्स, ऑयल एंड गैस और पावर शेयर 2-1 फीसदी गिरे हैं। सरकारी कंपनियों के शेयरों में 0.25 फीसदी की कमजोरी है।

निफ्टी शेयरों में एचयूएल, एचडीएफसी, भारती एयरटेल, रैनबैक्सी, टाटा मोटर्स, विप्रो, कोल इंडिया, टीसीएस, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक 2.5-1 फीसदी चढ़े हैं।

दिग्गजों में रिलायंस इंफ्रा 5.5 फीसदी लुढ़का है। सीमंस, डीएलएफ, अंबुजा सीमेंट, गेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पीएनबी, एलएंडटी, टाटा स्टील 4.25-2 फीसदी टूटे हैं।

यूरोपीय बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। सीएसी 0.6 फीसदी और डीएएक्स 0.3 फीसदी मजबूत हैं। एफटीएसई में मामूली बढ़त है।

एशियाई बाजारों में शंघाई कंपोजिट 1.25 फीसदी टूटा है। निक्केई 0.6 फीसदी गिरा है। स्ट्रेट्स टाइम्स, कॉस्पी और हैंग सैंग में 0.5-0.25 फीसदी की मजबूती है।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आई है। रुपया 54.34 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। सोमवार को रुपया 54.17 पर बंद हुआ था।

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कमोडिटी बाजारः कच्चा तेल 0.25% उछला:

साइप्रस संकट टलने की उम्मीद में कच्चे तेल में तेजी आई है। नायमैक्स पर कच्चे तेल का भाव 95 डॉलर के बेहद करीब पहुंच गया है। घरेलू बाजार में भी बढ़त पर कारोबार हो रहा है। इस बीच सऊदी अरब के तेल मंत्री अली अल नैमी ने कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर तक रहने को रिजनेबल करार दिया है। फिलहाल एमसीएक्स पर कच्चा तेल 0.25 फीसदी की उछाल के साथ 5,170 रुपये पर कारोबार कर रहा है।

नेचुरल गैस मे आज करीब 1 फीसदी की गिरावट आई है। इस हफ्ते लगातार दूसरे दिन नेचुरल गैस में गिरावट पर कारोबार हो रहा है। फिलहाल एमसीएक्स पर नेचुरल गैस 213.50 रुपये के नीचे कारोबार कर रहा है।

सोने में आज भी गिरावट पर कारोबार हो रहा है। एमसीएक्स पर सोने का भाव 29,500 रुपये के नीचे है। वहीं कॉमैक्स पर सोना 1,600 डॉलर के पास कारोबार कर रहा है। इस दौरान चांदी में भी गिरावट आई है और एमसीएक्स में चांदी का भाव 54,000 रुपये के भी नीचे आ गया है।

बेस मेटल्स में आज भी गिरावट पर कारोबार हो रहा है। साइप्रस संकट भले कम होता दिख रहा है, लेकिन दूसरी ओर से कॉपर का स्टॉक तेजी से बढ़ रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज के गोदामों मे कॉपर का स्टॉक पिछले 10 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। एमसीएक्स पर बेस मेटल्स में 0.1-0.5 फीसदी की गिरावट आई है।

कॉपर 0.3 फीसदी लुढ़ककर 416 रुपये के नीचे कारोबार कर रहा है। एल्यूमिनियम में 0.3 फीसदी, निकेल में 0.5 फीसदी, लेड और जिंक में 0.1 फीसदी की कमजोरी आई है।

सोना एमसीएक्स (अप्रैल वायदा) : बेचें - 29540, स्टॉपलॉस - 29640 और लक्ष्य - 29340

चांदी एमसीएक्स (मई वायदा) : बेचें - 54100, स्टॉपलॉस - 54400 और लक्ष्य - 53500

कॉपर एमसीएक्स (अप्रैल वायदा) : बेचें - 417, स्टॉपलॉस - 419 और लक्ष्य - 412

कच्चा तेल एमसीएक्स (अप्रैल वायदा) : खरीदें - 5147, स्टॉपलॉस - 5125 और लक्ष्य - 5195

निकेल एमसीएक्स (मार्च वायदा) : बेचें - 922, स्टॉपलॉस - 930 और लक्ष्य - 909

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कालीमिर्च ने बढ़ाई एनसीडीईएक्स की मुश्किलें:

काली मिर्च के मामले पर एनसीडीईएक्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एग्री कमोडिटी में वायदा कारोबार कराने वाले देश के सबसे बड़े कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स को कारोबारियों ने कोर्ट में खींच लिया है। मामला काली मिर्च से जुड़ा है। काली मिर्च व्यापारी संघ ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर बेंच में एनसीडीईएक्स के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इस मामले में एनसीडीईएक्स के अलावा एनएसडीएल, सीडीएसएल और कंज्युमर अफेयर्स सेक्रेटरी को भी पक्ष बनाया गया है।

करीब 5 महीने पहले कुछ कारोबारियों ने एनसीडीईएक्स के वेयरहाउसों से खराब क्वालिटी के काली मिर्च की डिलिवरी की शिकायत की थी। एनसीडीईएक्स ने जांच का हवाला देते हुए कोच्चि और एर्नाकुलम के करीब 6 गोदामों को सील कर दियाथा। करीब 7,000 टन के इस काली मिर्च की मौजूदा बाजार कीमत करीब 300 करोड़ रुपये है।

सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक एनसीडीईएक्स की ओर से कोई ठोस कदम न उठाने की वजह से कारोबारी इस मामले को लेकर कोर्ट की शरण में जाने को मजबूर हो गए हैं।

इस पूरे मामले पर एनसीडीईएक्स का भी पक्ष जानने की कोशिश की गई। एनसीडीईएक्स ने कहा है कि कोर्ट की ओर से इसपर अभी उसे आधिकारिक तौर पर नोटिस नहीं मिली है, इस वजह से मामले पर वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देगा।

इससे पहले काली मिर्च का विवाद गहराने के बाद से एफएमसी ने इसके जून वायदा की लॉन्चिंग पर रोक लगा दिया था। फिलहाल एनसीडीईएक्स पर सिर्फ अप्रैल और मई वायदा में ही कारोबार हो रहा है। इस कमोडिटी से जुड़ी तमाम तरह की बुरी खबरों की वजह से काली मिर्च के वायदा में वॉल्यूम भी बेहद कम हो गया है।

काली मिर्च एनसीडीईएक्स (अप्रैल वायदा) : बेचें - 35800, स्टॉपलॉस - 36200 और लक्ष्य - 35000

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मूडीज ने 3 पीएसयू बैंकों की रेटिंग घटाई:

रेटिंग एजेंसी मूडीज ने सोमवार को 3 पीएसयू बैंकों की स्टैंडअलोन बैंक फाइनेंशियल स्ट्रेन्थ (बीएफएसआर) रेटिंग को घटा दिया है।

मूडीज ने इंडियन ओवरसीज बैंक, सिंडिकेट बैंक और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की रेटिंग घटाई है। मूडीज ने इस डाउनग्रेडिंग के लिए बैंक की कमजोर एसेट क्लाविटी, मुनाफे पर दबाव और पूंजी जुटाने में आ रही दिक्कतों का हवाला दिया है।

मूडीज ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ रेटिंग डी+ से घटाकर डी कर दी है। मूडीज का मानना है कि ओबीसी पूंजी के लिए सरकार पर निर्भर है और बैंक खुद पूंजी जुटाने में सक्षम नहीं है। ओबीसी की रेटिंग आउटलुक निगेटिव, जबकि बैंक की डिपॉजिट रेटिंग स्टेबल की गई है। इंफ्रा, आयरन एंड स्टील और टेक्सटाइल में बड़ा एक्सपोजर ओबीसी के लिए निगेटिव साबित हो सकता है।

मूडीज ने इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ रेटिंग डी से घटाकर डी- कर दी है। आईओबी की रेटिंग आउटलुक स्टेबल से घटाकर निगेटिव कर दी है। मूडीज ने खराब एसेट क्वालिटी और कमजोर मुनाफे के चलते आईओबी की रेटिंग घटाई है। मूडीज का मानना है कि आईओबी के कोर कैपिटल में कमी आई है और बैंक आंतरिक संसाधनों से पूंजी जुटाने को लेकर कोई खास उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

मूडीज ने सिंडिकेट बैंक की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ रेटिंग डी+ से घटाकर डी कर दी है। 31 दिसंबर तक सिंडिकेट बैंक ग्रॉस एनपीए और रीस्ट्रक्चर्ड लोन बढ़कर 9.5 फीसदी हो गए हैं। लिहाजा साल 2013 में सिंडिकेट बैंक की एसेट क्वालिटी में और दबाव की आशंका बनी हुई है।

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महिंद्रा सत्यम-टेक महिंद्रा का विलय टला:

महिंद्रा सत्यम का टेक महिंद्रा के साथ विलय 6 महीने के लिए टल गया है। हालांकि टेक महिंद्रा के सीएफओ संजॉय आनंद का कहना है कि महिंद्रा सत्यम-टेक महिंद्रा विलय टला नहीं हैं बल्कि इसकी समयसीमा बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी गई है, इस अवधि के दौरान कभी भी विलय हो सकता है।

संजॉय आनंद के मुताबिक आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की मंजूरी में देरी के कारण महिंद्रा सत्यम के साथ विलय की समयसीमा बढ़ी है। इस विलय पर आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में 1 अप्रैल को सुनवाई होनी है। अगर आंध्र प्रदेश की हाई कोर्ट जल्दी ही इस पर मंजूरी दे देती है तो विलय जल्दी ही हो सकता है और इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। 

आंध्र प्रदेश की हाई कोर्ट ने महिंद्रा सत्यम के खातों की जांच एक स्वायत्त संस्था को सौंपी थी जिसकी रिपोर्ट पेश हो चुकी है। जल्द ही इस रिपोर्ट के आधार पर महिंद्रा सत्यम को विलय की मंजूरी मिल सकती है।

संजॉय आनंद के मुताबिक टेक महिंद्रा का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और विदेश में भी कारोबार फैल रहा है। महिंद्रा सत्यम का साथ मिलने के बाद कंपनी की उन देशों में पहुंच बढ़ेगी जहां अभी कंपनी की ज्यादा पकड़ नहीं है। दोनों कंपनियों के कुल मिलाकर 80,000 कर्मचारी हैं।

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